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एक मर्डर, 4 स्टेट और 12 हजार किमी तक तफ्तीश... ऐसे हुआ दिल्ली के गुड्डू बादशाह मर्डर केस का खुलासा

दिल्ली के लाल कुआं में गुड्डू बादशाह की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है. दिल्ली, यूपी, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में 12 हजार KM के ऑपरेशन के बाद इस मामले में 8 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

Delhi Guddu Badshah Murder Case: दिल्ली के पुल प्रह्लादपुर के लाल कुआं इलाके में 28 जुलाई को हुई इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह की हत्या का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है. साउथ-ईस्ट दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु तक पुलिस ने कार्रवाई की. आरोपियों को पकड़ने के लिए करीब 12 हजार किलोमीटर तक पुलिस का इंटरस्टेट ऑपरेशन चला.

पुलिस के मुताबिक, 28 जुलाई को लाल कुआं, पुल प्रह्लादपुर में फायरिंग की सूचना मिली थी. पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो इरशाद आलम उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या की जा चुकी थी, जबकि एम. फारुख गोली लगने से घायल मिला. क्राइम टीम और FSL टीम ने मौके का निरीक्षण किया. घटनास्थल से खून से सने सामान, खाली कारतूस, जिंदा कारतूस और धातु के प्रोजेक्टाइल बरामद कर जांच के लिए कब्जे में लिए गए.

शुरुआत में फारुख ने खुद को इस वारदात में घायल हुआ पीड़ित बताया था. लेकिन पुलिस ने जब उससे विस्तार से पूछताछ की तो उसकी कहानी में कई विरोधाभास सामने आए. इसके बाद CDR यानी कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस और दूसरे सबूतों की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई. पुलिस के मुताबिक, जांच में फारुख की कथित भूमिका और साजिश में शामिल होने के संकेत मिले. इसके बाद उसे वारदात वाले दिन यानी 28 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया गया.

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जांच में पुलिस को हत्या के पीछे पुरानी रंजिश का पता चला. यह कथित दुश्मनी मृतक गुड्डू बादशाह और आरोपियों श्मशाद, अशफाक के बीच थी, जिसकी जड़ें बिहार के सुपौल स्थित उनके मूल इलाके से जुड़ी बताई गई हैं. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर गुड्डू को खत्म करने की साजिश रची. इसके लिए उसे बिहार से दिल्ली बुलाया गया और लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के नाम पर मिलने के लिए तैयार किया गया.

पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर समझौते के लिए बुलाई गई यह बैठक असल में एक जाल थी. गुड्डू बादशाह को लाल कुआं स्थित एक किराए के वेयरहाउस में ले जाया गया. वहां कथित तौर पर उसे गोली मार दी गई. जांच में यह भी सामने आया कि साजिश में शामिल अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं. इनमें योजना बनाना, आपसी तालमेल, आने-जाने का इंतजाम, ठहरने की व्यवस्था, हमला करना और सबूत छिपाने जैसी कथित भूमिकाएं शामिल थीं.

इस मामले में पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें मो. फारुख (27), निवासी पुल प्रह्लादपुर, दिल्ली, मों आफताब, निवासी सुपौल, बिहार, मो. इरफान (23), निवासी साहिबाबाद, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश और मो. श्मशाद (28), निवासी सुपौल, बिहार शामिल हैं. इनके अलावा मो. अश्फाक (23), मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू (22) और मो. शोएब अख्तर, सभी सुपौल, बिहार के रहने वाले बताए गए हैं.

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आठवां आरोपी अमन यादव (25) लाल कुआं, पुल प्रह्लादपुर, दिल्ली का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, श्मशाद और अशफाक के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी सामने आई है. दोनों की कथित तौर पर बिहार के सुपौल में दर्ज एक हत्या के मामले में संलिप्तता बताई गई है. पुलिस अब इस केस में आरोपियों की भूमिका और उनके आपसी कनेक्शन से जुड़े सबूतों को और मजबूत करने में जुटी है.

पुलिस के मुताबिक, फारुख ने कथित तौर पर मृतक का विश्वास हासिल किया. इसके बाद वह गुड्डू को विवाद सुलझाने के बहाने किराए के परिसर तक लेकर गया और कथित तौर पर दूसरे आरोपियों के बीच समन्वय कराने में भूमिका निभाई. वारदात के बाद उसने खुद को घायल और निर्दोष पीड़ित के तौर पर पेश करने की कोशिश की. हालांकि पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पुलिस को उसकी भूमिका पर संदेह हुआ.

मो. आफताब पर कथित तौर पर दूसरे आरोपियों के साथ समन्वय करने और कथित हमलावर टीम की आवाजाही व जुटान में मदद करने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, उसे तमिलनाडु के त्रिपुर से स्थानीय पुलिस की मदद से पकड़ा गया. वहीं इरफान पर वारदात के बाद आरोपियों को पनाह और लॉजिस्टिक मदद देने तथा अवैध हथियार और कारतूस छिपाने का आरोप है. उसकी निशानदेही पर एक अवैध पिस्टल, एक अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए.

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जांच के मुताबिक, शमशाद कथित साजिश के प्रमुख लोगों में से एक था. पुलिस के अनुसार, वह इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे आरोपियों के संपर्क में था. उसके डिजिटल और कम्युनिकेशन लिंक की जांच और पुष्टि अभी आगे की जा रही है. अशफाक पर भी दूसरे कथित साजिशकर्ताओं के संपर्क में रहने और हत्या की योजना व समन्वय में हिस्सा लेने का आरोप है.

रहमतुल्लाह उर्फ छोटू पर कथित तौर पर हमले को अंजाम देने वाली टीम का हिस्सा होने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद उसने सबूतों को छिपाने या हटाने में भी मदद की. शोएब अख्तर पर तमिलनाडु से दिल्ली तक कथित हमलावर टीम के सदस्यों के साथ आने और बाद में दूसरे आरोपियों के संपर्क में बने रहने का आरोप है.

पुलिस के मुताबिक, अमन यादव ने कथित तौर पर लाल कुआं के आसपास आरोपियों के ठहरने और दूसरी लॉजिस्टिक जरूरतों में मदद की. जांच में यह भी आरोप है कि आर्थिक लाभ के वादे के बाद वह कथित साजिश में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, वारदात वाली रात उसने आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब को अपनी मोटरसाइकिल पर साथ लेकर जाने में मदद की और कथित तौर पर फायरिंग में भी हिस्सा लिया.

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पुलिस का कहना है कि अमन यादव और फारुख के कथित तौर पर छिपाए गए दो अन्य अवैध हथियारों और दूसरे केस प्रॉपर्टी की बरामदगी के प्रयास जारी हैं. जांच एजेंसी हथियारों और दूसरे सामान को कानूनी प्रक्रिया के तहत बरामद करने में जुटी है. बरामद हथियार और कारतूस फोरेंसिक तथा बैलिस्टिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं. इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इनका इस हत्या की वारदात से कोई संबंध है या नहीं.

जांच के दौरान पुलिस ने एक अवैध पिस्टल, एक अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. इसके अलावा केस से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण भौतिक सबूत भी जब्त किए गए हैं. घटनास्थल से पहले ही खाली कारतूस, जिंदा कारतूस और धातु के प्रोजेक्टाइल समेत कई चीजें बरामद की गई थीं. पुलिस इन सभी सबूतों को वैज्ञानिक जांच के जरिए आपस में जोड़ने की कोशिश कर रही है.

पुलिस के मुताबिक, दो और अवैध हथियारों तथा अन्य केस प्रॉपर्टी की बरामदगी अभी बाकी है. इन हथियारों को कथित तौर पर अमन यादव और फारुख ने छिपाया था. जांच में सामने आए हथियारों और कारतूसों की फोरेंसिक व बैलिस्टिक जांच कराई जा रही है. इसका मकसद यह स्थापित करना है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल हत्या में हुआ था या नहीं.

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हत्या के बाद आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए कथित तौर पर मोबाइल फोन बंद किए और लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे. जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन और हॉटस्पॉट के जरिए संपर्क बनाए रखने की कोशिश की. पुलिस ने इन तकनीकी चुनौतियों के बावजूद आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों और आवाजाही पर नजर बनाए रखी. इसी के आधार पर अलग-अलग राज्यों में उनकी तलाश आगे बढ़ाई गई.

पुलिस टीम ने CDR और तकनीकी विश्लेषण के साथ इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन की जांच की. इसके अलावा आरोपियों की लोकेशन और मूवमेंट, फील्ड इंटेलिजेंस, स्थानीय स्तर पर सत्यापन, CCTV और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का इस्तेमाल किया गया. क्राइम टीम और FSL की मदद भी जांच में ली गई. इसके बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में लगातार छापेमारी और कार्रवाई की गई.

गुड्डू बादशाह हत्याकांड की जांच महज दिल्ली तक सीमित नहीं रही. आरोपियों के अलग-अलग राज्यों में छिपे होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीमों ने कई राज्यों में जाकर कार्रवाई की. इस पूरी इंटरस्टेट जांच के दौरान पुलिस ने करीब 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की. तमिलनाडु के त्रिपुर से लेकर दिल्ली और बिहार तक आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमों ने काम किया.

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तकनीकी निगरानी और जमीनी सूचना के बीच तालमेल बनाकर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की. इस दौरान स्थानीय पुलिस की भी मदद ली गई. पुलिस का दावा है कि आरोपियों द्वारा फोन बंद करने, जगह बदलने और इंटरनेट आधारित संचार के जरिए बचने की कोशिश के बावजूद उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया गया. आखिरकार इस ऑपरेशन में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

पुलिस की अब तक की जांच के मुताबिक, यह हत्या कथित तौर पर पहले से रची गई साजिश का नतीजा थी. आरोपियों ने कथित तौर पर मृतक का विश्वास जीतने, उसे दिल्ली बुलाने और टारगेट लोकेशन तक पहुंचाने में अलग-अलग भूमिका निभाई. इसके बाद ठहरने और परिवहन की व्यवस्था, आपसी समन्वय, हथियारों की व्यवस्था और कथित हमले को अंजाम देने की बात सामने आई है. वारदात के बाद सबूतों को छिपाने या हटाने की कथित कोशिश की भी जांच की जा रही है.

पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को कोर्ट में पेश कर दिया है. अब जांच एजेंसियां बाकी केस प्रॉपर्टी और हथियार बरामद करने के साथ पूरी घटना की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं. वैज्ञानिक और स्वतंत्र सबूतों के जरिए वारदात का पूरा घटनाक्रम स्थापित करने की कोशिश की जा रही है. साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कथित साजिश में इन 8 आरोपियों के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं. मामले में आगे की जांच जारी है.

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