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'पहले हमसे खरीदो गेहूं-मक्का...' ईरान के फ्रीज फंड पर अमेरिका की शर्त, तेहरान की दो टूक

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद व्यापार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. अमेरिका चाहता है कि ईरान के फ्रीज किए गए 12 अरब डॉलर का इस्तेमाल अमेरिकी किसानों से गेहूं और दूसरी कृषि उपज खरीदने में हो, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि पैसे खर्च करने का फैसला वही करेगा.

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अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता चल रही है. (File Photo- ITG)
अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता चल रही है. (File Photo- ITG)

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर स्विट्जरलैंड में बातचीत जारी है. इसी बीच दोनों देशों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. मामला ईरान के फ्रीज किए गए 12 अरब डॉलर और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है. अमेरिका चाहता है कि यह रकम अमेरिकी किसानों से गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसी कृषि उपज खरीदने में खर्च की जाए, जबकि ईरान ने इस शर्त को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई. बैठक के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा कि दोनों पक्ष 12 अरब डॉलर की फ्रीज रकम जारी करने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को अलग तरह से पेश किया.

यह भी पढ़ें: ईरान की धमकी के बाद बड़ा धमाका! होर्मुज में जहाजों की निकासी पर रोक... UN की मैरीटाइम एजेंसी ने खींचे हाथ

जेडी वेंस के मुताबिक, यह पैसा सीधे ईरान को नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसका इस्तेमाल अमेरिका से गेहूं, मक्का, सोयाबीन और अन्य खाद्य उत्पाद खरीदने में किया जाएगा. उनका कहना है कि इससे एक तरफ ईरान की खाद्य जरूरतें पूरी होंगी और दूसरी तरफ अमेरिकी किसानों को बड़ा आर्थिक फायदा मिलेगा.

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अमेरिका के खाते में जाएगा ईरान फ्रीज फंड

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दावे का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और अमेरिकी किसान इस फैसले से बेहद खुश हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रतिबंधों में मिलने वाली राहत और जारी की जाने वाली राशि अमेरिका के नियंत्रण वाले खाते में रहेगी और उसका इस्तेमाल सिर्फ खाद्य सामग्री, दवाइयों और मानवीय जरूरतों की वस्तुएं खरीदने के लिए किया जाएगा.

ईरान ने अमेरिका के दावे को किया खारिज

लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि एक बार फ्रीज रकम जारी होने के बाद उस पर सिर्फ ईरान का अधिकार होगा. उन्होंने कहा कि अगर कृषि उत्पाद खरीदे भी जाएंगे तो फैसला गुणवत्ता, कीमत और जरूरत के आधार पर होगा, न कि अमेरिका की शर्तों पर.

जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने भी दो टूक कहा कि अपने पैसों का इस्तेमाल कहां और कैसे करना है, यह पूरी तरह ईरान का संप्रभु अधिकार है. किसी दूसरे देश को इस पर शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है.

अमेरिका की शर्तों से बिगड़ सकती है बातचीत

विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह के मतभेद अंतिम शांति समझौते को और मुश्किल बना सकते हैं. अमेरिका में कई सांसद पहले से ही ईरान को आर्थिक राहत देने के विरोध में हैं, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी प्रतिबंधों के डर से ईरान के साथ कारोबार करने से बच रही हैं.

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फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार मुख्य रूप से दवाओं और मानवीय सहायता तक सीमित है. वर्ष 2024 में अमेरिका और ईरान के बीच कुल व्यापार करीब 838 मिलियन डॉलर रहा था. जानकारों का मानना है कि यदि समझौता आगे बढ़ता भी है तो ईरान कुछ अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीद सकता है, लेकिन वह अपने आयात को केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रखेगा. ऐसे में फ्रीज फंड के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान अभी खत्म होती नहीं दिख रही है.

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