केरल के रहने वाले 30 साल के हैजिल जेबी कहते हैं कि मैंने अपने सपने को पूरा करने के लिए 10 साल इंतजार किया था. मैं इसे और टालना नहीं चाहता था. परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने से लेकर जोमैटो डिलीवरी पार्टनर का काम करने से लेकर पायलट बनने तक का उनका ये सफर बेहद चुनौतियों रही हैं. इसके साथ ही इंजीनियरिंग में 20 विषयों में बैकलॉग, आर्थिक तंगी, कोविड-19 महामारी के दौरान पिता का निधन और करियर में बार-बार मिली असफलताओं ने उनके दृढ़ संकल्प की परीक्षा ली.
फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और जोमैटो डिलीवरी पार्टनर, मैथ टीचर, ट्रक ड्राइवर और बस ड्राइवर के रूप में काम करते हुए अपने सपने को साकार करने का रास्ता खोजते रहे. केरल के त्रिशूर जिले के कोडुंगल्लूर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जेबी का मानना था कि शिक्षा और अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकती है. भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने के असफल प्रयासों के बाद, उन्होंने अन्य करियर विकल्पों को आजमाया, लेकिन पायलट बनने का उनका सपना कभी नहीं धुंधलाया.
आर्थिक तंगी की वजह से सपने पूरी करने में हुई देरी
आर्थिक तंगी के कारण उनका यह सपना कई सालों तक अधूरा रहा. लेकिन साल की उम्र में जेबी ने फैसला किया कि अब और इंतजार नहीं किया जा सकता. उन्होंने फिलीपींस जाकर फास्ट एविएशन एकेडमी इंक. में एडमिशन लिया और पायलट प्रशिक्षण शुरू किया, जो उनके सपने को पूरा करने में पहला कदम था.

साधारण परिवार, बड़े सपने
बता दें कि हैजिल जेबी एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े. उन्होंने देखा कि उनके माता-पिता तीन बच्चों की परवरिश के लिए कितनी मेहनत करते थे. उनके पिता विदेश में टाइपिस्ट का काम करते थे और मां घर संभालती थीं. बचपन में उन्हें रिश्तेदारों के बीच भेदभाव भी झेलना पड़ा. इन अनुभवों ने उन्हें कम उम्र में ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का महत्व समझा दिया.
जेबी स्वभाव से शर्मीले थे. उन्हें लोगों से बातचीत शुरू करने और नए लोगों से घुलने-मिलने में परेशानी होती थी. बचपन में ही उन्होंने समझ लिया था कि आर्थिक तंगी से निकलने के लिए अच्छी पढ़ाई करना और अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी पाना जरूरी है. जेबी के मुताबिक, आसपास के हालात ने उन्हें कड़ी मेहनत करने और पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया. हालांकि, उस समय तक उन्हें यह तय नहीं था कि वह किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं.

हवाई जहाज देखना सपने जैसा
हालांकि, 10वीं तक उन्हें यह भी नहीं पता था कि वह किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं. लेकिन उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया, जब एक दोस्त ने उन्हें विमान रखरखाव इंजीनियरिंग और विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के मौकों के बारे में बताया. इसके बाद जेबी ने इस क्षेत्र के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. विमानों को लेकर उनकी दिलचस्पी भी बढ़ने लगी. पहली बार उन्हें लगा कि वह किसी खास पेशे में अपना भविष्य बना सकते हैं.
हालांकि, उनके परिवार ने इस फैसले का साथ नहीं दिया. इसके पीछे रिश्तेदारों का प्रभाव भी एक अहम वजह थी. जेबी ने विमान रखरखाव इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने का विचार छोड़ दिया. उन्होंने केरल के मुन्नार स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया.

एडमिशन लेना बड़ी बात नहीं थी. उन्होंने बताया कि कॉलेज में दोस्तों के साथ उन्हें समय बिताना अच्छा लगता था लेकिन पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था. उन्हें अपने कोर्स में दिलचस्पी नहीं थी. इसकी वजह से वह परीक्षाओं में फेल होने लगे. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उनके 20 विषयों में बैकलॉग हो गए. इन विषयों को पास करने की कोशिश के बीच वह लगातार यही सोचते रहे कि क्या विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का कोई दूसरा रास्ता भी है.
20 बैकलॉग, जोमैटो में डिलीवरी का काम और शिक्षक की नौकरी
बाद में एक दोस्त ने जेबी को बताया कि इंजीनियरिंग की डिग्री के आधार पर भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होना का मौका भी मिल सकता है. इस रास्ते से उनके लिए पायलट बनने की संभावना भी थी. इसके बाद उन्होंने अपने सभी बैकलॉग पूरे किए और तय समय से छह महीने देर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
रिजल्ट का इंतजार करते हुए जेबी ने कमाई के लिए कोच्चि में जोमैटो के डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. इस काम के दौरान उन्हें शहर के अलग-अलग इलाकों में जाने और कई तरह के लोगों से मिलने का मौका मिला.
जेबी बताते हैं कि जोमैटो में काम करने का अनुभव अच्छा रहा. मुझे अलग-अलग लोगों से मिलने, नई जगहों को देखने और शहर को समझने का मौका मिला. इससे मुझे अपनी जिंदगी को कुछ हद तक व्यवस्थित करने में भी मदद मिली. इसके बाद जेबी बेंगलुरु चले गए, जहां उन्होंने बायजूज में मैथ टीचर के तौर पर काम करना शुरू किया.
नौकरी के साथ-साथ वह भारतीय सशस्त्र बलों के चयन इंटरव्यू की तैयारी भी कर रहे थे. उन्हें उम्मीद थी कि इस तरह उन्हें सेना में शामिल होने और पायलट बनने का मौका मिल सकता है. लेकिन इस दौरान ही उनके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई. इससे उनकी आगे की प्लानिंग पर काफी असर पड़ा.
पिता का निधन
जेबी के पिता को कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में दुबई में दिल का दौरा पड़ा और वे कोमा में चले गए. यात्रा प्रतिबंधों और चिकित्सा सेवाओं में व्यवधान के कारण उन्हें घर वापस लाना बहुत मुश्किल हो गया. सबसे बड़े बेटे के रूप में, मुझे सब कुछ सहना पड़ा और चुप रहना पड़ा. हमने घर पर पिता की देखभाल की और मेरी तनख्वाह से खर्चों का प्रबंधन किया.
उनके पिता का जून 2021 में निधन हो गया और इस क्षति ने उनके पारिवारिक दायित्वों को और बढ़ा दिया क्योंकि वह अपने करियर को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे थे.
सशस्त्र बलों में असफलता के बाद पायलट बनने की राह पर बढ़े जेबी
निजी जिंदगी में मुश्किलों के बावजूद जेबी ने भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय सेना में भर्ती होने की कोशिश जारी रखी. इस दौरान उन्होंने कुछ चरणों को पार किया लेकिन लास्ट मेरिट लिस्ट तक नहीं पहुंच पा रहे थे. इसी बीच, बायजूज में कर्मचारियों की छंटनी हुई और जेबी की नौकरी भी चली गई. इससे उनके करियर को एक और झटका लगा. 27 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें लगने लगा कि जिन पदों के लिए वह कोशिश कर रहे थे, उनके लिए उम्र की सीमा भी करीब आ रही है.
ऐसे में उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए कई तरह की नौकरियां कीं. इनमें ट्रक और बस चलाने से लेकर ऑफिस में काम करना तक शामिल था. लगातार आ रही परेशानियों के कारण उनपर आर्थिक दबाव बढ़ने लगा. कर्ज और भविष्य की चिंता के चलते उनकी नींद भी प्रभावित हुई. जेबी को उन लोगों से भी निराशा हुई जिन पर उन्होंने भरोसा किया था. उन्हें लगने लगा कि कई बार मेहनत और योग्यता के बावजूद आगे बढ़ने के लिए सिफारिशों की जरूरत पड़ती है.
दूसरे विकल्पों की तलाश
भारतीय सशस्त्र बलों में जाने की राह मुश्किल होती देख जेबी ने विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए. उनके लिए इंजीनियरिंग की दूसरी डिग्री हासिल करने के लिए कॉलेज लौटना आसान नहीं था. इसमें चार से पांच साल की पढ़ाई और उसके बाद ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती. ऐसे में पायलट ट्रेनिंग उन्हें अपने पसंदीदा क्षेत्र में करियर बनाने का सीधा रास्ता लगा. अपने सलाहकारों की मदद से उन्होंने पायलट प्रशिक्षण की जरूरतों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की. साथ ही, इस कोर्स का खर्च उठाने के लिए पैसों का इंतजाम करने की कोशिश भी की.
आर्थिक परेशानी ने ट्रेनिंग को किया प्रभावित
हालांकि, पायलट ट्रेनिंग शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट पैसों की थी. कई साल तक अलग-अलग नौकरियां करने के कारण उनके पास इतनी बचत नहीं थी कि वह प्रशिक्षण का खर्च उठा सकें. ऐसे में उन्हें एजुकेशन लोन लेने का फैसला किया. इसके लिए जेबी ने कई बैंकों से संपर्क किया, लेकिन प्रक्रिया आसान नहीं थी. उनके मुताबिक, एक बैंक ने उनके दस्तावेज करीब डेढ़ साल तक अपने पास रखे. आखिरकार, उन्हें एक बैंक से लोन मिल गया. इसकी मदद से वह फिलीपींस जा सके और पायलट प्रशिक्षण शुरू किया.
फिलीपींस में नई जिंदगी, नया आत्मविश्वास
फिलीपींस पहुंचने के बाद जेबी के लिए नए माहौल में ढलना आसान नहीं था. वहां की लाइफस्टाइल, आसपास का वातावरण और प्रशिक्षण की दिनचर्या उनके लिए नई थी. इन्हें समझने और इनके अनुसार खुद को ढालने में उन्हें समय लगा. जेबी ने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि निजी जिंदगी में भी बदलने में मदद की. उनके पहनावे, बातचीत करने के तरीके, जीवनशैली और व्यक्तित्व में बदलाव आया.
अब वह लोगों से बात करने और नई परिस्थितियों में खुद को ढालने में पहले से ज्यादा सहज महसूस करते हैं. जो जेबी पहले किसी से बात करने में झिझकते थे, उनके लिए यह बेहद आम बात हो गई. हालांकि, पायलट प्रशिक्षण पूरा करना और किसी एयरलाइन में नौकरी हासिल करना दो अलग-अलग पड़ाव हैं. जेबी जानते हैं कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी और मेहनत करनी होगी.
बहस करने के बजाय अपने काम से जवाब दिया
बीते सालों को याद करते हुए जेबी कहते हैं कि धैर्य और आत्मविश्वास ने उन्हें मुश्किल दौर में आगे बढ़ने की ताकत दी. मैंने लोगों से बहस करने के बजाय अपने काम से उन्हें जवाब दिया. उन्होंने दूसरों के सामने खुद को साबित करने में समय लगाने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चुना. इस सफर में सलाहकारों के मार्गदर्शन और शिक्षा लोन ने भी उनकी मदद की, जिससे वह पायलट प्रशिक्षण शुरू कर सके.