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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल... पहाड़-बॉर्डर-पानी और हवा में अब हमारी तैयारी कैसी है?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने स्वदेशी तकनीक से जमीन, आकाश और जल में सुरक्षा अभेद्य की है. तेजस, प्रचंड और आत्मनिर्भर उत्पादन के दम पर भारत अब बाहरी निर्भरता छोड़कर भविष्य की हर सैन्य चुनौती के लिए तैयार हो रहा है.

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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारतीय सेनाएं काफी अपडेट हो गई हैं. (Photo: ITG)
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारतीय सेनाएं काफी अपडेट हो गई हैं. (Photo: ITG)

आज से ठीक एक साल पहले जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी, तो वह केवल एक सैन्य जवाबी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत की सुरक्षा नीति में आए एक बड़े बदलाव का प्रतीक था. पहलगाम की दुखद घटना ने हमें यह सिखाया कि दुश्मन अब पुराने तरीकों से नहीं, बल्कि हाइब्रिड और तकनीक आधारित तरीकों से हमला कर रहा है. 

पिछले 12 महीनों में भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को केवल आधुनिक ही नहीं बनाया, बल्कि उन्हें पूरी तरह स्वदेशी रंग में रंग दिया है. आज भारत की तैयारी 'पहाड़, बॉर्डर, पानी और हवा' इन चारों मोर्चों पर ऐसी है कि दुश्मन के लिए सेंध लगाना अब लगभग नामुमकिन हो गया है. इस बदलाव का सबसे बड़ा आधार मेक इन इंडिया और युद्ध मैदान से मिली लर्निंग हैं, जिन्होंने हमारी सेना को एक नई धार दी है.

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दुर्गम पहाड़ों और सीमाओं पर अभेद्य पहरा 

पहाड़ी युद्ध और सीमा सुरक्षा के मामले में पिछले एक साल में जो सबसे बड़ा सुधार हुआ है, वह है स्वदेशी तकनीक का एकीकरण यानी इंटीग्रेशन. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने महसूस किया कि ऊंचे और कठिन इलाकों में इंसानी नजरों के साथ डिजिटल आंखों की जरूरत है. आज हमारी सीमाओं पर भारत में ही बने 'तपस' और 'आर्चर' जैसे सशस्त्र ड्रोन चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं.

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दुर्गम चोटियों पर तैनात जवानों के लिए स्वदेशी इन्फैंट्री प्रोटेक्टेड मोबिलिटी व्हीकल (IPMV) बड़ी संख्या में भेजे गए हैं, जो न केवल बारूदी सुरंगों से सुरक्षित हैं बल्कि कठिन रास्तों पर भी तेजी से हमला करने की क्षमता रखते हैं. इसके अलावा, सेना ने अपनी तोपखाने (Artillery) को पूरी तरह बदल दिया है. 

अब हमारे पास K9-वज्र और धनुष जैसी स्वदेशी तोपें हैं, जो ऊंचे पहाड़ों पर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं. अब हमारी तैयारी केवल घुसपैठ रोकने की नहीं, बल्कि दुश्मन की हरकत शुरू होने से पहले ही उसे खत्म करने की है.

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वायु सेना: प्रचंड प्रहार और सुरक्षित संचार

आसमान में भारत की ताकत अब विदेशी विमानों के कलपुर्जों की मोहताज नहीं रही. ऑपरेशन सिंदूर से मिली सबसे बड़ी सीख यह थी कि युद्ध के समय अपने स्वदेशी हथियारों का स्टॉक होना कितना जरूरी है. पिछले एक साल में वायु सेना ने LCA तेजस और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के उत्पादन में रिकॉर्ड तेजी दिखाई है. 

प्रचंड दुनिया का इकलौता ऐसा हेलीकॉप्टर है जो 5000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर भी हथियारों के साथ उड़ान भर सकता है. दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकता है. इसके साथ ही, भारत ने अपना खुद का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा विकसित किया है, जो दुश्मन की मिसाइलों को 350 किलोमीटर दूर से ही भांप कर नष्ट कर सकता है. 

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सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दिल्ली में बना भूमिगत जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर (JOC) है, जो वायु सेना को थल सेना और नौसेना के साथ एक ही समय में जोड़कर बिजली की गति से फैसले लेने की ताकत देता है.

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समुद्री सीमा और हिंद महासागर में दबदबा 

भारत की समुद्री सीमाएं अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रक्षा (Aggressive Defense) की नीति पर चल रही हैं. पिछले एक साल में नौसेना ने स्वदेशी आईएनएस विक्रांत के साथ अपनी गश्त को हिंद महासागर के सुदूर इलाकों तक फैला दिया है. लर्निंग एंड एनहैंसमेंट के तहत भारत ने अपनी पनडुब्बी शक्ति को बढ़ाने के लिए स्वदेशी कलवारी क्लास पर फोकस किया है. 

समंदर के ऊपर और नीचे से छोड़ी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों ने भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे घातक सेनाओं में खड़ा कर दिया है. अब तैयारी ऐसी है कि यदि दुश्मन समंदर के रास्ते कोई भी हिमाकत करने की सोचता है, तो उसे मुख्य भूमि तक पहुंचने से पहले ही गहरे पानी में दफन किया जा सकता है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका हमारे स्वदेशी रडार और सैटेलाइट नेटवर्क की है, जो पानी की एक-एक लहर पर नजर रखते हैं.

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स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प 

इन सभी तैयारियों के पीछे जो सबसे बड़ी शक्ति काम कर रही है, वह है आत्मनिर्भरता. भारत ने पिछले एक साल में रक्षा आयात को कम करके घरेलू उत्पादन को 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के डिफेंस कॉरिडोर में आज वे हथियार बन रहे हैं जिन्हें हम पहले विदेशों से अरबों डॉलर में खरीदते थे. 

छोटे हथियारों से लेकर बुलेटप्रूफ जैकेट और नाइट विजन चश्मे तक, अब सब कुछ मेड इन इंडिया है. यह न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि युद्ध की स्थिति में हमें किसी बाहरी देश के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी से भी मुक्त कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर भारत का यह नया स्वरूप दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि हम शांति के पुजारी जरूर हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए अब हम किसी पर निर्भर नहीं हैं.

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