अमेरिका और ईरान ने युद्ध के दौरान एक-दूसरे के स्पेस सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी. सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे में पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. इसके मुताबिक, दोनों देशों ने एक-दूसरे की अंतरिक्ष से जुड़ी सैन्य ताकत को कमजोर करने और सैन्य कार्रवाई में रुकावट डालने के लिए कदम उठाए. हालांकि, इस खास दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित रिपोर्ट का वह हिस्सा भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे इसकी पुष्टि हो सके.
यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि आज सैटेलाइट का इस्तेमाल सिर्फ फोन, टीवी और मौसम की जानकारी के लिए नहीं होता. सेना भी इनकी मदद से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखती है, सैनिकों के बीच संपर्क बनाए रखती है और अपनी लोकेशन का पता लगाती है. ऐसे में सैटेलाइट या उनसे जुड़े सिस्टम में रुकावट आने से सेना के काम पर असर पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: चीन की आसमानी जासूसी! 510 सैटेलाइट से दुनिया पर नजर, अमेरिका की बढ़ी टेंशन
क्या है स्पेस सिस्टम पर हमले का मामला?
इस दावे के मुताबिक, अमेरिका और ईरान ने युद्ध के दौरान एक-दूसरे के स्पेस सिस्टम को कमजोर करने के लिए कार्रवाई की. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि किन सैटेलाइट या सिस्टम को निशाना बनाया गया और इसके लिए किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ.
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के 14 अक्टूबर 2026 के विश्लेषण में ईरान के दो स्पेस लॉन्च सेंटरों को हुए नुकसान की जानकारी दी गई है. इनमें इमाम खोमैनी स्पेस सेंटर और शाहरोद स्पेस सेंटर शामिल हैं. सैटेलाइट तस्वीरों में इन जगहों पर नुकसान दिखाई दिया. यह नुकसान अमेरिका और इजरायल के हमलों से जुड़ा था. लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि अमेरिका और ईरान ने गुप्त रूप से एक-दूसरे के स्पेस सिस्टम पर भी हमले किए थे.

सेना के लिए क्यों जरूरी हैं सैटेलाइट?
सैटेलाइट की मदद से सेना दूर बैठे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकती है. इनसे मिलने वाली तस्वीरों से सैन्य ठिकानों और दूसरे जरूरी स्थानों की जानकारी मिल सकती है. सैटेलाइट सैनिकों और सैन्य उपकरणों के बीच संपर्क बनाए रखने में भी मदद करते हैं.
इसके अलावा, नेविगेशन सिस्टम भी सैटेलाइट पर निर्भर करते हैं. इनकी मदद से विमान और दूसरे सैन्य उपकरण अपनी लोकेशन और दिशा का पता लगा सकते हैं. अगर सैटेलाइट के सिग्नल में रुकावट आती है, तो सेना के लिए कुछ ऑपरेशन करना मुश्किल हो सकता है.
स्पेस सिस्टम पर कैसे हो सकते हैं हमले?
किसी देश के स्पेस सिस्टम को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाया जा सकता है. इसमें सैटेलाइट के सिग्नल में रुकावट डालना, संचार व्यवस्था को बाधित करना और जमीन पर मौजूद उन केंद्रों को निशाना बनाना शामिल है, जहां से सैटेलाइट को कंट्रोल किया जाता है.
साइबर हमलों के जरिए भी सैटेलाइट से जुड़े सिस्टम को प्रभावित किया जा सकता है. हालांकि, ये हमले करने के सामान्य तरीके हैं. अमेरिका और ईरान के मामले में इनमें से किस तरीके का इस्तेमाल किया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हार के बाद इथियोपिया का बड़ा दांव, रूस से मंगाए खास हथियार
अंतरिक्ष में क्यों बढ़ रही है सैन्य प्रतिस्पर्धा?
आज कई देश अपनी सेना के लिए सैटेलाइट पर निर्भर हैं. इनकी मदद से निगरानी, संचार और नेविगेशन जैसे काम होते हैं. इसलिए सैटेलाइट और उनसे जुड़े सिस्टम की सुरक्षा भी जरूरी हो गई है. अंतरिक्ष में मौजूद सिस्टम को नुकसान पहुंचने पर सेना की जानकारी जुटाने और आपस में संपर्क बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसी वजह से कई देश अपनी अंतरिक्ष तकनीक को सुरक्षित रखने पर ध्यान दे रहे हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच गुप्त रूप से एक-दूसरे के स्पेस सिस्टम पर हमले किए जाने के दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह भी साफ नहीं है कि कथित कार्रवाई में किन सिस्टम को निशाना बनाया गया था.
इसलिए फिलहाल इसे एक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. संबंधित रिपोर्ट और ठोस सबूत सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दोनों देशों ने वास्तव में एक-दूसरे की अंतरिक्ष से जुड़ी सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसी कार्रवाई की थी या नहीं.