भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच आयोजित आठवें एडिशन्स ऑफ इन-यूएसएन एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (ईओडी) एक्सरसाइज 2026 कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में सफलतापूर्वक खत्म हुआ. यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों नौसेनाओं की टीमों के बीच गहन प्रोफेशनल और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज हुईं.
विस्फोटक पदार्थों के सुरक्षित निपटाने, खानों को निष्क्रिय करने और समुद्री गोताखोरी की विभिन्न तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दोनों पक्षों की विशेषज्ञता और आपसी समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. यह अभ्यास सिर्फ एक नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच विशेष समुद्री अभियानों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ.
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इसमें विषय विशेषज्ञों वास्तविक समय के खतरों, जैसे तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी), सुरक्षित निष्क्रिय करने का प्रोसेस, खान खोजकर खत्म करना और पानी के नीचे के मानवरहित सिस्टमों के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई. ये सत्र दोनों नौसेनाओं के विशेषज्ञों को नवीनतम तकनीकों और चुनौतियों से अवगत कराने में सहायक रहे.

अभ्यास की मुख्य गतिविधियां और प्रशिक्षण पहलू
अभ्यास के क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में गोताखोरी के तरीकों पर विशेष जोर दिया गया. इसमें जहाज के मलबे की लोकेशन और सैल्वेज यानी बचाव कार्य, विशेषज्ञ उपकरणों का प्रयोग तथा स्लिदरिंग ऑपरेशन जैसी जटिल गतिविधियां शामिल थीं. भारतीय और अमेरिकी गोताखोर टीमों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर इन अभ्यासों को अंजाम दिया, जिससे व्यावहारिक कौशल का विकास हुआ.
पानी के नीचे के मानवरहित वाहनों के उपयोग ने आधुनिक तकनीक को प्रशिक्षण का अभिन्न अंग बनाया, जो आज के समुद्री युद्ध परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण है. इन गतिविधियों से दोनों नौसेनाओं की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और कौशल में वृद्धि हुई. साथ ही आपसी समझ और इंटर-ऑपरेबिलिटी को मजबूत बनाने में मदद मिली.
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अभ्यास के दौरान टीमें वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप सिमुलेशन में शामिल हुईं, जिससे किसी भी संभावित खतरे का सामना करने की तैयारियां और बेहतर हुईं. दक्षिणी नौसेना कमान के आधुनिक सुविधाओं ने इस पूरे कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

रणनीतिक महत्व और द्विपक्षीय सहयोग
यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का एक और प्रमाण है. ईओडी यानी विस्फोटक ऑर्डनेंस डिस्पोजल समुद्री सुरक्षा का एक संवेदनशील और विशेषज्ञ क्षेत्र है, जिसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती. दोनों नौसेनाओं ने इस क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव साझा करके न सिर्फ अपनी क्षमताओं को निखारा बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा में योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई.
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों, जैसे खदानों के खतरे, आईईडी और पानी के नीचे के खतरों को देखते हुए ऐसे अभ्यास बेहद प्रासंगिक हैं. अभ्यास के सफल समापन ने दोनों नौसेनाओं की विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल और सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
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यह सिर्फ तकनीकी आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपसी विश्वास और लंबी साझेदारी को भी बढ़ावा देने वाला साबित हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से आयोजित होने वाले ऐसे द्विपक्षीय अभ्यास भविष्य में संयुक्त अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे.
आठवें संस्करण के इस अभ्यास ने दिखाया कि भारत और अमेरिका समुद्री सुरक्षा के जटिल क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. गोताखोरी, विस्फोटक निपटान और मानवरहित सिस्टम जैसे क्षेत्रों में साझा प्रशिक्षण से दोनों पक्षों को लाभ हुआ है. आने वाले समय में ऐसे अभ्यासों को और विस्तार दिया जा सकता है, जिसमें नई तकनीकों और वास्तविक परिदृश्यों को शामिल किया जाए.