scorecardresearch
 

ईरान ने दागी ऐसी मिसाइल जिसे रोकने में इजरायल को भी आई मुश्किल

ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 में खैबर शेकन मिसाइल का इस्तेमाल किया. यह चौथी पीढ़ी की लॉन्ग-रेंज सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है. रेंज 1450 किमी. मोबाइल लॉन्चर से 15 मिनट में तैयार, सैटेलाइट गाइडेंस और मैन्यूवरेबल वारहेड से इजरायल के डिफेंस को चकमा देती है. पहले ट्रू प्रॉमिस 1-2 और 2025 हमलों में भी इस्तेमाल हुई.

Advertisement
X
ये है ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल खैबर शेकन जिसे इजरायल और अन्य स्थानों पर दागा गया. (File Photo: Getty)
ये है ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल खैबर शेकन जिसे इजरायल और अन्य स्थानों पर दागा गया. (File Photo: Getty)

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध तेज हो गया है. ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 (Operation True Promise 4) के तहत इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. IRGC ने कहा कि इस ऑपरेशन की कई वेव्स में खैबर शेकन (Kheibar Shekan) मिसाइल का इस्तेमाल किया गया.

यह मिसाइल ईरान की सबसे एडवांस्ड बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है. IRGC ने दावा किया कि इस मिसाइल ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर तेल अवीव के सरकारी परिसर, हाइफा के मिलिट्री सेंटर और पूर्वी येरूसलम पर हमला किया. ईरान ने इजरायलियों को चेतावनी दी कि वे मिलिट्री और सरकारी इलाकों से दूर रहें.  

यह भी पढ़ें: ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन का कितना खतरा... क्या ये US-इजरायल के हमले से हुआ?

Kheibar Shekan Ballistic missiles

खैबर शेकन मिसाइल क्या है?

खैबर शेकन ईरान की लेटेस्ट लॉन्ग-रेंज सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका नाम अरबी में 'खैबर का तोड़ने वाला' है, जो अरब इतिहास में मुसलमानों और यहूदियों के बीच खैबर की लड़ाई का संदर्भ है. यह खोर्रमशहर मिसाइल परिवार की चौथी पीढ़ी है. IRNA के अनुसार, इसकी रेंज 1450 किलोमीटर है, जो पश्चिमी ईरान से इजरायल तक आसानी से पहुंच सकती है. 

Advertisement

मिसाइल में सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम और मैन्यूवरेबल वारहेड हैं, जिससे यह बहुत सटीक हमला कर सकती है. लंबाई लगभग 4 मीटर, वजन 1,500 किलोग्राम. बाहरी वायुमंडल में स्पीड 19,500 किमी/घंटा से ज्यादा और अंदर 9,800 किमी/घंटा होती है. इतनी तेज स्पीड से एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम जैसे इजरायल का एरो या अमेरिका का पैट्रियट भी इसे रोकना मुश्किल होता है.

यह भी पढ़ें: इजरायल-अमेरिका का लगातार प्रहार... फिर भी कहां से ड्रोन दाग रहा ईरान?

यह मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च होती है. 15 मिनट से कम समय में तैयार हो जाती है. एयरोडायनामिक डिजाइन से हवा का घर्षण कम होता है और रडार से बचना आसान. ईरान ने खुद का 'अरॉन्ड' इंजन इस्तेमाल किया है, जो फ्यूल टैंक में इंटीग्रेटेड है. इससे मिसाइल छोटी और छिपाने में आसान होती है. यह पारंपरिक एयर डिफेंस को बायपास करने के लिए बनाई गई है.

मिसाइल का विकास कैसे हुआ?

  • खैबर शेकन खोर्रमशहर परिवार की मिसाइल है.  
  • पहली वर्जन (खोर्रमशहर-1) 2017 में आई, 13 मीटर लंबी.  
  • दूसरी वर्जन 2019 में.  
  • तीसरी वर्जन (खोर्रमशहर-3) गुप्त रूप से बनी, लेकिन पुष्टि हुई.  
  • चौथी वर्जन खैबर शेकन 2022-2023 में अनवील हुई.
  • ईरान ने इसे डिफेंस वीक परेड में दिखाया. यह सॉलिड-फ्यूल है, इसलिए लॉन्च तेज और छिपाना आसान.।

यह भी पढ़ें: B2 बॉम्बर से रीपर ड्रोन तक... ये 23 हथियार लेकर ईरान पर टूट पड़ा है अमेरिका

Advertisement

पहले कहां इस्तेमाल हुई?

खैबर शेकन पहले भी कई ऑपरेशंस में इस्तेमाल हुई...

  • ट्रू प्रॉमिस 1 (अप्रैल 2024): इजरायल पर पहला बड़ा हमला.  
  • ट्रू प्रॉमिस 2 (अक्टूबर 2024): हिजबुल्लाह और हमास लीडर्स की मौत का बदला.  
  • जून 2025 में इजरायल पर डायरेक्ट स्ट्राइक में तीसरी जेनरेशन का इस्तेमाल.  
  • अब ट्रू प्रॉमिस 4 (2026) में दसवीं वेव में इस्तेमाल, जहां IRGC ने कहा कि यह मिसाइल इजरायल के डिफेंस को चीरकर गुजरी.

ईरान इस मिसाइल पर बहुत भरोसा करता है क्योंकि यह हाइपरसोनिक स्पीड और मैन्यूवरिंग से इंटरसेप्ट मुश्किल है. ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 में ईरान ने गल्फ देशों में अमेरिकी बेस (बहरीन, कतर, UAE) और इजरायल पर सैकड़ों मिसाइल दागीं. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement