साइबर वॉर (Cyber War) वह डिजिटल युद्ध है जिसमें एक देश या संगठन दूसरे देश के कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क, बैंकिंग, बिजली या सैन्य ढांचे पर हैकिंग और मालवेयर के जरिए हमला करता है. इसका उद्देश्य जानकारी चुराना, सिस्टम ठप करना या अस्थिरता फैलाना होता है.
आज की दुनिया में जंग सिर्फ जमीन, समुद्र या आसमान में नहीं लड़ी जाती, बल्कि इंटरनेट की दुनिया में भी लड़ी जाती है. इसी को साइबर वॉर कहा जाता है.
साइबर वॉर में गोलियां नहीं चलतीं, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है. अगर किसी देश की बिजली व्यवस्था, रेलवे सिस्टम या बैंकिंग सर्वर ठप हो जाएं, तो आम लोगों की जिंदगी रुक सकती है. अस्पतालों का डेटा चोरी हो सकता है, गोपनीय सैन्य जानकारी लीक हो सकती है और अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग सकता है.
दुनिया में कई बार ऐसे डिजिटल हमले हो चुके हैं. 2010 में खोजा गया Stuxnet वायरस ईरान के परमाणु संयंत्रों को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया था. 2017 में फैला WannaCry रैनसमवेयर दुनिया के कई देशों के अस्पतालों और कंपनियों को प्रभावित कर गया था. इन घटनाओं ने दिखा दिया कि साइबर हमले कितने खतरनाक हो सकते हैं.
साइबर वॉर सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं है. कई बार आतंकी संगठन या हैकर समूह भी बड़े हमले कर देते हैं. कुछ हमले डेटा चोरी के लिए होते हैं, कुछ सिस्टम को बंद करने के लिए, और कुछ फेक न्यूज फैलाकर लोगों में डर और भ्रम पैदा करने के लिए.
भारत भी साइबर खतरों से अछूता नहीं है. समय-समय पर सरकारी वेबसाइटों और बैंकों पर हमले की खबरें आती रहती हैं.
अमेरिका वॉर के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज काफी समय से कर रहा है. पेंटागन का एक खास प्रोजेक्ट मेवेन है. इससे वहां की मिलिट्री ये डिसाइड करती है कि कहां और कब अटैक करना है.
ईरान ने हाल ही में अमेरिकी फाइटर जेट गिराया. अमेरिकी एयरमैन 48 घंटों तक ईरान में फंसा रहा. बाद में अमेरिका ने रेस्क्यू किया, लेकिन इस दौरान एक खास डिवाइस काम आया. बताया जा रहा है कि जान बचाने में इस डिवाइस का बड़ा योगदान रहा है. आइए जानते हैं इस खास डिवाइस के बारे में.
अमेरिकी टेक कंपनी Oracle इन दिनों सुर्खियों में है. दरअसल कंपनी ने भारत से 12 हजार लोगों को नौकरी से निकाला है. इसी बीच खबर आ रही है कि ईरान ने Oracle के डेटाबेस को निशाना बनाया है. ईरान ने हाल ही में चेतावनी जारी की थी कि वो अमेरिका की 18 टेक कंपनियों को निशाना बनाएगा.
ईरान ने धमकी दी है कि वो अमेरिका की 18 टेक कंपनियों को निशाना बनाएगा. बहरीन में ऐमेजॉन के डेटा सेंटर पर ईरान हमला कर चुका है. अब सवाल ये है कि अगर ईरान इन टेक कंपनियों को निशाना बनाता है तो इसका भारतीय इंटरनेट यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं.
ईरान ने चेतावनी दी थी कि वो अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमला करेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक बहरीन में ऐमेजॉन के डेटा सेंटर पर ईरान ने अटैक किया है. ऑफिशियल कनफर्मेशन का इंतजार है.
भारत सरकार कुछ पॉपुलर कंपनियों के सीसीटीवी कैमरे भारत में बैन करने की तैयारी में है. हाल ही में ये सामने आया है कि भारत में लगे हुए सीसीटीवी कैमरे उनता सिक्योर नहीं है. इसके बाद सरकार हरकत में दिख रही है. हालांकि देश में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे अभी भी सिक्योर नहीं है. आइए जानते हैं सरकार के फैसले के बाद क्या बदल सकता है.
देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. मंत्रालय की साइबर विंग I4C ने अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए लाखों सिम कार्ड, हजारों व्हाट्सएप अकाउंट और स्काइप आईडी ब्लॉक कर दी हैं.
अमेरिका की FBI को दुनिया की सबसे पावरफुल एजेंसियों में से एक माना जाता है. खबर आई है कि ईरानी हैकर ग्रुप ने FBI के डायरेक्टर काश पटेल की ईमेल आईडी हैक कर ली है और पर्सलन और प्रोफेशनल डिटेल्स लीक कर दिए गए हैं.
CCTV कैमरे को लेकर सरकार का नया नियम, हो रही थी जासूसी, ये डेटा पाकिस्तान पहुंच रहा था. अब ये नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन गया है. हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक नेटवर्क पकड़ा है, जिसमें CCTV कैमरों से रिकॉर्ड डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था.
भारत में CCTV कैमरों की सिक्योरिटी पर हाल ही में गंभीर सवाल उठे. रिपोर्ट्स आईं की भारत के कई रेलवे स्टेशन्स पर पाकिस्तानी ISI के सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और डेटा पाकिस्तान जा रहा है. अब सरकार हरकत में लग रही है. लेकिन सवाल ये है कि करोड़ों सीसीटीवी कैमरों का क्या जो सुरक्षित नहीं हैं? सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाह पिछले हफ्ते से चल रही है. इसी बीच उनके X अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट हुआ जिसमें वो कॉफी पीते नजर आ रहे हैं. अब इस वीडियो को Grok ने Deepfake बता कर लोगों को और भी कन्फ्यूज कर दिया है.
वॉर में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भरपूर यूज हो रहा है. ड्रोन पुराना हो गया अब जासूसी और जंग के दौरान रोबॉटिक कॉकरोच को उतारा जा सकता है. जर्मनी की एक कंपनी ने तैयार किया है अनोखा रोबोटिक कॉकरोच जो जासूसी के साथ जंग में भी उतारा जा सकता है.
क्या ईरान का अगला निशाना टेक कंपनियां हैं? रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने एक लिस्ट तैयार की है जिसमें अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों और बैंक्स का नाम है. ईरान ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में इनके ऑफिस को निशाना बनाया जाएगा और यहां काम करने वाले लोगों से 1 किलोमीटर की दूरी बनाने को कहा है.
देश में LPG की कमी अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रह गई है. टेलीकॉम सेक्टर ने चेतावनी दी है कि गैस सप्लाई रुकने से मोबाइल टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों पर असर पड़ सकता है. अगर स्थिति लंबी चली तो इसका असर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी दिख सकता है. आखिर LPG संकट का डिजिटल दुनिया से क्या कनेक्शन है, समझिए पूरा मामला.
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz इस समय बड़े भू-राजनीतिक संकट के केंद्र में है. फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच टकराव के बाद इस इलाके में तनाव है. ईरान ने कहा है कि किसी भी शिप पर अटैक कर सकता है. ऐसे में अगर अंडरसी केबल को निशाना बनाया गया तो दुनिया भर के इंटरनेट के लिए मुश्किल हो सकता है.
मिडिल ईस्ट महा जंग में जिस कदर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हुआ है इससे पहले कभी नहीं हुआ. चूंकि अब दुनिया के पास अलग अलग AI मॉडल्स हैं जो वॉर में मदद कर रहे हैं. ऐसे में क्या ईरान में स्कूली लड़कियों की मौत हुई है उसका जिम्मेदार AI तो नहीं?
Artificial Intelligence अब सिर्फ टेक टूल नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनता जा रहा है. Pentagon के साथ OpenAI के करार के बाद कंपनी के अंदर इंटर्नल कलह शुरू हो गई है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub का एक खास AI टूल है, जिसका नाम MuleHunter.AI है. यह साइबर ठगों, डिजिटल अरेस्ट पर नकेल कसेगा. साथ ही यह लोगों के पैसे बचाने में मदद करेगा. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.
मिडिल ईस्ट में महा जंग चल रही है. ये पहला मौका है जब किसी बड़े पैमाने पर लड़े जा रहे वॉर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है. साइबर वॉर फ्यूचर की बात नहीं रही, बल्कि अभी ही हो रही है. आइए समझते हैं ये पूरा प्रोसेस कैसे काम करता है.
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक नई साइबर रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. साइबर सिक्योरिटी एजेंसी के मुताबिक हैकर्स ने इंटरनेट से जुड़े CCTV और IP कैमरों को टार्गेट करना शुरू कर दिया है.
मिडिल ईस्ट की वॉर में उभर रहा है एल्गोरिद्म वाला वॉर, जहां डेटा और मशीनें तय कर रही हैं टारगेट. इससे पहले किसी भी वॉर में इतने बड़े पैमाने पर आर्टिफ़िशियल इंटलेजिेंस का इस्तेमाल नहीं किया गया था.