साल 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी शादाब अहमद को जमानत की शर्तों में राहत के लिए ट्रायल कोर्ट का रुख करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए उसे पूर्वी दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में अर्जी दाखिल करने को कहा. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह निर्देश दिया. शादाब ने कानून की पढ़ाई जारी रखने और पुलिस थाने में नियमित रिपोर्टिंग की शर्त में राहत मांगी थी.
LLB की पढ़ाई करना चाहता है शादाब
शादाब अहमद के वकील ने अदालत को बताया कि उसने गाजियाबाद के एक लॉ कॉलेज में दाखिला लिया है. उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय कानून पाठ्यक्रम के लिए भी आवेदन किया था. वह कॉलेज की नियमित कक्षाओं में शामिल होना चाहता है, जो सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलती हैं. इसके लिए उसने दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति देने और जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग की.
शादाब के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल अपनी शिक्षा जारी रखकर खुद को सुधारने का प्रयास कर रहा है. ऐसे में उसे पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए. शादाब चाहता है कि अदालत उसकी इस कोशिश में सहयोग करे, ताकि जमानत की शर्तें उसकी पढ़ाई में बाधा न बनें.
जनवरी 2026 में मिली थी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में शादाब अहमद को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. हालांकि, अदालत ने उस पर सख्त शर्तें लगाई थीं. इनमें यह निर्देश भी शामिल था कि वह ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) की सीमा से बाहर नहीं जा सकता. इसी शर्त के चलते गाजियाबाद जाकर नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल होने के लिए उसे अदालत की अनुमति की जरूरत है.
शादाब ने जमानत की शर्तों में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हालांकि, बेंच ने उसे राहत देने के बजाय संबंधित ट्रायल कोर्ट जाने को कहा है. अब वह कड़कड़डूमा कोर्ट में अपनी मांग रख सकता है, जहां उसकी जमानत की शर्तों में बदलाव की अर्जी पर विचार किया जा सकता है.