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ड्रोन पर बड़ी मिसाइल क्यों? S-400 की सुरक्षा के लिए भारत की नजर रूस के Pantsir-S1 पर

S-400 जैसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम को भी छोटे ड्रोन से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत पड़ सकती है. इसी के लिए भारत रूस के Pantsir-S1 पर नजर रख रहा है, जो तोप और मिसाइल से दुश्मन के हवाई खतरों को रोक सकता है.

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रूस के पंतसिर सिस्टम से छूटती मिसाइल. (Screengrab:X)
रूस के पंतसिर सिस्टम से छूटती मिसाइल. (Screengrab:X)

भारत अपने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा के लिए रूस के Pantsir-S1 सिस्टम को खरीदने पर विचार कर रहा है. 27 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना S-400 की सुरक्षा के लिए 10 Pantsir-S1 सिस्टम लेना चाहती है. इसका मकसद छोटे ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों और दूसरे हवाई खतरों को रोकना है. हालांकि, इस खरीद को लेकर अभी सरकार की ओर से आधिकारिक मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है.

दरअसल, S-400 को दूर से आने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है. लेकिन छोटे और सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए इसकी महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना खर्चीला पड़ सकता है. ऐसे में S-400 के पास Pantsir-S1 तैनात करने से उसे अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है. इससे S-400 की महंगी मिसाइलों को बड़े और ज्यादा खतरनाक हवाई लक्ष्यों के लिए बचाकर रखा जा सकेगा.

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Pantsir-S1 रूस का कम दूरी तक मार करने वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. इसमें दो 30 एमएम की ऑटोमैटिक तोपें और 12 मिसाइलें लगाने की क्षमता होती है. इसकी मिसाइलें करीब 20 किलोमीटर तक के हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं. वहीं, इसकी तोपें करीब 4 किलोमीटर तक हमला कर सकती हैं.

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यह सिस्टम छोटे ड्रोन, हेलिकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों को रोकने के लिए बनाया गया है. इसकी खास बात यह है कि यह तोप और मिसाइल, दोनों से हमला कर सकता है. अगर कोई छोटा ड्रोन करीब आ जाता है, तो उसे रोकने के लिए तोप का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे हर छोटे खतरे पर महंगी मिसाइल खर्च करने की जरूरत कम हो सकती है.

4 से 6 सेकंड में दे सकता है जवाब

Pantsir-S1 की एक खासियत यह भी है कि यह करीब 4 से 6 सेकंड में किसी खतरे पर प्रतिक्रिया दे सकता है. इसका रडार एक साथ कई हवाई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है. हालांकि, किसी लक्ष्य पर नजर रखना और उसे मार गिराना अलग-अलग बातें हैं. यह सिस्टम एक साथ अधिकतम चार लक्ष्यों पर हमला कर सकता है.

आजकल युद्ध में छोटे ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे ड्रोन कम कीमत में तैयार किए जा सकते हैं और सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं. ऐसे में Pantsir-S1 जैसे सिस्टम छोटे ड्रोन को रोकने में मदद कर सकते हैं.

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S-400 और Pantsir-S1 मिलकर कैसे करेंगे काम?

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S-400 और Pantsir-S1 का काम अलग-अलग है. S-400 दूर से आने वाले हवाई खतरों को रोकने के लिए बनाया गया है, जबकि Pantsir-S1 कम दूरी पर सुरक्षा देता है. अगर दोनों को साथ तैनात किया जाता है, तो S-400 दूर से आने वाले बड़े खतरों को निशाना बना सकता है और Pantsir-S1 पास आने वाले छोटे खतरों को रोक सकता है.

इस तरह दोनों सिस्टम मिलकर सुरक्षा की दो परतें बना सकते हैं. अगर कोई ड्रोन पहली सुरक्षा को पार कर जाता है, तो दूसरी परत उसे रोकने की कोशिश कर सकती है. इससे S-400 के अहम हिस्सों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.

क्या भारत खरीदेगा 10 Pantsir-S1 सिस्टम?

27 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के लिए 10 और थलसेना के लिए तीन Pantsir सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव की चर्चा है. वायुसेना के लिए इनका इस्तेमाल S-400 की सुरक्षा में किया जा सकता है. हालांकि, अभी खरीद को लेकर अंतिम सरकारी मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है.

कुल मिलाकर, अगर भारत Pantsir-S1 खरीदता है, तो S-400 को छोटे ड्रोन और पास आने वाले हवाई खतरों से बचाने के लिए एक अतिरिक्त सिस्टम मिल सकता है. इससे महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल बड़े और ज्यादा खतरनाक लक्ष्यों के लिए किया जा सकेगा.

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