दिन के उजाले में एक मासूम बच्चा अचानक अपने घर से गायब हो जाता है. पूरा परिवार उसे ढूंढ़ने में जुटा होता है, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिलता. असल में कोई नहीं जानता था कि जिस एक शख्स पर बच्चों को कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी सिखाने की जिम्मेदारी थी, उसी ने तकनीक को हथियार बनाया और उस बच्चे को अगवा कर लिया. इस पूरी वारदात में आरोपी टीचर ने किताबों से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सीखा कि एक गैंगस्टर कैसे सोचता है, कैसे किडनैपिंग की साजिश रचता है, कैसे फिरौती मांगता है और कैसे पुलिस को चकमा देने की कोशिश करता है. इस डिजिटल प्लान की सबसे खौफनाक बात यह थी कि उसमें इंसानियत के लिए कोई जगह नहीं बची थी.
गोरखपुर के 10 साल के वैभव वर्मा की कहानी सिर्फ एक किडनैपिंग या मर्डर की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जहां एक शिक्षक ने एआई से अपराध का 'ब्लूप्रिंट' तैयार किया और फिर उसे हकीकत में बदलने की कोशिश की. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि वैभव की जान क्यों गई, बल्कि यह भी है कि आखिर एक पढ़ा-लिखा इंसान तकनीक का इस्तेमाल इतनी भयावह साजिश रचने के लिए कैसे कर बैठा?
गोरखपुर में रहने वाला वैभव चौथी क्लास में पढ़ता था. उसे मारने के लिए एक कंप्यूटर टीचर ने क्या-क्या प्लान नहीं बनाया. अपने प्लान को अमलीजामा पहनाते हुए सबसे पहले तो उसने मासूम बच्चे को मार डाला. फिर उसके पिता को फोन करके 1 करोड़ की फिरौती मांगी. लेकिन कंप्यूटर टीचर ने वैभव को क्यों किडनैप किया था और फिरौती की रकम लेने से पहले ही क्यों उसे मार डाला? आइए जानते हैं गोरखपुर के इस सनसनीखेज हत्याकांड की पूरी कहानी, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया.
गोरखपुर के एक घर में बोरी में लिपटी दस साल के बच्चे की लाश मिली. चौथी क्लास में पढ़ने वाले एक जौहरी के पोते की लाश. लाश एक घर के बेसमेंट में बोरी में पैक मिली. हालंकि उस लाश के साथ पुलिस ने बच्चे को कातिल भी पकड़ लिया. लेकिन इसके बावजूद वहां मौजूद भीड़ पुलिस वालों से खासी नाराज थी. जानते हैं क्यों? क्योंकि कातिल पुलिस के पास 17 घंटे से मौजूद था, लेकिन पुलिस बच्चे का सच फिर भी उससे उगलवा नहीं सकी. यहां तक कि उस कातिल के घर तक भी पुलिस हो आई लेकिन उसी घर के बेसमेंट रखी लाश तक वो तलाश नहीं सकी.
ये सनसनीखेज मामला यूपी के उस गोरखपुर का है, जहां से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं. उसी गोरखपुर में एक जौहरी का पोता दस साल का वैभव वर्मा सोमवार को स्कूल से घर लौटता है. किताबों का बस्ता घर में रख कर अपनी नई साइकिल चलाने घर से निकल जाता है. तब दोपहर के दो बजे थे. दोपहर के खाने का वक्त था, फिर भी जब वैभव नहीं लौटा तो घर वालों ने उसे ढूंढना शुरू किया.
वैभव घर से ज्यादा नहीं गया था. सीसीटीवी कैमरे से पता चला कि वो बराबर की गली तक गया फिर गायब हो गया. उसी गली में एक कंप्यूटर टीचर सर्वेश भट्ट रहता था. इधर वैभव की खोजबीन के दौरान एक सीसीटीवी कैमरे में दिखा कि सर्वेश शाम करीब छह बजे एक खेत में चप्पल फेंक रह है. चप्पल किसी बच्चे की थी. खेत के पास ही वैभव की साइकिल भी पड़ी थी. साइकिल और चप्पल मिलते ही यकीन हो गया कि वैभव को किडनैप कर लिया गया है.
तब तक पुलिस भी आ चुकी थी. वैभव के घरवालों की शिकायत पर पुलिस सर्वेश के घर गई और उसे पकड़ भी लिया. मगर घर की तलाशी ठीक से नहीं ली. अगर घर की तलाशी ले लेती तो उसी वक्त वैभव की लाश घर के बेसमेंट से बरामद हो जाती. सर्वेश भट्ट की गिरफ्तारी के बाद अगले 17 घंटे तक पुलिस उससे पूछताछ करती रही. फिर 17 घंटे बाद अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह उसे अपने साथ लेकर उसके घर पहुंची और आखिरकार सर्वेश के घर के बेसमेंट से ही बोरी में रखी वैभव की लाश बरामद हो गई.
अब सवाल ये है कि जब आरोपी पुलिस की कस्टडी में था तो फिर कैसी पूछताछ कर रही थी कि उसका मुंह खुलवाने में पुलिस को 17 घंटे लग गए? जब सीसीटीवी कैमरे में वैभव सर्वेश के घर की तरफ जाता दिखाई दिया, उसकी चप्पल खेत में फेंकते हुए कैमरे में कैद हो गया. फिर पुलिस ने सर्वेश के घर की तलाशी उसी वक्त क्यों नहीं ली?
तो पूरी कहानी तो आपने जान ली. अब सर्वेश की कहानी भी जान लीजिए. साल भर पहले ही सर्वेश भट्ट की शादी हुई थी. पेशे से वो एक कंप्यूटर टीचर था. हालांकि 2024 के नीट एग्जाम पेपर लीक में उसका भी नाम आया था. वो पकड़ा भी गया. 40 दिनों तक प्रयागराज की नैनी जेल में बंद भी रहा. फिर जमानत पर बाहर आ गया. उसने एक बैंक से 25 लाख रुपये का कर्जा ले रखा था. हर महीने करीब 30 हजार रुपये किस्त जाती थी. इसी उधार को चुकाने के लिए उसने इलाके के बड़े व्यापारी के पोते वैभव को किडनैप करने का प्लान बनाया.
उसे उम्मीद थी कि फिरौती की शक्ल में उसे कम से कम 1 करोड़ रुपये तो मिल ही जाएंगे. चूंकि कंप्यूटर का टीचर था, इसलिए साजिश की सारी कड़ियां कंप्यूटर और एआई से ही जोडने की कोशिश कर रहा था. लेकिन जिस तरह उसने वैभव को किडनैप किया, वैभव शोर मचाने लगा. इसीलिए उसने उसी वक्त गला घोंट कर उसे मार डाला. फिर लाश को बोरी में भरकर घर के बेसमेंट में ही रख दिया.
वैभव के कत्ल की बात और घर में लाश होने की खबर सर्वेश के घर वालों को भी थी. लेकिन वो भी चुप रहे. उधर, गांव वालों के साथ दिखावे के लिए वो खुद वैभव को ढूंढने का नाटक भी कर रहा था. सर्वेश के जुर्म कबूल करने के बाद सबूत छुपाने मिटाने और पुलिस को खबर ना देने के इल्जाम में पुलिस ने उसके परिवार के 6 और सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया है. ये मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.
(गोरखपुर से गजेंद्र त्रिपाठी का इनपुट)