पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थिति लगातार खराब हो रही है. हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना हुई है, जिसमें बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पहली बार समुद्र में हमला किया. इस हमले में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की एक पेट्रोल बोट पर फायरिंग की गई और तीन जवान मारे गए. यह हमला पाकिस्तान-ईरान सीमा के पास अरब सागर में हुआ. BLA ने खुद इस हमले की जिम्मेदारी ली और इसे अपनी नई रणनीति का हिस्सा बताया.
पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की बोट नियमित गश्त पर थी. यह जियानी इलाके के पास थी, जो ग्वादर पोर्ट से ज्यादा दूर नहीं है. ईरान की सीमा बहुत नजदीक है. अचानक बलोच लड़ाकों ने गोलीबारी शुरू कर दी. बोट पर सवार तीनों जवान मौके पर ही मारे गए.
यह पहली बार हुआ है जब BLA या किसी बलोच समूह ने समुद्री सीमा पर इस तरह का हमला किया हो. पहले उनके हमले ज्यादातर जमीन पर होते थे – सड़कों, सुरक्षा बलों के कैंपों या चीनी प्रोजेक्ट्स पर. BLA ने अपने बयान में कहा कि जमीन पर कार्रवाइयों के बाद अब समुद्री सीमा पर कार्रवाई हमारी सैन्य रणनीति का नया विकास है. इस बयान से साफ है कि बलोच लड़ाके अब अपनी लड़ाई को समुद्र तक ले जा रहे हैं.
यहां देखिए हमले का वीडियो
ईरान की भूमिका और बलोच की रणनीति
बलोचिस्तान प्रांत ईरान और पाकिस्तान दोनों देशों में फैला हुआ है. दोनों तरफ बलोच लोग रहते हैं. अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं. ईरान में भी बलोच विद्रोही सक्रिय हैं, जैसे जैश अल-अद्ल. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान और पाकिस्तान के बीच तनाव के समय बलोच समूह एक-दूसरे के साथ जुड़ सकते हैं या एक-दूसरे की रणनीति से प्रेरित हो सकते हैं.
पाकिस्तान अक्सर आरोप लगाता है कि ईरान बलोच अलगाववादियों को समर्थन देता है, जबकि ईरान पाकिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता है. इस नए समुद्री हमले से लगता है कि बलोच लड़ाके ईरान की सीमा के करीब होने का फायदा उठा रहे हैं.
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वे शायद ईरान के प्रभाव वाले इलाकों से मदद या रणनीति ले रहे हों. हालांकि, इस बारे में कोई ठोस सबूत अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इलाके की भौगोलिक स्थिति और दोनों देशों के बीच पुराना तनाव इस संभावना को मजबूत करता है.
पाकिस्तान के लिए क्यों बड़ी समस्या?
बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यहां ग्वादर पोर्ट है, जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का मुख्य हिस्सा है. चीन ने यहां अरबों डॉलर का निवेश किया है. BLA पहले भी CPEC प्रोजेक्ट्स पर हमले कर चुका है. अब अगर हमले समुद्र में भी होने लगें, तो ग्वादर जैसे बंदरगाह की सुरक्षा बहुत मुश्किल हो जाएगी.

समुद्री हमलों से न सिर्फ सुरक्षा बलों को खतरा बढ़ेगा, बल्कि व्यापार, मछली पकड़ने और तेल-गैस की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. पाकिस्तान पहले से ही बलूचिस्तान में विद्रोह से जूझ रहा है. यहां सुरक्षा बलों पर हमले, सुसाइड बम ब्लास्ट और टारगेट किलिंग आम हैं. इस नई समुद्री रणनीति से स्थिति और बिगड़ सकती है.
पाकिस्तान की हालत कैसे और बिगड़ सकती है?
पाकिस्तान सरकार ने हमले की जांच शुरू कर दी है. इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बलोच लड़ाके समुद्र में सक्रिय हो गए, तो पाकिस्तान की सुरक्षा चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी.
अभी तो यह एक हमला है, लेकिन अगर BLA और दूसरे समूह इसे जारी रखते हैं, तो पाकिस्तान को नई रणनीति बनानी पड़ेगी. बलूचिस्तान में शांति के लिए राजनीतिक बातचीत और विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षा बलों पर हमले जारी रहने से स्थिति बिगड़ती ही जा रही है.
ईरान की सीमा से सटे इलाके में बलोच लड़ाकों की सक्रियता पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है. अगर दोनों देश मिलकर समस्या सुलझाने की बजाय एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे, तो बलोचिस्तान की आग और भड़क सकती है.
पाकिस्तान की स्थिति धीरे-धीरे लेकिन लगातार बिगड़ रही है. समुद्री हमले इसकी नई मिसाल हैं. आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों को सतर्क रहना होगा, वरना बलूचिस्तान न सिर्फ जमीन पर बल्कि समुद्र में भी अशांत हो सकता है.