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चीनी सैटेलाइट्स ने दिखाई अमेरिकी THAAD की तैनाती... क्या ईरान के हमलों से होगा बचाव?

चीन की सैटेलाइट्स ने मुवाफक साल्टी एयर बेस पर THAAD सिस्टम का खुलासा हुआ है. ईरान के संभावित हमलों से अमेरिकी फौजों की रक्षा के लिए लगाए गए थे. किसी भी कार्रवाई से पहले रक्षा मजबूत करनी होगी. THAAD महंगा है और सीमित स्टॉक है. 2025 में ईरान के फतह हाइपरसोनिक मिसाइलों के सामने थाड कमजोर साबित हुआ था.

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चीन की सैटेलाइट तस्वीरों से जॉर्डन में तैनात अमेरिकी थाड मिसाइलों की लोकेशन का पता चल गया है. (Photo: ITG)
चीन की सैटेलाइट तस्वीरों से जॉर्डन में तैनात अमेरिकी थाड मिसाइलों की लोकेशन का पता चल गया है. (Photo: ITG)

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीनी कॉमर्शियल सैटेलाइट कंपनी मिजारविजन की तस्वीरों ने बड़ा खुलासा किया है. इनमें जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस पर अमेरिकी आर्मी की THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती साफ दिख रही है.

यह बेस अमेरिकी फौजों का मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण फॉरवर्ड लोकेशन बनता जा रहा है. ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाई से पहले हमें अपनी रक्षा मजबूत करनी होगी. क्या यह सिस्टम ईरान के मिसाइल हमलों को रोक पाएगा? 

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THAAD सिस्टम क्या है और क्यों तैनात किया गया?

THAAD एक एडवांस एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जो ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराता है. यह वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह काम करता है. अमेरिकी आर्मी के पास सिर्फ 8 THAAD बैटरी हैं. इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक बहुत सीमित है.

Chinese Satellites Exposes US THAAD Missile location

जॉर्डन में तैनाती का मतलब...

  • अमेरिकी फौजों की बड़ी संख्या को ईरान के संभावित हमलों से बचाना.
  • अक्टूबर 2024 से इजरायल में भी कम से कम एक बैटरी तैनात है.
  • जॉर्डन का बेस ईरान के करीब है, इसलिए यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है.

चीनी सैटेलाइट्स का रोल और संभावित संकेत

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ये तस्वीरें सार्वजनिक होने से पहले यह तैनाती गुप्त थी. अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन जानबूझकर यह जानकारी ईरान तक पहुंचा रहा है? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीनी युद्धपोत पर्सियन गल्फ के पास तैनात हैं, जो अपने सेंसर से अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रखकर ईरान को इंटेलिजेंस दे सकते हैं.

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इससे चीन अमेरिका को संदेश दे रहा हो सकता है कि वह ईरान की मदद करेगा, जिससे अमेरिकी हमले की संभावना कम हो. सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की वजह से अब जमीनी तैनाती छिपाना मुश्किल हो गया है. इजरायल ने भी ईरान के हमलों के बाद सैटेलाइट जैमिंग की थी ताकि नुकसान का आकलन न हो सके.

Chinese Satellites Exposes US THAAD Missile location

THAAD की पिछली परफॉर्मेंस: जून 2025 का सबक

  • 13-25 जून 2025 में इजरायल-ईरान संघर्ष में THAAD का पहला हाई-इंटेंसिटी टेस्ट हुआ. इजरायल ने ईरान पर बड़ा हवाई हमला किया, जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.
  • अमेरिका ने THAAD से 150 से ज्यादा इंटरसेप्टर फायर किए – दुनिया भर में तैनात कुल स्टॉक का 25% से ज्यादा.
  • हर इंटरसेप्टर की कीमत करीब 1.55 करोड़ डॉलर – सिर्फ 11 दिन की रक्षा में 2.35 अरब डॉलर (करीब 20,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा खर्च.
  • इजरायल के अपने सिस्टम और अमेरिकी नेवी के SM-3/SM-6 मिसाइलों का भी भारी खर्च.

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लेकिन THAAD की प्रभावशीलता पर सवाल...

ईरान के हमलों से इजरायल में सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान हुआ. ट्रंप ने कहा कि आखिरी दिनों में इजरायल को बहुत नुकसान हुआ. बैलिस्टिक मिसाइलों ने कई इमारतें तबाह कर दीं.

ईरान ने अपनी नई फतह हाइपरसोनिक मिसाइल का सीमित इस्तेमाल किया, जो THAAD के लिए बड़ा खतरा है – यह दिशा बदल सकती है और THAAD इसे नहीं रोक पाता. THAAD को ओवरव्हेल्म यानी एक साथ ज्यादा मिसाइलों के हमले से भी खतरा है.

Chinese Satellites Exposes US THAAD Missile location

क्या THAAD ईरान के हमलों को रोक पाएगा?

THAAD बहुत महंगा और सीमित स्टॉक वाला सिस्टम है. ईरान के पास अब हाइपरसोनिक और घुमावदार मिसाइलें हैं, जो THAAD को चकमा दे सकती हैं. फतह जैसी मिसाइलें THAAD बैटरी को ही निशाना बना सकती हैं – एक बैटरी नष्ट होने से बाकी रक्षा कमजोर हो जाएगी.

जॉर्डन में THAAD तैनाती अमेरिका की ईरान के खिलाफ तैयारी दिखाती है, लेकिन जून 2025 का अनुभव बताता है कि यह सिस्टम परफेक्ट नहीं है. चीनी सैटेलाइट्स का खुलासा और संभावित इंटेलिजेंस सपोर्ट ईरान की डिटरेंस को मजबूत कर रहा है. क्या यह अमेरिका को हमले से रोकेगा? 

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