अक्षय कुमार के 'स्टार्स की भीड़ और ढेर सारा कन्फ्यूजन' स्टाइल वाली नई कॉमेडी फिल्म वेलकम टू द जंगल थिएटर्स में पहुंचने के लिए तैयार है. 2000s में अक्षय की इस स्टाइल की फिल्में भागमभाग और हाउसफुल वगैरह खूब चली थीं. आज उनमें से कई फ्रेंचाइजी की शक्ल ले चुकी हैं. वेलकम टू द जंगल
लंबे समय से बॉलीवुड में इस तरह की कॉमेडी फिल्म ने कोई तगड़ा कमाल नहीं किया है, इसलिए जनता में फिल्म का हाल देखने की काफी जिज्ञासा है. मगर फिल्मलवर्स में वेलकम टू द जंगल की एक और चीज को लेकर बहुत जिज्ञासा है— डायरेक्टर अहमद खान. 22 साल पहले अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने वाले अहमद खान का करियर ग्राफ ऐसा है कि उनका नाम देखने के बाद कई लोग पहले ही वेलकम टू द जंगल के भविष्य पर सवाल उठाने लगे हैं.
अनिल कपूर की आइकॉनिक फिल्म मिस्टर इंडिया (1987) में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अहमद ने अपना करियर शुरू किया था. किस्से बताते हैं कि 11 साल के अहमद को स्टेज पर ब्रेक डांस करते देखकर यह रोल दिया गया था. डांस में शुरू से ही मजबूत अहमद ने मिस्टर इंडिया के बाद सिर्फ 19 साल की उम्र में आमिर खान की दमदार हिट रंगीला (1995) की कोरियोग्राफी की थी. बतौर कोरियोग्राफर उन्होंने इंडस्ट्री में बहुत नाम कमाया और फाइनली डायरेक्टर बन गए.
सनी देओल, जॉन अब्राहम, सुनील शेट्टी स्टारर लकीर (2004) उनकी पहली फिल्म थी. बतौर डायरेक्टर अहमद की पहली ही फिल्म फ्लॉप हो गई. अगली बार उन्होंने मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म फूल एंड फाइनल (2007) पर हाथ आजमाया. सनी, सुनील के साथ शाहिद कपूर और विवेक ओबेरॉय जैसे एक्टर्स के साथ आई अहमद की दूसरी फिल्म भी फ्लॉप साबित हुई. लगातार दो फ्लॉप फिल्मों के बाद उन्होंने डायरेक्टर की कुर्सी छोड़ दी. 2010 में अहमद ने शाहिद कपूर को लेकर पाठशाला लिखी और प्रोड्यूस की, लेकिन यह फिल्म भी नहीं चली.
एक दशक बाद अहमद फिर डायरेक्टर की चेयर पर बैठे और नया शाहकार लेकर आए बागी 2 (2018). टाइगर श्रॉफ के नाम के साथ पहली 'स्टार' जोड़ने वाली बागी (2016) के सीक्वल में, कहानी का पहली फिल्म से कोई कनेक्शन नहीं था. दमदार तेलुगु थ्रिलर क्षणम (2016) की स्क्रिप्ट पर बनी इस कहानी को अहमद ने बॉलीवुड फिल्म में बदला. लेकिन टाइगर श्रॉफ के ताबड़तोड़ एक्शन के बीच क्रिटिक्स को स्क्रीनप्ले में कमी नजर आई. हालांकि बागी 2 बड़ी हिट साबित हुई और बतौर डायरेक्टर अहमद का बॉक्स ऑफिस पर खाता खुला.
टाइगर के साथ अहमद बागी 3 (2020) लेकर लौटे और एक बार फिर हिट कमा ले गए. लेकिन एक बार फिर से उनकी फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले क्रिटिक्स के पैरामीटर से बाहर निकले. टाइगर के एक्शन को नए लेवल पर पेश करने में अहमद जरूर कामयाब हुए, मगर तीसरी बार यह जोड़ी हीरोपंती 2 (2022) लेकर आई जो केवल फ्लॉप नहीं हुई, डिजास्टर साबित हुई. बॉक्स ऑफिस पर तो यह बस औंधे मुंह गिरी थी, रिव्यूज में तो फिल्म की धज्जियां ही उड़ गईं. लेकिन इस लेवल की फ्लॉप के बाद भी अहमद को सीधा अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल जैसे 30 से ज्यादा स्टार्स की फिल्म वेलकम टू द जंगल मिल गई.
सोशल मीडिया पर बॉलीवुड फैंस कई बार हैरान दिखते हैं कि 22 साल में दो हिट फिल्में देने वाले अहमद खान को इतने बड़े प्रोजेक्ट मिलते कैसे हैं? इसका जवाब अहमद खान की रेपुटेशन में छुपा है. वेलकम टू द जंगल के प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला हैं, जिनके बैनर से अहमद खान को 20 साल पहले फूल एंड फाइनल मिली थी.
टाइगर श्रॉफ की डेब्यू फिल्म, साजिद नाडियाडवाला की हीरोपंती (2014) में अहमद खान कोरियोग्राफर थे. साजिद ने उन्हें बागी 2 हिट होने के बाद बागी 3 और हीरोपंती 2 में मौका दिया. कोरियोग्राफर किसी भी फिल्म के शूट पर ऐसे टेक्नीशियन होते हैं, जिनकी कलाकारों से बॉन्डिंग अच्छी होती है और वह फिल्म मेकिंग की टेक्निकल डिटेल्स भी काफी समझते हैं.
बॉलीवुड में हिट फिल्मों के सीक्वल बनाने के ट्रेंड की एक दिक्कत है― कई बार ओरिजिनल डायरेक्टर को सीक्वल जबरदस्ती का आइडिया लगता है. लेकिन प्रोड्यूसर्स और एक्टर्स को फ्रेंचाइजी कनेक्शन से हिट मिलने के चांस मजबूत लगते हैं. ऐसे में कोरियोग्राफर, डायरेक्टर की कुर्सी पर बिठाने के लिए सूटेबल रहते हैं. वह स्टार्स और प्रोड्यूसर दोनों की जरूरत बैलेंस कर ले जाते हैं. हालांकि, उनकी स्टोरीटेलिंग और कहानी की पकड़ कैसी होगी यह कोई दावा नहीं कर सकता. जैसे― सलमान खान की रेस 3 (2018) कोरियोग्राफर रेमो डीसूजा ने डायरेक्ट की थी.
अहमद खान की रेपुटेशन प्रोड्यूसर्स और स्टार्स दोनों में मजबूत है और वह फिल्म में इन दोनों की डिमांड पूरी करते दिखते हैं. और अगर फिल्म नहीं चली तो डिमांड करने वालों को पता रहता है कि अहमद ने वही किया जो कहा गया. इसलिए ऐसे डायरेक्टर पर न हिट का क्रेडिट आता है न फ्लॉप का दोष. यही अहमद अब एक नया सीक्वल वेलकम टू द जंगल लेकर आ रहे हैं. अब देखना है कि वह दर्शकों को क्या नया मुजस्समा देते हैं.