केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में फिलहाल किसी तरह के बदलाव की उसकी कोई योजना नहीं है. यह योजना 1 अप्रैल 2025 से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक वैकल्पिक विकल्प (ऑप्शन) के रूप में लागू है और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मौजूदा स्वरूप में ही जारी रहेगी.
लोकसभा में मंगलवार को एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि NPS के दायरे में आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए UPS एक वैकल्पिक व्यवस्था है और सरकार के पास इसे बदलने या इसमें संशोधन करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. हालांकि, संसद में साझा किए गए आंकड़ों के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि भविष्य की पेंशन सुरक्षा के लिए कर्मचारी UPS और NPS में किस विकल्प को अधिक पसंद कर रहे हैं.
किन कर्मचारियों के लिए है UPS?
यूनिफाइड पेंशन स्कीम केंद्र सरकार की नौकरियों में न्यू जॉइन करने वाले कर्मचारियों, वर्तमान NPS कर्मचारियों और पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है. इसके अलावा पात्र दिवंगत पेंशनभोगियों के कानूनी रूप से विवाहित पति या पत्नी भी इस योजना के दायरे में आते हैं. सरकार ने दोहराया कि UPS, NPS के भीतर एक वैकल्पिक (ऑप्शनल) पेंशन व्यवस्था के रूप में ही जारी रहेगी.
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UPS की खास बातें क्या हैं?
सरकार का कहना है कि UPS कर्मचारियों को अधिक सुनिश्चित और अनुमानित पेंशन सुरक्षा उपलब्ध कराती है. इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं...
सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों से रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अधिक स्थिर वित्तीय सुरक्षा मिलेगी.
कर्मचारियों की क्या चिंताएं हैं?
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि UPS में कर्मचारी के 10 प्रतिशत अंशदान (Contribution) में कोई बदलाव नहीं होता, जबकि सरकार का योगदान बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी शुरुआत में UPS नहीं चुनता और बाद में रिटायरमेंट के करीब इसमें शामिल होना चाहता है, तो यह सरकार की निर्धारित शर्तों और गणना प्रणाली (Calculation Matrix) पर निर्भर करेगा कि उसे यह विकल्प दिया जाए या नहीं.
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कर्मचारी अब भी NPS को क्यों चुन रहे?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि युवा कर्मचारियों के बीच NPS अब भी लोकप्रिय बना हुआ है. मनजीत सिंह पटेल के अनुसार यदि कोई कर्मचारी 60 वर्ष की आयु से पहले सरकारी सेवा छोड़ देता है, तो UPS के तहत मिलने वाली सुनिश्चित पेंशन का लाभ नहीं मिल पाएगा. कर्मचारियों द्वारा UPS की तरफ ज्यादा झुकाव नहीं दिखाने के पीछे यही एक प्रमुख व्यावहारिक सीमा (Functional Limitation) मानी जा रही है.
वहीं पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के अनुसार NPS दुनिया की सबसे कम लागत वाली पेंशन योजनाओं में शामिल है. इसमें कर्मचारी अपनी पसंद का फंड मैनेजर चुन सकते हैं और निवेश (Asset Allocation) का विकल्प भी स्वयं तय कर सकते हैं. इसके अलावा, इसमें एक बार UPS से NPS में वापस आने की सुविधा भी उपलब्ध है. NPS में कर्मचारी अपने PRAN खाते में जमा पेंशन कॉर्पस के मालिक बने रहते हैं. अंतिम पेंशन फंड का आकार बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और किसी साझा पूल व्यवस्था पर आधारित नहीं होता.
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आगे क्या?
फिलहाल केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि UPS में किसी बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है और यह NPS के भीतर एक वैकल्पिक योजना के रूप में जारी रहेगी. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी सेवा अवधि, पेंशन की जरूरत और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए UPS और NPS के बीच विकल्प चुनना होगा. अब कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी बैठकों पर रहेगी. कर्मचारी संगठनों ने अपने ज्ञापनों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग भी उठाई है. हालांकि, मौजूदा स्थिति में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि UPS की संरचना में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.