इजरायल और अमेरिका ने खामेनेई को निशाना बनाने वाले हमले में GBU-28 लेजर गाइडेड पेनेट्रेटर बम का इस्तेमाल किया होगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि इजरायली फाइटर जेट्स ने खामेनेई के कॉम्प्लेक्स पर कुल 30 बम गिराए. GBU-28 2268 किलोग्राम का भारी बंकर बस्टर बम है जो मजबूत इमारतों और अंडरग्राउंड कमरों को तोड़ने के लिए बना है.
खामेनेई का कॉम्प्लेक्स सुरक्षित और मजबूत था इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस हमले में GBU-28 जैसे पेनेट्रेटिंग बमों का इस्तेमाल हुआ होगा. हालांकि रिपोर्ट में सिर्फ ‘30 बम’ कहा गया है लेकिन लक्ष्य को देखते हुए GBU-28 का इस्तेमाल संभव है.
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क्या कोई एक विमान 30 बम एक साथ ले जा सकता है?
नहीं, कोई भी एक विमान 30 GBU-28 बम नहीं ले जा सकता. यह बम बहुत भारी और लंबा है. इजरायल के F-15I रा’म लड़ाकू विमान आमतौर पर सिर्फ 1 या 2 ही GBU-28 बम ले जा सकते हैं. 30 बम गिराने के लिए कई विमानों का इस्तेमाल किया गया.

इस हमले में 15 से 20 इजरायली F-15 और दूसरे लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया होगा. हर विमान ने 1-2 भारी बम गिराए और इस तरह कुल 30 बम गिराए गए. दिन के उजाले में सटीक हमला करने के लिए इतने सारे विमानों की जरूरत पड़ी.
GBU-28 बम की खासियतें क्या हैं?
GBU-28 दुनिया के सबसे ताकतवर लेजर गाइडेड बंकर बस्टर बमों में से एक है. इसका वजन लगभग 2268 किलोग्राम है. लंबाई करीब 19 फीट यानी 5.8 मीटर है. इसमें 286 किलोग्राम हाई एक्सप्लोसिव भरा होता है. यह बम लेजर गाइडेंस से चलता है जिससे पायलट जमीन पर लेजर पॉइंट करके बहुत सटीक निशाना लगा सकता है.
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मजबूत कंक्रीट को 20-30 फीट तक भेद सकता है. गहरे बंकर या अंडरग्राउंड कमरों को नष्ट कर सकता है. यह बम खासतौर पर दुश्मन के मजबूत कमांड सेंटर और लीडरशिप बंकरों को मारने के लिए बनाया गया है.

यह बम आखिरी बार कब इस्तेमाल हुआ था?
GBU-28 का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ था. अमेरिका ने इराक के सद्दाम हुसैन के बंकरों पर इसे गिराया था. इसके बाद 1999 में कोसोवो और 2003 में इराक युद्ध में भी इस्तेमाल हुआ. इजरायल के पास भी यह बम है. उसने गाजा और लेबनान में बंकरों पर इसका इस्तेमाल किया है. हाल के सालों में ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ भी GBU-28 को इस्तेमाल किए जाने की खबरें आई हैं. खामेनेई वाले हमले में इसकी क्षमता के कारण यह बम बहुत फिट बैठता है.
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क्यों इस्तेमाल किया गया GBU-28?
खामेनेई का कॉम्प्लेक्स सिर्फ ऊपरी इमारत नहीं था. वहां अंडरग्राउंड सुरक्षित कमरे भी थे जहां नेता छिप सकते थे. इसलिए सामान्य बमों से काम नहीं चलता था. GBU-28 जैसे पेनेट्रेटर बमों की जरूरत थी जो दीवारें भेदकर अंदर विस्फोट कर सकें. इजरायल ने दिन में हमला किया क्योंकि उन्हें सटीक लोकेशन पता थी. F-15 जैसे विमान आसानी से GBU-28 ले जा सकते थे. यह हमला दिखाता है कि इजरायल और अमेरिका के पास सही लक्ष्य के लिए सही हथियार चुनने की बेहतरीन क्षमता है. अब ईरान जान गया है कि उनकी सुरक्षित जगहें भी सुरक्षित नहीं हैं.