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Krishna Janmashtami 2026: 4 या 5 अगस्त, कब है कृष्ण जन्माष्टमी? कंफ्यूजन में निकल ना जाए शुभ मुहूर्त, ये है टाइमिंग

Krishna Janmashtami 2026: पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है. और रोहिणी नक्षत्र में ही लड्डू गोपाल का जन्म भी हुआ था. इस साल रोहिणी नक्षत्र 4 सितबंर की रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा.

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रोहिणी नक्षत्र में हुआ था कान्हा का जन्म (Photo: ITG)
रोहिणी नक्षत्र में हुआ था कान्हा का जन्म (Photo: ITG)

Krishna Janmashtami 2026: हर बार की तरह इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कोई जन्माष्टमी 4 अगस्त को मनाने की बात कर रहा है तो कोई उसके अगले दिन यानी 5 अगस्त को. ऐसे में व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने वाले भक्तों के सामने सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर कंफ्यूजन बना हुआ है. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि इस साल कृष्ण जन्माष्टमी किस दिन मनाई जाएगी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा.

कब है जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026 Date)

पंडित प्रवीण मिश्र के मुताबिक, 4 सितंबर को अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर अष्टमी तिथि लग रही है, जो कि 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. यानी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को ही मनाना सही रहेगा. 

क्या रहेगा कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त (Krishna Janmashtami 2026 Shubh Muhurat)

पंडित जी ने आगे बताया कि इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का सबसे श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त 4 अगस्त की रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. यानी पूजा के लिए आपको 45 मिनट मिलेंगे. इसी मुहूर्त में कान्हा जी व लड्डू गोपाल का जन्म कराया जाता है.

इसके अलावा, जन्माष्टमी पर कल सुबह से ही श्रीकृष्ण की पूजा के लिए बहुत सारे मुहूर्त प्राप्त होंगे-

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पहला मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 26 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 36 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक

15 साल बाद कृष्ण जन्माष्टमी पर दुर्लभ संयोग (Krishna Janmashtami 2026 Shubh Sanyog)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है. मान्यता है कि करीब 15 साल बाद इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है. इसके अलावा, हर्षण योग, बुधादित्य योग, हंस योग और मालव्य योग भी बन रहे हैं.

धार्मिक दृष्टि से यह सभी संयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था. ऐसे में भक्तों के लिए इस बार की जन्माष्टमी विशेष महत्व रखने वाली है.

कैसे मनाएं कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व (Krishna Janmashtami 2026 Celebration)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा घर की अच्छी तरह सफाई करें. लड्डू गोपाल के लिए एक सुंदर झूला सजाएं. फिर भगवान श्रीकृष्ण को गंगाजल, कच्चे दूध और पंचामृत से स्नान कराएं.

इसके बाद लड्डू गोपाल को नए और सुंदर वस्त्र पहनाएं. उन्हें कंगन, कुंडल, मुकुट और फूलों की माला से सजाएं. भगवान को फूल अर्पित करें और उन्हें झूले में बैठाकर धीरे-धीरे झुलाएं. अंत में लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें.

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