मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां आधुनिक सैन्य इतिहास का सबसे बड़ा मिसाइल महासंग्राम देखने को मिल रहा है. जमीन, आसमान और समंदर के मोर्चों के बाद अब मुकाबला सीधे तौर पर एक 'बैलिस्टिक वॉर' में बदल चुका है. इस जंग में एक तरफ इजरायल है, जो अपनी तकनीकी श्रेष्ठता और चुनिंदा लेकिन दुनिया की सबसे अचूक मिसाइलों के दम पर दुश्मन को थर्राता है.
दूसरी तरफ ईरान है, जिसके पास मिसाइलों का एक ऐसा अंतहीन जखीरा है जिसे मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा मिसाइल बैंक कहा जाता है. इजरायल और ईरान के बीच हुए भीषण मिसाइल हमलों ने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को यह विश्लेषण करने पर मजबूर कर दिया है कि बैलिस्टिक मिसाइलों की इस रेस में कौन किस पर भारी है.
यह भी पढ़ें: भारत ने बढ़ा लिया परमाणु बमों का जखीरा, पाकिस्तान को लेकर भी हुआ ये खुलासा
इस पूरे महासंग्राम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इजरायल के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के नाम पर सिर्फ एक ही मुख्य ब्रैंड है, जिसे दुनिया 'जेरिको' के नाम से जानती है. यह सिर्फ तीन अलग-अलग वेरिएंट्स में आती है. इसके विपरीत, ईरान ने किसी एक मिसाइल पर निर्भर रहने के बजाय कम, मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का एक चक्रव्यूह तैयार कर रखा है.

इजरायल का 'ब्रह्मास्त्र': जेरिको मिसाइल सीरीज की ताकत
इजरायल की सैन्य रणनीति हमेशा से 'कम संख्या, लेकिन अचूक और संहारक क्षमता' पर आधारित रही है. इजरायल के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी, जिसका नाम बाइबिल में बताए गए ऐतिहासिक शहर 'जेरिको' के नाम पर रखा गया था.
आज के समय में इजरायल की पूरी बैलिस्टिक ताकत जेरिको सीरीज की तीन मिसाइलों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें इजरायल का 'डूम्सडे वेपन' या कयामत का हथियार भी कहा जाता है...
यह भी पढ़ें: धरती की तरफ बढ़ रहा है सूरज का महातूफान; भारत समेत दुनिया भर में दिख सकती है अद्भुत रोशनी
1. जेरिको-1 ... यह इजरायल की पहली पीढ़ी की शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल थी. 1970 के दशक में सेना में शामिल हुई इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 500 से 650 किलोमीटर थी. यह 400 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकती थी. आधुनिक युद्ध तकनीकों के आने के बाद 1990 के दशक में इजरायल ने इस वेरिएंट को आधिकारिक रूप से रिटायर कर दिया, लेकिन इसने इजरायल के मिसाइल विकास की मजबूत नींव रखी.
2. जेरिको-2 ... यह दो चरणों वाली सॉलिड-फ्यूल से चलने वाली मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी लंबाई 14 मीटर है. इसकी मारक क्षमता 1500 से 3500 किलोमीटर के बीच आंकी गई है. यह 1000 किलोग्राम तक का पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. इसे कंक्रीट के मजबूत बंकरों या मोबाइल लॉन्चरों से दागा जा सकता है, जिससे दुश्मन के हमले के बाद भी यह सुरक्षित बची रहे और जवाबी हमला कर सके.

3. जेरिको-3 ... यह इजरायल की सबसे खतरनाक और आधुनिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसे 2011 में सेना में शामिल किया गया था. तीन चरणों वाले सॉलिड प्रोपेलेंट इंजन से लैस इस मिसाइल का वजन लगभग 30000 किलोग्राम है. इसकी मारक क्षमता 4800 से लेकर 11500 किलोमीटर तक हो सकती है.
यह मिसाइल 750 किलोग्राम का परमाणु वारहेड या कई अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ वॉर करने वाले 'MIRV' वॉरहेड्स ले जा सकती है. इसकी गति इतनी तेज (Hypersonic) है कि यह ईरान के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को पलक झपकते ही तबाह कर सकती है.
यह भी पढ़ें: इस बार इजरायली नेवी वॉर में उतरी, ईरान पर भू-मध्य सागर से मिसाइलें दाग रहा इजरायल
ईरान का मिसाइल बैंक: हजारों मिसाइलों का अंतहीन जखीरा
इजरायल की जेरिको रणनीति के उलट, ईरान ने अपनी रक्षा और आक्रामकता के लिए मिसाइलों की एक पूरी फौज खड़ी कर दी है. सिपरी (SIPRI) और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास इस समय 3000 से भी अधिक सक्रिय बैलिस्टिक मिसाइलों का विशाल जखीरा है.
ईरान ने जानबूझकर अपनी मिसाइलों की रेंज को 2,000 किलोमीटर तक सीमित रखा है, ताकि वह पूरे मिडिल ईस्ट और इजरायल को अपने दायरे में ले सके. ईरान के पास मुख्य रूप से तीन बड़ी मिसाइल सीरीज हैं...
1. फतेह परिवार
ईरान की यह सीरीज बहुत सटीक और खतरनाक मानी जाती है क्योंकि ये ठोस ईंधन से चलती हैं, जिन्हें दागने में बहुत कम समय लगता है.

2. शहाब और इमाद सीरीज
ईरान ने उत्तर कोरिया और सोवियत संघ की 'स्कड' तकनीक के आधार पर इन्हें विकसित किया था.
3. सिज्जिल और फत्ताह
यह भी पढ़ें: Monsoon Tracker: बारिश-आंधी के बाद भी क्यों 'धधक' रही है दिल्ली, जानिए कब आएगा मॉनसून
दोनों देशों की मिसाइल जंग: कौन किस पर भारी?
अगर दोनों देशों की बैलिस्टिक क्षमताओं का आमने-सामने मूल्यांकन किया जाए, तो यह लड़ाई 'क्वालिटी बनाम क्वांटिटी' की है.
इजरायल के पास भले ही केवल जेरिको-2 और जेरिको-3 मिसाइलें एक्टिव हैं, लेकिन उनकी तकनीकी सटीकता, रडार को चकमा देने की क्षमता और उनकी परमाणु क्षमता बेजोड़ है. इजरायल की जेरिको-3 की रीच इतनी अधिक है कि वह ईरान के सुदूर भूमिगत बंकरों को भी नेस्तनाबूद कर सकती है. इजरायल को अपने 'एरो-3' और अमेरिका के 'थाड' मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सुरक्षा कवच प्राप्त है.

दूसरी तरफ, ईरान की ताकत उसकी 'सैल्वो डायनेमिक्स' में है. ईरान जानता है कि इजरायल की तकनीक बेहतर है, इसलिए वह एक साथ 150 से 200 मिसाइलों की बौछार करता है. ईरान की रणनीति यह है कि इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलें दागी जाएं कि इजरायल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम थक जाए. उसके इंटरसेप्टर खत्म हो जाएं. 2024 से 2026 के युद्ध के अनुभवों ने दिखाया है कि ईरान के इस संख्या बल ने कई बार इजरायली रक्षा कवच में सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की है.
बैलिस्टिक विनाश के मुहाने पर खड़ा मिडल ईस्ट
इजरायल और ईरान की यह बैलिस्टिक जंग सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक अलार्म बेल है. जहां इजरायल अपनी 'जेरिको' की तिकड़ी के दम पर अपनी संप्रभुता और परमाणु प्रतिरोध को बनाए हुए है. वहीं ईरान ने अपनी मिसाइलों के भारी जखीरे और हाइपरसोनिक दावों से इजरायल के अदम्य होने के भ्रम को तोड़ा है.
समंदर की गहराई से लेकर आसमान की ऊंचाइयों तक फैली यह मिसाइल आंधी अगर पूरी तरह बेकाबू होती है, तो यह आधुनिक सभ्यता के सबसे विनाशकारी युद्धों में से एक साबित होगी, जिसमें जीत किसी की भी हो, लेकिन तबाही पूरी इंसानियत की तय है.