scorecardresearch
 

Exclusive: होर्मुज में बारूदी सुरंगों के बीच कैसे की डाइविंग? भारतीय गोताखोर ने बताए ग्राउंड के हालात

भारतीय फ्री डाइवर बक्स खुराना दो दिन पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में डाइविंग करने गए थे. जंग के माहौल में भी वे तीन साल से वहां ट्रेनिंग करते आ रहे हैं. जब उनसे बारूदी सुरंगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मुझे पता होता तो मैं डरता और जाता ही नहीं.

Advertisement
X
ये हैं भारतीय गोताखोर बक्स खुराना जो दो दिन पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में डाइविंग करने गए थे. (Photo: ITG)
ये हैं भारतीय गोताखोर बक्स खुराना जो दो दिन पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में डाइविंग करने गए थे. (Photo: ITG)

भारतीय गोतखोर बक्स खुराना ने दो दिन पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्री डाइविंग करने गए थे. इस जंग के माहौल में भी वे डाइव करने गए. तीन साल से जा रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रेनिंग करने गया था. पर हम ट्रेनिंग नहीं कर पाए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या माइंस बिछी है? इस बात पर बक्स ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 1 किलोमीटर गहरा है. मुझे नहीं पता कि वहां माइंस है. ये मैंने पहली बार आपके चैनल से ही सुना है. 

30-40 मीटर पानी होता बड़े जहाज नहीं जाते. लेकिन गहरा है इसलिए बड़े जहाज वहां जाते हैं. माइंस होते तो मैं डरता. जाता ही नहीं. लेकिन मुझे पता ही नहीं था. इसलिए कोई डर भी नहीं. कोरल है. डॉलफिंस हैं. कई बार इंटरनेशनल लेवल की डाइविंग प्रतियोगिता में भी भाग लिया है. 

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने माना- 2000 करोड़ रुपये का MQ-4C ट्राइटन क्रैश, ईरान की जंग में कुल 25 ड्रोन गिरे

समंदर में बारूदी सुरंग क्या होती है?

समंदर में बारूदी सुरंग दो मुख्य प्रकार की होती हैं.

  • एक मोर्ड माइन्स जो समुद्र तल से तार या केबल से बंधी रहती हैं और पानी की सतह के पास फंस जाती हैं.
  • दूसरी बॉटम माइन्स जो तल पर पड़ी रहती हैं और जहाज के चुंबकीय क्षेत्र, आवाज या पानी के दबाव से फट जाती हैं. इनको हटाने के लिए माइन्स स्वीपिंग दो तरीकों से होती है. 
पहला मैकेनिकल स्वीपिंग यानी काटने वाला तरीका. इसमें माइन्सवीपर जहाज खास तार या केबल खींचते हैं जो माइन्स के बंधे तार को काट देते हैं. कटने के बाद माइन ऊपर तैरकर आ जाती है फिर उसे गोली मारकर या छोटे विस्फोटक से सुरक्षित तरीके से उड़ाया जाता है. 

दूसरा तरीका इन्फ्लुएंस स्वीपिंग यानी धोखा देने वाला तरीका. इसमें जहाज या ड्रोन खास उपकरण खींचते हैं जो असली जहाज जैसी चुंबकीय, आवाज या दबाव की लहर पैदा करते हैं. इससे माइन को लगता है कि जहाज आ रहा है और वह खुद फट जाती है. यह तरीका ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि असली जहाज दूर रहता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ईरान मिसाइल बेस का मलबा साफ कर रहा है, क्या फिर करेगा हमला?

पूरी प्रक्रिया में हाई-रेजोल्यूशन सोनार का इस्तेमाल होता है जो समुद्र तल की तस्वीर बनाता है. ऑपरेटर गोल या तार जैसी असामान्य चीज ढूंढते हैं. फिर रिमोट कंट्रोल वाले अंडरवाटर ड्रोन्स या रोबोट माइन की पुष्टि करते हैं और उसे नष्ट करते हैं.

ईरान ने खदानें कैसे बिछाईं और समस्या क्या है?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने समुद्री बारूदी सुरंगें बिना सोचे-समझे और अनियमित तरीके से बिछाईं. कई बारूदी सुरंगों का रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया. जहां रिकॉर्ड था, वहां भी कुछ बारूदी सुरंगें बह गईं या अपनी जगह से हिल गईं. अब ईरान को पता नहीं है कि कितनी बारूदी सुरंगें कहां हैं. 

यह भी पढ़ें: ईरान की स्टाइल में हमला कर रहे हैं बलोच, पाकिस्तान कैसे संभालेगा ऐसे अटैक? देखिए Video

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी जारी की है कि जहाज बारूदी सुरंगों से टकरा सकते हैं. उन्होंने कुछ सुरक्षित रास्तों के नक्शे भी जारी किए, लेकिन ये रास्ते बहुत सीमित हैं. खदानें हटाना उनको बिछाने से कहीं ज्यादा मुश्किल काम है. अमेरिका की सेना के पास भी तेजी से बारूदी सुरंगें साफ करने की पूरी क्षमता नहीं है. ईरान के पास तो और भी कम सुविधाएं हैं. 

Advertisement

ईरान के पास सैकड़ों छोटी नावें हैं जो जहाजों को परेशान कर सकती हैं या नई बारूदी सुरंगें बिछा सकती हैं. अमेरिका ने ईरान की नौसेना के कई जहाज डुबो दिए और नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए, लेकिन छोटी नावों को पूरी तरह नष्ट करना असंभव रहा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement