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अटैक हेलिकॉप्टर, बारुदी सुरंगें और मिसाइलें... होर्मुज की जंग में अमेरिका-ईरान इस्तेमाल कर रहे ये वेपन

होर्मुज की जंग में अमेरिका और ईरान घातक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका अटैक हेलिकॉप्टर और एडवांस्ड मिसाइलें दाग रहा है, जबकि ईरान बारुदी सुरंगें और एंटी-शिप मिसाइलों से हमला कर रहा है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका और ईरान खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. (Photo: ITG)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका और ईरान खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. (Photo: ITG)

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में दोनों तरफ से घातक हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है. अटैक हेलिकॉप्टर, समुद्री बारुदी सुरंगें और विभिन्न प्रकार की मिसाइलें इस लड़ाई के मुख्य हथियार बन गए हैं. ये हथियार न सिर्फ जहाजों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. ईरान की भौगोलिक स्थिति के कारण वह इस क्षेत्र पर मजबूत पकड़ रखता है. हाल के संघर्ष में ईरान ने खाड़ी को बंद करने की कोशिश की, जबकि अमेरिका ने इसे खुला रखने के लिए सैन्य कार्रवाई की.

इस जंग में पारंपरिक और आधुनिक हथियारों का मिश्रण देखने को मिल रहा है. अटैक हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर हमला करते हैं. बारुदी सुरंगें पानी के नीचे खतरा पैदा करती हैं. मिसाइलें लंबी दूरी से सटीक हमले करती हैं.

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अटैक हेलिकॉप्टर: आसमान से समुद्र पर मौत बरसाना

अटैक हेलिकॉप्टर इस जंग में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. अमेरिका मुख्य रूप से AH-64 Apache और AH-1Z Viper हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहा है. ये हेलिकॉप्टर तेज गति से उड़ते हैं और जहाजों, नावों तथा जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाते हैं.

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Strait of Hormuz battle

अपाचे हेलिकॉप्टर हेलफायर मिसाइलों, 30mm चेन गन और रॉकेटों से लैस होता है. यह रात में भी बेहतरीन काम करता है क्योंकि इसमें एडवांस्ड नाइट विजन और टारगेटिंग सिस्टम लगा होता है. अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और आर्मी इन हेलिकॉप्टरों को जहाजों से उड़ाकर ईरानी स्पीड बोट्स और माइन लेयर जहाजों को नष्ट कर रही है.

ईरान के पास भी कुछ हमले वाले हेलिकॉप्टर हैं, लेकिन उनकी संख्या और क्षमता अमेरिका से कम है. ईरान मुख्य रूप से जमीन से दागे जाने वाले हथियारों पर भरोसा करता है. अमेरिकी हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़कर ईरानी नावों को सरप्राइज अटैक देते हैं. इनकी वजह से ईरान की नावों का बेड़ा काफी नुकसान उठा रहा है.

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बारुदी सुरंगें: पानी के नीचे छिपा खतरनाक जाल

बारुदी सुरंगें ईरान की सबसे सस्ती लेकिन प्रभावी रणनीति हैं. ईरान के पास हजारों माइंस हैं, जिनमें पुरानी कॉन्टैक्ट माइंस से लेकर आधुनिक इन्फ्लूएंस माइंस शामिल हैं. ये माइंस पानी में छिप जाते हैं. जहाज के पास आने पर फट जाते हैं. 

Strait of Hormuz battle

ईरान छोटी नावों और जहाजों से माइंस बिछाता है. माहम सीरीज की माइंस बहुत खतरनाक हैं. ये एकॉस्टिक, मैग्नेटिक या प्रेशर सेंसर्स से एक्टिव होती हैं. एक माइन पूरे जहाज को डुबो सकता है या उसे भारी नुकसान पहुंचा सकता है.  

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अमेरिका के लिए माइंस साफ करना बहुत मुश्किल काम है. माइंस काउंटरमेजर शिप्श, डाइवर्स और विशेष हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. 1980 के टैंकर वॉर में भी ईरान ने माइंस का इस्तेमाल किया था, जिससे अमेरिकी जहाज USS Roberts को नुकसान पहुंचा था. इस बार भी माइंस की वजह से कई जहाजों का रूट बदलना पड़ा और इंश्योरेंस की कीमत बढ़ गई. 

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मिसाइलें: लंबी दूरी का घातक हमला

मिसाइलें इस जंग का सबसे बड़ा हथियार हैं. दोनों पक्ष अलग-अलग तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

ईरान की मिसाइलें: ईरान के पास एंटी-शिप क्रूज मिसाइल (जैसे नूर, घदीर) और एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल (खलीज फार्स, होर्मुज-1, होर्मुज-2) हैं. होर्मुज मिसाइलें सुपरसोनिक गति से चलती हैं. रडार को निशाना बना सकती हैं. ईरान इन्हें किनारे से और छोटे जहाजों से दागता है. ये मिसाइलें समुद्र की सतह के पास उड़ती हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल होता है.

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अमेरिका की मिसाइलें: अमेरिका हार्पून, टोमाहॉक, स्टैंडर्ड मिसाइल-6 (SM-6) और प्रेसीजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) जैसी उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. डेस्ट्रॉयर जहाजों से दागी जाने वाली ये मिसाइलें ईरानी मिसाइल साइटों, नौसैनिक अड्डों और नावों को सटीक निशाना बनाती हैं. एटीएसीएमएस  और PrSM बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल हो रहा है. 

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ईरान ने क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल से अमेरिकी जहाजों पर हमले किए, जबकि अमेरिका ने जवाब में ईरानी लॉन्च साइटों को तबाह किया. 

दोनों पक्षों की रणनीति और हथियारों का प्रभाव

अमेरिका की रणनीति हेलिकॉप्टरों और मिसाइलों से ईरान की नौसेना को कमजोर करना है, ताकि खाड़ी खुली रहे. ईरान एसिमेट्रिक वॉरफेयर पर जोर दे रहा है- सस्ती माइंस, स्पीड बोट और मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स का इस्तेमाल. 

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इन हथियारों से तेल की कीमतें बढ़ी हैं, शिपिंग प्रभावित हुई है और क्षेत्र में तनाव चरम पर है. भारत जैसे देशों को भी इसका असर पड़ रहा है क्योंकि हमारा तेल आयात इसी रास्ते से होता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जंग बढ़ी तो माइंस साफ करने में हफ्तों लग सकते हैं. हेलिकॉप्टर और मिसाइलों की लड़ाई जारी रह सकती है. दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे-छोटे टकराव से स्थिति बिगड़ सकती है.

होर्मुज की जंग साबित कर रही है कि आधुनिक युद्ध में पुराने और नए हथियार दोनों महत्वपूर्ण हैं. अटैक हेलिकॉप्टर आसमान से हमला करते हैं. माइंस पानी के नीचे जाल बिछाते हैं. मिसाइलें लंबी दूरी से तबाही मचाती हैं. होर्मुज जैसी महत्वपूर्ण जलधारा पर नियंत्रण पाने के लिए कोई भी देश महंगे हथियारों का इस्तेमाल करने को तैयार है.

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