सुहागनों ने आज पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा है. देशभर में सुहागनें व्रत और पूजा-पाठ कर रही हैं. जगह-जगह इकट्ठा होकर कथा सुनी जा रही हैं. फिर शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के साथ करवा माता की पूजा होगी. इसके बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देंगी और व्रत खोलेंगी. जिन नई सुहागनों का यह पहला करवा चौथ है या फिर जिन्हें ये नहीं पता कि आखिर यह व्रत खोला कैसे जाता है. तो उन्हें स्टेप बाय स्टेप पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने का तरीका बताते हैं.
करवा चौथ पर पूजा और चंद्रोदय का समय क्या है?
करवा चौथ पर संध्या काल में भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:53 बजे से लेकर शाम 6:56 बजे तक रहने वाला है. वहीं राजधानी दिल्ली में चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है. लेकिन देश के विभिन्न राज्यों और बड़े शहरों में चांद अलग-अलग समय पर दिखाई दे सकता है.
करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
करवा चौथ की शाम पूजा के लिए घर की उत्तर या पूर्व दिशा में साफ जगह चुनें. वहां एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं. उस पर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें. एक जगह करवा माता को भी स्थान दें. इसके बाद भगवान को रोली, मौली, अक्षत और धूप-दीप से पूजा करें. उन्हें फल, मिठाई अर्पित करें. माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. इसके बाद उनका आशीर्वाद लें. पूजा में गेहूं से भरा करवा और उसके ढक्कन पर मिठाई या बूरा रखने की परंपरा भी है. पास में जल से भरा पात्र रखें. पूजा करते समय पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करें.
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं अर्घ्य देने की तैयारी कर लें. चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए करवे या लोटे में साफ पानी भरें. उसमें थोड़ा सा दूध भी मिलाया जाता है. पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल और दीपक रखें. इसके बाद चंद्रमा को प्रणाम करें और जल के लोटे को सिर से ऊपर दोनों हाथों से उठाते हुए अर्घ्य दें. ध्यान रहे कि इस समय चंद्रमा का दर्शन खुली आंखों से नहीं किया जाता है. चंद्रमा को हमेशा नीचे नजरें करके अर्घ्य देने की परंपरा है.
अर्घ्य देने के बाद छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें. इसके बाद कई महिलाएं उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं. चंद्रमा की पूजा और दर्शन के बाद व्रत खोलने की रस्म निभाई जाती है. इस दौरान पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर उसका व्रत खुलवाता है. लंबे समय तक निर्जला रहने के बाद पानी धीरे-धीरे पिएं. फिर अपनी सुविधा के अनुसार हल्का भोजन करें.