जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. CJP से लेकर विपक्षी नेता उनके इस्तीफे की मांग को लेकर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन एक वर्ग के लोग उनके शैक्षणिक सफर की भी चर्चा भी कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में शुरुआती पढ़ाई से लेकर IIT कानपुर से इंजीनियरिंग और फिर IAS अधिकारी बनने तक का उनका सफर काफी लंबा रहा है. 1988 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार आज देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं. आखिर कैसी रही उनकी पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा से निर्वाचन आयोग के शीर्ष पद तक पहुंचने की कहानी?
सितंबर 2026 के तीसरे हफ्ते में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग के अंदरूनी कामकाज को न केवल जनता के सामने रखा बल्कि सियासी विवाद का केंद्र भी बना दिया.
खास है एजुकेशन से जुड़ा सफर
साल 1964 में उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्में ज्ञानेश कुमार की शुरुआती शिक्षा वहीं से हुई. ये सफर केवल आगरा तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर तक भी गया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 1979 में हाई स्कूल और 1981 में इंटरमीडिएट में उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा में टॉप भी किया था. लखनऊ से अपने जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्होंने यहां पढ़ाई की थी और अब कई साल की सार्वजनिक सेवा के बाद वह उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को संदेश देने लौटे हैं.
लखनऊ में पढ़ाई के बाद कानपुर में की पढ़ाई
लखनऊ के बाद ज्ञानेश कुमार ने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की. संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, उन्हें 1985 की बीटी/सीई ग्रेजुएटिंग क्लास से जोड़ा गया है. इसी साल उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी. आईआईटी कानपुर की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने भारत में आईसीएफएआई से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट में एनवायरमेंटल इकोनॉमिक्स की भी पढ़ाई की.
IAS अधिकारी के तौर पर कैसा रहा सफर?
ज्ञानेश कुमार के करियर का अगला और सबसे खास चरण 1988 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में शुरू हुआ, जब उन्हें केरल कैडर मिला. केरल में उन्होंने कॉरपोरेशन ऑफ कोचिन के म्युनिसिपल कमिश्नर, केरल स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर, एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर, गोश्री आइलैंड्स डेवलपमेंट अथॉरिटी के सचिव, त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट डेवलपमेंट सोसायटी के मैनेजिंग डायरेक्टर और नई दिल्ली में केरल हाउस के रेजिडेंट कमिश्नर के तौर पर काम किया. इसके बाद उन्होंने भारत सरकार में भी वरिष्ठ पद संभाले. गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के तौर पर उनका कार्यकाल जम्मू कश्मीर और अयोध्या से जुड़े बड़े घटनाक्रमों के दौरान रहा.
रिटायर होने के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी
31 जनवरी, 2024 को सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद 15 मार्च 2024 को उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया. इस पद पर उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान काम किया. 19 फरवरी 2025 को उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला और इस पद पर पहुंचने वाले 26वें व्यक्ति बने. उत्तर प्रदेश के परीक्षा कक्षों से लेकर आईआईटी कानपुर की पढ़ाई, केरल के प्रशासनिक पदों और फिर निर्वाचन आयोग के सर्वोच्च पद तक ज्ञानेश कुमार का सफर लंबा रहा है. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और सार्वजनिक सेवा के कई दशक रिकॉर्ड में दर्ज हैं.