scorecardresearch
 

इजरायली हमले में टूटे परमाणु सेंटर को तीसरी बार बना रहा ईरान

ईरान ने पारचिन सैन्य परिसर के तालेगान-2 को तेजी से फिर से बना रहा है. इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त यह जगह पहले परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी मानी जाती है. मरम्मत और सुरक्षा उपायों का तीसरा दौर चल रहा है.

Advertisement
X
सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि ईरान का पारचिन सेंटर फिर से बना दिया गया है. (Photo: Getty)
सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि ईरान का पारचिन सेंटर फिर से बना दिया गया है. (Photo: Getty)

ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह जगह ईरान के पुराने अमाड परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी. वहां उच्च विस्फोटक परीक्षण किए जाने के आरोप लगे थे, जो परमाणु हथियार के डिजाइन से संबंधित हो सकते थे. 

ईरान हमेशा से इन आरोपों से इनकार करता आया है. कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इस स्थल की भूमिगत कक्ष और संरचनाएं विशेषज्ञों के लिए संदेह का विषय बनी रहीं. पारचिन परिसर स्वयं सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां कोई भी गतिविधि तुरंत नजर में आ जाती है.

यह भी पढ़ें: हमास की तरह हूतियों ने बनाई 20 KM लंबी खुली सुरंगें, बाब-अल-मंदेब का समुद्री रास्ता टारगेट

अक्टूबर 2024 और मार्च 2026 में इजरायली हमलों ने तालेगान-2 स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया. इन हमलों में ऊपर की संरचनाएं नष्ट हो गईं और भूमिगत कक्ष में छेद हो गए. यह पहली बार नहीं था जब यह जगह निशाने पर आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह विनाश और फिर से निर्माण का तीसरा चक्र है. 

 iran remaking parchin taleghan nuclear site

हर बार हमले के बाद ईरान ने स्थल को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है. मार्च 2026 के हमले के बाद जून में मरम्मत का काम शुरू हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहा है. 

Advertisement

इनमें विस्फोट से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा परतें, कंक्रीट के एप्रन और छेदों पर ढक्कन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. ये कदम दर्शाते हैं कि ईरान इस स्थल को लंबे समय तक चालू रखना चाहता है और भविष्य के संभावित हमलों से बचाने की तैयारी कर रहा है.

यह भी पढ़ें: सऊदी हो या अरब सागर... PAK का सेट पैटर्न, मौके से पीठ दिखाकर भाग जाता है

फिर से निर्माण की तेजी और सुरक्षा उपायों का महत्व

जून से शुरू हुए मरम्मत कार्य में तेजी देखी जा रही है. भूमिगत कक्ष के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढकने और मजबूत करने का काम चल रहा है. कंक्रीट की परतें और सुरक्षात्मक ढांचे जोड़ने से यह साफ है कि ईरान सिर्फ पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर रहा, बल्कि स्थल को और मजबूत बना रहा है. 

 iran remaking parchin taleghan nuclear site

इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी जैसे संगठनों ने इस पैटर्न को गहरी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि बार-बार विनाश के बावजूद स्थल को फिर से खड़ा करना सामान्य सैन्य गतिविधि से ज्यादा गंभीर संकेत दे सकता है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वर्तमान काम किसी परमाणु संबंधित गतिविधि से जुड़ा है या नहीं. केवल संरचनात्मक बदलाव ही नजर आ रहे हैं. ईरान का पक्ष है कि ये सब सामान्य रक्षात्मक मरम्मत हैं और उसके परमाणु प्रयास शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं.

Advertisement

यह घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहसों को फिर से ताजा कर देती है. आईएईए लगातार ईरान से ज्यादा पारदर्शिता की मांग करता रहा है. पश्चिमी देश और इजरायल मानते हैं कि अतीत में उच्च विस्फोटक परीक्षणों का मकसद परमाणु हथियार की क्षमता विकसित करना था. 

यह भी पढ़ें: नेपाल में आई बाढ़ के असली पांच कारण आए सामने, WWA ने दी ये चेतावनी

ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताता है. बार-बार हमले और पुनर्निर्माण का सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर यह स्थल वाकई किसी संवेदनशील गतिविधि के लिए इस्तेमाल होता रहा हो, तो उसकी बहाली से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर यह सिर्फ सैन्य विस्फोटक परीक्षण स्थल है, तो भी इसकी सुरक्षा बढ़ाया जाना ईरान की रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है.  

iran remaking parchin taleghan nuclear site again

वैश्विक स्तर पर यह घटना तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश आईएईए की रिपोर्टों पर नजर रखे हुए हैं. ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने को तैयार नहीं होता, तो प्रतिबंधों या अन्य दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है. साथ ही, बार-बार होने वाले हमले मध्य पूर्व में संघर्ष को नया रूप भी दे सकते हैं.

Advertisement

आगे की निगरानी

तालेगान-2 स्थल का तेजी से पुनर्निर्माण ईरान की दृढ़ता को दिखाता है कि वह बाहरी हमलों के बावजूद अपनी सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चाहता है. सुरक्षा उपायों का विस्तार इस बात का संकेत है कि भविष्य के खतरों को लेकर तैयारी की जा रही है. विशेषज्ञों की चिंता जायज है क्योंकि इतिहास में यह जगह संदेह के घेरे में रही है. फिर भी, वर्तमान तस्वीरों से परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं होती. 

आने वाले महीनों में सैटेलाइट निगरानी, आईएईए की जांच और कूटनीतिक विकास तय करेंगे कि यह पुनर्निर्माण कितना सामान्य है या कितना चिंताजनक. फिलहाल यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और परमाणु मुद्दे की जटिलता को एक बार फिर रेखांकित करती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि तनाव और न बढ़े.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement