कई कर्मचारियों के लिए अच्छी नौकरी का मतलब अच्छी सैलरी, मुफ्त खाना, टीम के साथ घूमना या जिम की सुविधा होता है. लेकिन बेंगलुरु में काम करने वाले वरिष्ठ AI इंजीनियर अमन वैष्णव का अनुभव बताता है कि नौकरी में सुकून और भरोसा भी उतना ही जरूरी है. उनके मुताबिक, ऐसा माहौल जहां कर्मचारी को बार-बार अपनी बात साबित न करनी पड़े, छुट्टी लेने के लिए लंबी सफाई न देनी पड़े और काम करने की आजादी मिले, नौकरी को ज्यादा सहज बना सकता है.
सप्ताह में दो दिन ऑफिस जाते हैं वैष्णव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में अमन ने बताया कि वह सप्ताह में दो बार और अपनी इच्छा के अनुसार ऑफिस जाते हैं. उनके ऑफिस में काम के घंटों और बैठने की जगह से ज्यादा इस बात को अहमियत दी जाती है कि काम पूरा हो रहा है या नहीं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में यह भी कहा कि मेरे आने और जाने का समय दर्ज करने वाली कोई बायोमेट्रिक निगरानी नहीं है और न ही कोई सीट तय है. मैं कोई भी टेबल चुनता हूं, अपना लैपटॉप खोलता हूं और काम शुरू कर देता हूं.
छुट्टी लेने के लिए नहीं देनी पड़ती लंबी सफाई
वैष्णव के मुताबिक, छुट्टी लेने का तरीका भी काफी आसान है. उन्होंने कहा कि मैं केवल एक मैसेज भेजता हूं कि आज छुट्टी ले रहा हूं और मेरे मैनेजर कहते हैं, मजे करो, कल मिलते हैं. उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि शुक्रवार की छुट्टी लेने के लिए न तो उन्हें कोई इमोशनल मैसेज करना होता है और न ही कोई बहाना बनाना पड़ता है.
वरिष्ठ और कनिष्ठ पद का नहीं है दबाव
वैष्णव के मुताबिक, उनके ऑफिस में बड़े और छोटे पद को लेकर कोई भेदभाव नहीं है. संगठन का प्रमुख भी उनके साथ बैठते हैं. वहां मैनेजर काम के हर छोटे हिस्से में दखल नहीं देते और न ही बेवजह जल्दबाजी करते हैं. कर्मचारियों से बस उम्मीद की जाती है कि वे अपनी जिम्मेदारी पूरी करें.
उनका अनुभव उस सोच पर भी सवाल उठाता है, जिसमें कर्मचारी के ऑफिस में बिताए गए घंटों को उसके काम का पैमाना मान लिया जाता है. वैष्णव के मुताबिक, काम करने की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है. किसी कर्मचारी का प्रदर्शन केवल इस बात से नहीं तय होना चाहिए कि वह कितनी देर अपनी सीट पर बैठा रहा, बल्कि इससे भी कि उसने अपना काम कितना पूरा किया.
अच्छी सैलरी के साथ निजी जिंदगी के लिए समय भी जरूरी
नौकरी चुनते समय अच्छी सैलरी निश्चित रूप से अहम होती है, क्योंकि इससे आर्थिक जरूरतें पूरी होती हैं. लेकिन रोजमर्रा के कामकाज का माहौल भी यह तय करता है कि कोई कर्मचारी अपनी नौकरी में कितना सहज महसूस करता है. लगातार निगरानी, हर बात पर पूछताछ और छुट्टी लेने के लिए सफाई देने का दबाव अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी को भी तनावपूर्ण बना सकता है. इसके उलट, भरोसे और लचीलेपन वाला माहौल कर्मचारियों को अपने काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकता है.
हर ऑफिस में ऐसा माहौल होना संभव नहीं
हर ऑफिस में इस तरह की आजादी संभव नहीं है. अलग-अलग नौकरियों की जरूरतें और जिम्मेदारियां अलग होती हैं. फिर भी वैष्णव का अनुभव यह सवाल जरूर उठाता है कि कंपनियां कर्मचारियों के प्रदर्शन को कैसे मापती हैं. ऑफिस में बिताए गए घंटों से या उनके पूरे किए गए काम से.
पोस्ट किए गए वीडियो में वैष्णव ने आगे कहा कि हाई CTC निश्चित तौर पर आपके बिल चुकाती है, लेकिन काम की अच्छी जगह आपके सुकून महसूस करवाती है. उनका अनुभव यही बताता है कि अच्छी नौकरी केवल मोटी सैलरी तक सीमित नहीं है. काम में भरोसा, सम्मान, आसानी से छुट्टी मिलना और निजी जिंदगी के लिए समय मिलना भी किसी नौकरी को लंबे समय तक निभाने लायक बना सकते हैं.