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Exclusive: वो ईमेल जिनसे पाकिस्तान की आतंकी फंडिंग की कहानी से उठा पर्दा

पाकिस्तान की ग्रे लिस्ट से छूटने के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर में अपना मुख्यालय फिर से बना लिया लेकिन FATF और APG एक-दूसरे पर जवाबदेही टालते रहे. सैटेलाइट इमेजरी और ईमेल से खुली वैश्विक आतंकी फंडिंग की यह बड़ी नाकामी.

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बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय का गुंबद फिर से बनाया जा रहा है. (Photo: ITG)
बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय का गुंबद फिर से बनाया जा रहा है. (Photo: ITG)

यह कहानी एक ईमेल से शुरू होती है...

जब पाकिस्तान के आतंक फंडिंग पर अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने के बारे में सवाल पूछे गए, तो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की मीडिया टीम ने जवाब दिया कि पाकिस्तान FATF का सदस्य नहीं है... आप एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) से सीधे संपर्क करें.

जब APG से संपर्क किया गया (एक नहीं, कई बार), तो उसने जवाब दिया कि FATF की प्रक्रियाओं, ग्रे लिस्टिंग या ब्लैक लिस्टिंग के बारे में FATF सचिवालय ही सबसे अच्छा जवाब दे सकता है.

अंत में दोनों के जवाब संलग्न करके FATF को फिर से ईमेल किया गया. सवाल साफ थे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया.

इसी बीच, बहावलपुर में एक कंपाउंड में, जिस पर इस रिपोर्टर ने 2015 से नजर रखी हुई है, जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय के गुंबद फिर से उठ रहे हैं.

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वॉचडॉग्स ने कब हाथ खड़े किए?

अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट से हटा दिया. पेरिस से घोषणा हुई कि पाकिस्तान ने जरूरी कदम पूरे कर लिए हैं. लेकिन कुछ हफ्तों के अंदर ही जैश-ए-मोहम्मद ने खुलकर पैसे जुटाने शुरू कर दिए.

दिसंबर 2022 में रिपोर्टर ने इसे उजागर किया. संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधित और पाकिस्तान में बैन एक आतंकी संगठन के कार्यकर्ता इमरान ने पेशावर से बताया कि वे पूरे पाकिस्तान में मस्जिदें बनाने के लिए फंड जुटा रहे हैं. कहानी प्रकाशित हुई, लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने कोई जवाब नहीं दिया.

Jaish-e-Mohammed

जिस विस्तार को किसी ने नहीं देखा

2025 की शुरुआत तक यह चुप्पी सामान्य हो गई. मार्च 2025 में सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय काफी बड़ा हो गया है. जमिया मस्जिद सुब्हान अल्लाह का क्षेत्र दोगुना होकर 18 एकड़ से ज्यादा हो गया. निर्माण कार्य 2022 के अंत में तेज हुआ- ठीक उसी समय जब पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर निकला.

इस रिपोर्टर की मार्च 2025 की खबर का शीर्षक था- एक्सक्लूसिव: व्हाइटलिस्टेड पाकिस्तान में जैश का मुख्यालय फैल रहा है. फिर भी कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था नहीं बोली.

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पहलगाम, ऑपरेशन सिंदूर और मलबा  

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी. 7 मई 2026 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया. इसमें बहावलपुर के जैश मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया.

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लेकिन कुछ दिनों बाद सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि क्षतिग्रस्त गुंबद फिर से बनाए जा रहे हैं. मलबा हटाया जा रहा है और निर्माण कार्य जारी है. हमले के एक साल बाद भी वहां भारी मशीनरी काम कर रही है.

मुख्यालय न तो छोड़ा गया, न तो तोड़ा गया - बल्कि उसे फिर से बनाया जा रहा है.

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जिम्मेदारी किसकी

FATF से पूछा गया कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर होने के बावजूद जैश का मुख्यालय सक्रिय रूप से बढ़ रहा है, तो इस पर कौन कार्रवाई करेगा?

  • FATF ने जवाब दिया कि पाकिस्तान FATF का सदस्य नहीं है. आप APG से संपर्क करें.
  • APG ने कहा कि हम मूल्यांकन करते हैं, लेकिन ग्रे लिस्टिंग-ब्लैक लिस्टिंग FATF की ICRG प्रक्रिया है.

इस तरह दोनों एकदूसरे में पाले में गेंद डाल रहे हैं. मूल्यांकन करने वाला एक, लिस्ट करने वाला दूसरा - बीच में कोई स्वतः कार्रवाई का तंत्र नहीं.

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Jaish-e-Mohammed

वे सवाल जिनका जवाब कभी नहीं आया

20 मई को FATF को तीन स्पष्ट सवाल भेजे गए...

  • APG की रिपोर्ट FATF की ICRG में कैसे भेजी जाती है?
  • 2022 के बाद पाकिस्तान पर कोई फॉलो-अप रिपोर्ट ICRG के सामने आई या नहीं?
  • बहावलपुर में जैश के मुख्यालय के विस्तार की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय ढांचे में किसकी है?

FATF ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया.

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बहावलपुर के गुंबद क्या कहते हैं?

यह संस्थागत नाकामी को न तो FATF और न APG अपने कंधे पर लेगी. यह सिर्फ एक-दूसरे को जवाबदेही से बचा रहे हैं. बहावलपुर के गुंबद इस नाकामी का सबूत हैं. पाकिस्तान व्हाइटलिस्टेड था तब वे बढ़े, भारतीय हमलों में गिरे और अब फिर से उठ रहे हैं. जिस सिस्टम को उन्हें रोकना था, उसने आखिरी ईमेल का भी जवाब नहीं दिया.
सवाल था - अगर आप नहीं, तो कौन?
जवाब अब भी नहीं आया

नोटः यह रिपोर्ट बिना किसी गुमनाम स्रोत के तैयार की गई है. हर दावा या तो सैटेलाइट इमेजरी से प्रमाणित है, प्रकाशित आधिकारिक रिकॉर्ड्स से सत्यापित है या फिर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) और एशिया/पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) द्वारा इस रिपोर्टर को सीधे लिखित जवाबों से लिया गया है. ये दोनों अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मिलकर यह सुनिश्चित करने का जिम्मा रखती हैं कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूह किसी भी रूप से धन जुटा या ट्रांसफर न कर सकें.

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