
वाराणसी के नमो घाट पर 25 अक्टूबर को गंगा का आसमान लड़ाकू विमानों की गर्जना और हैरतअंगेज हवाई करतबों से गूंज सकता है. भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर यहां ‘विंग्स ओवर गंगा’ नाम से भव्य एयर शो आयोजित करने की तैयारी है. इस प्रदर्शन में राफेल, तेजस और सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ हेलीकॉप्टर और परिवहन विमानों की क्षमताएं भी देखने को मिल सकती हैं. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने का कार्यक्रम बताया जा रहा है. यह आयोजन काशी की प्राचीन संस्कृति और आधुनिक भारत की सैन्य ताकत को एक साथ पेश करने की कोशिश है. गंगा, ऐतिहासिक घाटों और मंदिरों की पृष्ठभूमि में जब विमान आसमान में अलग-अलग संरचनाएं बनाएंगे, तो दर्शकों को भारतीय वायुसेना के कौशल, तकनीक और अनुशासन को करीब से देखने का मौका मिलेगा.
प्रस्तावित एयर शो का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन होगा. इसमें राफेल, तेजस और सुखोई-30 एमकेआई जैसे विमानों की उड़ानें शामिल होने की जानकारी दी गई है. इनके अलावा हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’, आईएल-76, आईएल-78, सी-295 और एएन-32 जैसे विमानों के भी प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है. इन विमानों के जरिए दर्शकों को भारतीय वायुसेना की अलग-अलग क्षमताओं को देखने का अवसर मिलेगा. लड़ाकू विमानों की तेज उड़ान, आकाश में उनकी सटीक दिशा और तालमेल इस कार्यक्रम को खास बना सकते हैं. परिवहन और अन्य सैन्य विमानों की भागीदारी से वायुसेना की विविध भूमिकाओं को भी सामने लाने की कोशिश होगी. इस आयोजन में भारतीय नौसेना और थल सेना के विमानों की भागीदारी भी प्रस्तावित है. इससे संयुक्त सैन्य तालमेल और विभिन्न रक्षा सेवाओं के बीच समन्वय का प्रदर्शन किया जाएगा.

सूर्य किरण और सारंग टीम के करतब होंगे खास
एयर शो में सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम भी अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी. सूर्य किरण टीम के पायलट आसमान में सामूहिक उड़ान और सटीक तालमेल के जरिए आकर्षक संरचनाएं बनाएंगे. इन करतबों में पायलटों के बीच बेहतरीन तालमेल और उड़ान के दौरान सटीक नियंत्रण की अहम भूमिका होगी. वहीं, सारंग टीम के हेलीकॉप्टर अपनी खास उड़ान क्षमताओं से दर्शकों का ध्यान खींचेंगे. हेलीकॉप्टरों के अलग-अलग हवाई करतब इस प्रदर्शन को एक अलग पहचान देंगे. नमो घाट को आयोजन का प्रमुख केंद्र बनाया गया है, जहां से गंगा के ऊपर होने वाली उड़ानों को देखने का अवसर मिलेगा. ‘विंग्स ओवर गंगा’ केवल विमानों की ताकत दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा. इसके जरिए उन पायलटों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और दूसरे कर्मचारियों की मेहनत भी सामने आएगी, जिनके आपसी तालमेल से ऐसे बड़े हवाई प्रदर्शन संभव होते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 अक्टूबर को वाराणसी दौरे के दौरान एयर शो में शामिल होने की संभावना जताई गई है. प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, वह मिर्जामुराद क्षेत्र के खोचवां यानी भड़ेहरा गांव में कपड़ा फैक्टरी में काम करने वाली महिलाओं से संवाद करने के बाद नमो घाट पहुंचकर एयर शो देख सकते हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई प्रमुख नेताओं और विशिष्ट अतिथियों के भी कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना है. आयोजन में करीब चार हजार विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की बात कही गई है. हालांकि, कार्यक्रम में शामिल होने वाले अतिथियों और प्रस्तावित गतिविधियों से जुड़ी जानकारी के अनुसार तैयारियां की जा रही हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एयर शो की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं.

भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर काशी में ‘विंग्स ओवर गंगा’ के तहत 22, 23 और 25 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. इनमें 25 अक्टूबर को नमो घाट के सामने होने वाला मुख्य एयर शो प्रमुख आकर्षण होगा. गंगा के ऊपर विमानों की उड़ानें और हवाई करतब देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रहने की उम्मीद है. इस आयोजन से काशी आने वाले पर्यटकों को भी एक अलग अनुभव मिल सकता है. शहर की ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक सैन्य तकनीक का मेल इसे खास बनाएगा.
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर रहेगा जोर
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी. तैयारियों के तहत पार्किंग, प्रवेश और निकास के रास्तों तथा आपातकालीन सहायता की व्यवस्था समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विशिष्ट अतिथियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रखना जरूरी होगा. प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आयोजन के दौरान लोगों की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं सुचारु रहें.
इस एयर शो का एक उद्देश्य युवाओं को विमानन, आधुनिक तकनीक और देश की सेवा से जुड़े करियर के बारे में प्रेरित करना भी है. लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों की क्षमताओं को करीब से देखने से युवाओं को रक्षा क्षेत्र में काम करने की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा. भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ यानी ‘गर्व के साथ आकाश को छूना’ इस आयोजन की भावना को भी दर्शाता है. गंगा के ऊपर होने वाला यह प्रस्तावित प्रदर्शन काशी की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय वायुसेना के कौशल को एक मंच पर लाने की कोशिश है. अगर तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजन होता है, तो 25 अक्टूबर को नमो घाट पर आसमान में होने वाले करतब वाराणसी के लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बन सकते हैं.