पंजाब की जेलों में नशे की समस्या को लेकर सामने आए आंकड़ों ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है. पंजाब सरकार की ओर से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया है कि राज्य की जेलों में बंद करीब 44.5 फीसदी कैदी ओपिओइड की लत के इलाज के लिए रजिस्टर्ड हैं. राज्य की 25 जेलों में कुल 35,449 कैदी बंद हैं, जिनमें से 15,768 कैदी आउट-पेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट यानी OOAT क्लीनिक से जुड़े हुए हैं. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार के ड्रग्स के खिलाफ अभियान पर सवाल खड़े किए हैं.
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा कपूरथला सेंट्रल जेल से सामने आया है. यहां कुल 4,196 कैदी बंद हैं, जिनमें से 2,635 कैदी OOAT ट्रीटमेंट के लिए रजिस्टर्ड हैं. यानी इस जेल की कुल कैदी आबादी के 60 फीसदी से ज्यादा लोग ओपिओइड की लत के इलाज से जुड़े हुए हैं. उम्र के हिसाब से देखें तो 26 से 35 साल की उम्र वाले कैदी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इस आयु वर्ग के 5,656 कैदी OOAT कार्यक्रम में रजिस्टर्ड हैं, जबकि 36 से 45 साल की उम्र के 4,544 कैदी इसका हिस्सा हैं.
हलफनामे के मुताबिक 18 साल से कम उम्र का कोई भी कैदी इस कार्यक्रम के तहत रजिस्टर्ड नहीं है. नशे की लत से जूझ रहे कैदियों के इलाज के लिए राज्य में आउट-पेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट यानी OOAT Programme चलाया जा रहा है. यह कार्यक्रम साल 2017 में पंजाब में हेरोइन के बढ़ते इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया था. इसके तहत कैदियों को Buprenorphine 2 mg और Naloxone 0.5 mg की दवा दी जाती है, जिसे आम तौर पर BPNx के नाम से जाना जाता है.
यह दवा नशा छोड़ने के दौरान होने वाले लक्षण और नशे की तेज इच्छा यानी Craving को नियंत्रित करने में मदद करती है. इसके साथ ही यह हेरोइन समेत दूसरे Opioids के असर को रोकने में भी मदद करती है और Overdose के खतरे को कम करती है. दवा में मौजूद Naloxone इंजेक्शन के जरिए इसके गलत इस्तेमाल को हतोत्साहित करता है. हलफनामे में कहा गया है कि अगर किसी मरीज को BPNx बंद करने के बाद दोबारा नशे की लत लगती है तो Psychiatrist से सलाह के बाद उसे फिर से यह दवा शुरू की जाती है.
कैदियों को OOAT क्लीनिक से जोड़ने के लिए पंजाब के स्वास्थ्य विभाग ने एक SOP भी तैयार किया है. इसके अलावा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना यानी NAPDDR Scheme के तहत पंजाब की आठ सेंट्रल जेलों में नशा-मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं. इनमें पटियाला, बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट, लुधियाना, अमृतसर, कपूरथला और श्री गोइंदवाल साहिब की सेंट्रल जेल शामिल हैं. इन केंद्रों में नशे की लत से जूझ रहे कैदियों के इलाज, पुनर्वास और नशा-मुक्ति के लिए संस्थागत मदद दी जाती है.
सरकार ने यह भी कहा है कि नशे की समस्या से प्रभावित कैदियों को जेल में रहने के दौरान ही नहीं, बल्कि रिहाई के बाद भी सहायता देने का प्रस्ताव है. इसका मकसद इलाज को लंबे समय तक जारी रखना, कैदियों का पुनर्वास करना और उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा में शामिल करना है. यानी सरकार की योजना केवल जेल के भीतर इलाज तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि रिहाई के बाद भी नशे से दूर रखने और सामान्य जीवन में लौटाने की है.
इस मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को स्वत: संज्ञान लिया था. कोर्ट ने यह कदम जून 2023 में मानसा के प्रशासनिक न्यायाधीश की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर उठाया. उस रिपोर्ट में बड़ी संख्या में नशे की लत वाले जेल कैदियों को Buprenorphine-Naloxone कॉम्बिनेशन दिए जाने का जिक्र था. इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर पंजाब सरकार ने ADGP (जेल) राजेश कुमार के जरिए हलफनामा दाखिल किया, जिसमें जेलों में नशे की समस्या और उपलब्ध इलाज का बुनियादी ढांचे का पूरा विवरण दिया गया.
इन आंकड़ों ने AAP सरकार के 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज कर दी है. पंजाब सरकार ने करीब 2023 से नशे के खिलाफ यह अभियान शुरू किया था, जिसमें रेड, पुनर्वास अभियान और जन-जागरूकता के जरिए ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. लेकिन अब जेलों में करीब 45 फीसदी कैदियों का ओपिओइड की लत के इलाज के लिए रजिस्टर्ड होना विपक्ष के लिए सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा बन गया है.
NCRB की 2024 रिपोर्ट के आंकड़े भी पंजाब में ड्रग्स की गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक NDPS क्राइम रेट के मामले में पंजाब देश में दूसरे स्थान पर रहा और यहां प्रति एक लाख आबादी पर 29 मामले दर्ज किए गए. वहीं Overdose Deaths की बात करें तो पंजाब में 2024 में 106 मौतें दर्ज हुईं, जो 2023 की 89 मौतों से ज्यादा हैं. हालांकि 2022 में राज्य में 117 Overdose Deaths दर्ज की गई थीं.
देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में Overdose से 681 मौतें हुई थीं, जो 2023 में घटकर 654 रह गईं. लेकिन 2024 में यह संख्या अचानक बढ़कर 978 हो गई. ऐसे में पंजाब में मौतों की संख्या बढ़ने के बावजूद राष्ट्रीय कुल मौतों में राज्य की हिस्सेदारी कम हुई है. इसके बावजूद 106 मौतों के साथ पंजाब इस मामले में देश में दूसरे स्थान पर रहा, जिससे राज्य में नशे की समस्या को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं.
बीजेपी नेता एचएस फूलका ने जेलों में नशे को लेकर AAP सरकार पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जेलों का नियंत्रण AAP सरकार के पास है और अगर सरकार जेल के अंदर ड्रग्स को नियंत्रित नहीं कर सकती तो फिर 'युद्ध नशे के विरुद्ध' जैसे अभियान की बात कैसे की जा सकती है. फूलका ने इस अभियान को वास्तविक लड़ाई के बजाय केवल नारेबाजी करार दिया. उनके मुताबिक जेलों में नशे की मौजूदगी सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े करती है.
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरनजीत सिंह चन्नी ने भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि चिकित्सीय देखरेख में रहने वाले करीब आधे कैदी नशे से जुड़े इलाज पर हैं. चन्नी ने आरोप लगाया कि जब तक ड्रग पैडलर्स, AAP नेताओं और पुलिस के बीच कथित नेक्सस को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक पंजाब में ड्रग्स की समस्या कम नहीं होगी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर पंजाब की जेलें नशे के आदी कैदियों से क्यों भरी हुई हैं.
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने भी 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान को लेकर सरकार को घेरा. उनका दावा है कि 2022 से पहले जेलों में नशा छुड़ाने की दवाओं की खपत करीब 1 करोड़ 17 लाख थी, जो अब बढ़कर 8 करोड़ 87 लाख हो गई है. उन्होंने कहा कि पहले कैदियों की संख्या करीब 600 थी, जो अब बढ़कर 3,400 हो गई है. परगट सिंह के मुताबिक चार साल में कुल नशा छुड़ाने केंद्रों ने करीब 43 करोड़ 44 लाख रुपये की दवाएं इस्तेमाल की हैं.
परगट सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा बहुत बड़ा है और सरकार एक तरफ दावा करती है कि उसने पंजाब से ड्रग्स खत्म कर दिए हैं, जबकि दूसरी तरफ उसके अपने विधानसभा स्पीकर ने भी माना है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ है. विपक्ष का कहना है कि केवल नशे के आदी लोगों को पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी. उनकी मांग है कि नशे की सप्लाई करने वाले लोगों और पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जाए.
हालांकि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है. आज तक/इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा कि जेलों में बंद लोग अपराधी हैं और उनमें से कुछ नशे के आदी भी हैं, इसलिए उनका इलाज किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि नशे की लत जेल के गेट पर खत्म नहीं हो सकती. सरकार का तर्क है कि नशे की लत एक बीमारी है और इसके लिए कैदियों को इलाज और पुर्नवास की जरूरत है.
फिलहाल पंजाब की जेलों में नशे की लत से जुड़े ये आंकड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. एक तरफ सरकार 'युद्ध नशे के विरुद्ध' के जरिए ड्रग्स के खिलाफ अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ करीब 44.5 फीसदी जेल कैदियों का OAT से जुड़ा होना समस्या की गहराई दिखाता है. हाईकोर्ट के सामने सरकार की ओर से रखे गए आंकड़ों के बाद अब निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई और राज्य सरकार के कदमों पर हैं. वहीं SAD नेता दलजीत चीमा की प्रतिक्रिया अभी आना बाकी है.