scorecardresearch
 

भारत ने किराना हिल्स पर किया था हमला? पूर्व CDS ने बताया 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान क्या हुआ

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने पाकिस्तान के सरगोधा में किराना हिल्स या किसी परमाणु ठिकाने पर हमला नहीं किया था. इसका खुलासा पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया है. उन्होंने बताया कि भारत का ड्रोन मिशन टारगेट न मिलने के कारण किराना हिल्स की पहाड़ियों से टकरा गया था, जिसकी वजह से हिल्स से धुआं उठा होगा.

Advertisement
X
पूर्व CDS ने बताया कि किराना हिल्स पर हमला भारत की रणनीति नहीं था. (Photo- ITGD)
पूर्व CDS ने बताया कि किराना हिल्स पर हमला भारत की रणनीति नहीं था. (Photo- ITGD)

'ऑपरेशन सिंदूर' के क्या भारत ने पाकिस्तान के सरगोधा में किराना हिल्स पर हमला किया था? इन अटकलों पर अब देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का बड़ा बयान सामने आया है. जनरल चौहान ने खुलासा किया है कि भारत ने किराना हिल्स या वहां मौजूद किसी परमाणु ठिकाने को निशाना बनाकर कोई हमला नहीं किया था.

उन्होंने बताया कि निशाने की तलाश में भेजा गया भारत का लोइटरिंग म्यूनिशन (ड्रोन) शायद अपना टारगेट न मिलने के बाद किराना हिल्स की पहाड़ियों से जा टकरा गया होगा. 

विवेकनंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व सीडीएस जनरल ने कहा, 'हमले से पहले हमने सरगोधा और किराना हिल्स की तरफ कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे. इनका मुख्य काम सरगोधा के आसपास मौजूद पाकिस्तानी रडार सिस्टम को तलाशना और तबाह करना था.'

क्या थी हिल्स से धुआं उठने की जगह

अनिल चौहान ने बताया कि ये म्यूनिशन लगभग दो घंटे तक हवा में रहकर अपने टारगेट की तलाश कर सकते हैं. अगर तय समय में उन्हें कोई टारगेट नहीं मिलता, तो वो नीचे गिर जाते हैं. जनरल चौहान ने कहा, 'शायद वही म्यूनिशन नीचे आकर किराना हिल्स की एक पहाड़ी से टकरा गया होगा. पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने की जो तस्वीरें दिखाई जा रही थीं, उसकी वजह यही हो सकती है.'

Advertisement

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सरगोधा के आसपास लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल भारत की एक सैन्य रणनीति का हिस्सा था. जनरल चौहान ने इसे 'तीसरा विकल्प' करार दिया, जो उरी हमले के बाद की जमीनी कार्रवाई और पुलवामा के बाद किए गए बड़े हवाई हमले से बिल्कुल अलग था.

निचले वायुक्षेत्र का इस्तेमाल

उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर में हमने निचले वायुक्षेत्र का फायदा उठाने का फैसला किया. इसका मकसद टकराव की तेजी को कम रखना, सफलता सुनिश्चित करना और दुश्मन को सरप्राइज देना था.' दरअसल निचले वायुक्षेत्र का इस्तेमाल ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और अटैक हेलीकॉप्टरों के लिए किया जाता है.

पाकिस्तान की बातचीत की पहल के बावजूद हमले की मंजूरी

पूर्व CDS ने ये भी खुलासा कि जब पाकिस्तान ने भारत से बातचीत की गुहार लगाई, तब भी भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले की मंजूरी दी थी. जनरल चौहान ने कहा, 'सुबह करीब 10 बजे जब पाकिस्तान ने फोन करके बातचीत की पहल की, उसी दौरान वायु सेना प्रमुख ने मुझसे पूछा कि क्या सरगोधा पर हमला करना चाहिए? मैंने कहा- आगे बढ़ो.'

उन्होंने एयर चीफ से दो और टारगेट तय करने को कहा. पहला अतिरिक्त टारगेट स्कर्दू चुना गया था, लेकिन खराब मौसम की वजह से इसे बदलकर भोलारी कर दिया गया.

Advertisement

अपनी नीति को लेकर जनरल चौहान ने कहा, 'हमारी रणनीति का एक मुख्य सिद्धांत ये था कि आखिरी हमला और निर्णायक प्रहार हमेशा हमारी तरफ से होगा, पाकिस्तान की तरफ से नहीं.'

यह भी पढ़ें: 'जेट्स को नीचे उड़ाकर दुश्मन को चौंका दिया', ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व CDS का बड़ा खुलासा

'अपने ही हमलों के नतीजों से अनजान था पाकिस्तान'

जनरल अनिल चौहान ने कहा कि कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को ये तक नहीं पता था कि उसके हमले किसी निशाने पर लगे हैं या नहीं. इसी सबूत की तलाश में पाकिस्तान 10 से 12 मई तक अमेरिकी और चीनी कंपनियों से कॉमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें जुटाने की नाकाम कोशिश करता रहा.

उन्होंने कहा कि क्योंकि पाकिस्तान का कोई भी हमला सटीक निशाने पर नहीं लगा था, इसलिए उन्हें सैटेलाइट इमेज में भी तबाही का कोई सबूत नहीं मिल सका.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement