बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको पहले से पता होता है कि तय अवधि में कितना ब्याज मिलेगा. लेकिन अगर आप अपनी बचत से कुछ बेहतर कमाई की उम्मीद कर रहे हैं, तो सिर्फ FD तक सीमित रहना जरूरी नहीं है. बाजार से जुड़े कुछ म्यूचुअल फंड भी विकल्प हो सकते हैं. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के म्यूचुअल फंड स्कीम्स में कुछ फंड छोटी अवधि के निवेश के लिए हैं, तो कुछ ऐसे हैं जिनमें बॉन्ड या शेयरों से जुड़े निवेश का मिश्रण मिलता है.
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. म्यूचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और इनमें FD की तरह जमा रकम पर तय ब्याज नहीं मिलता. इसलिए निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपका पैसा कितने समय के लिए है, आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे कितनी जल्दी निकालना चाहते हैं.
3 से 12 महीने के लिए SBI सेविंग्स फंड
अगर आपके पास कुछ महीनों के लिए अतिरिक्त पैसा है और आप उसे लंबे समय के लिए नहीं बांधना चाहते, तो SBI सेविंग्स फंड पर विचार कर सकते हैं. यह मनी मार्केट कैटेगरी का फंड है, जो मुख्य रूप से कम अवधि वाले वित्तीय साधनों में निवेश करता है. इस तरह के फंड का इस्तेमाल उन पैसों को रखने के लिए किया जा सकता है, जिनकी निकट भविष्य में जरूरत पड़ सकती है. जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा भी FD की तुलना में अधिक लचीली हो सकती है, हालांकि निकासी और भुगतान की शर्तें लागू होती हैं.
किनके लिए उपयोगी? ऐसे निवेशक, जिन्हें कुछ महीनों के लिए पैसा रखना है और जो FD के अलावा विकल्प तलाश रहे हैं.
जोखिम: कम अवधि के निवेश का मतलब जोखिम से पूरी तरह मुक्त होना नहीं है. रिटर्न बदल सकता है और यह फंड FD नहीं है.
1 से 2 साल के लिए SBI लो ड्यूरेशन फंड
अगर आप अपना पैसा एक साल या उससे कुछ अधिक समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो SBI लो ड्यूरेशन फंड एक विकल्प हो सकता है. यह मुख्य रूप से कम अवधि वाले डेट इंस्ट्रूमेंट यानी कर्ज से जुड़े वित्तीय साधनों में निवेश करता है.
ऐसे फंड की कमाई ब्याज दरों में बदलाव और उसके पोर्टफोलियो में शामिल बॉन्ड की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. इसलिए इसमें मिलने वाला रिटर्न पहले से तय नहीं होता. निवेश से पहले फंड की मौजूदा पोर्टफोलियो संरचना, क्रेडिट गुणवत्ता और खर्च का अनुपात देखना जरूरी है.
किनके लिए उपयोगी? वे निवेशक, जिनका लक्ष्य एक से दो साल का है और जो कुछ बाजार जोखिम लेने को तैयार हैं.
जोखिम: ब्याज दरों में बदलाव या किसी जारीकर्ता की भुगतान क्षमता कमजोर होने से निवेश के मूल्य पर असर पड़ सकता है.
2 से 3 साल के लिए SBI बैंकिंग एंड पीएसयू फंड
SBI बैंकिंग एंड पीएसयू फंड मुख्य रूप से बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और वित्तीय संस्थानों की ओर से जारी बॉन्ड में निवेश करता है. इस श्रेणी के फंड में उच्च क्रेडिट रेटिंग वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी हो सकती है.
इस फंड की निवेश रणनीति को देखते हुए यह उन लोगों के लिए विचार करने योग्य विकल्प हो सकता है, जो डेट फंड के जरिए मध्यम अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, केवल सरकारी क्षेत्र की कंपनी या बैंक का बॉन्ड होने से जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता. निवेश से पहले फंड की ताजा निवेश सूची और क्रेडिट रेटिंग देखनी चाहिए.
किनके लिए उपयोगी? ऐसे निवेशक, जो करीब दो से तीन साल का निवेश लक्ष्य रखते हैं और बॉन्ड आधारित फंड चाहते हैं.
जोखिम: बॉन्ड की कीमतों में बदलाव और जारीकर्ता से जुड़े जोखिम का असर रिटर्न पर पड़ सकता है. फंड में मिलने वाला रिटर्न तय नहीं है.
कम जोखिम के साथ अलग रणनीति चाहते हैं? देखें ये 2 विकल्प
SBI आर्बिट्रेज फंड
आर्बिट्रेज फंड शेयर बाजार और वायदा बाजार में कीमतों के अंतर का फायदा उठाने की रणनीति अपनाते हैं. इनका उद्देश्य बाजार की दिशा पर सीधे दांव लगाए बिना इस अंतर से कमाई करना होता है.
ऐसे फंड का रिटर्न बाजार में उपलब्ध अवसरों और फंड की रणनीति पर निर्भर करता है. इन्हें बैंक FD का विकल्प मानने से पहले निवेश की अवधि, निकासी की शर्तें और टैक्स व्यवस्था समझना जरूरी है.
किनके लिए उपयोगी? ऐसे निवेशक, जो बाजार से जुड़े फंड में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन सीधे शेयरों में निवेश करने से बचना चाहते हैं.
SBI कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड
कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड आम तौर पर अपने पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट में और सीमित हिस्सा इक्विटी यानी शेयरों में लगाते हैं. इसका मकसद डेट निवेश के साथ शेयर बाजार से कुछ अतिरिक्त कमाई की संभावना हासिल करना होता है.
लेकिन शेयरों में निवेश होने के कारण इस फंड में भी बाजार के उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है. इसे पूरी तरह सुरक्षित या तय रिटर्न देने वाला विकल्प नहीं समझना चाहिए.
किनके लिए उपयोगी? वे निवेशक, जो डेट निवेश के साथ सीमित इक्विटी निवेश भी चाहते हैं और बाजार के जोखिम को समझते हैं.
FD और म्यूचुअल फंड में क्या है अंतर?
FD और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा अंतर रिटर्न और जोखिम का है. बैंक FD में ब्याज दर पहले से तय होती है, जबकि म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
FD: तय ब्याज दर, अवधि के अनुसार रिटर्न और बैंक की शर्तों के मुताबिक समय से पहले निकासी की सुविधा.
डेट फंड: बॉन्ड और अन्य कर्ज आधारित साधनों में निवेश; रिटर्न तय नहीं और ब्याज दर व क्रेडिट जोखिम संभव.
आर्बिट्रेज फंड: बाजार की कीमतों के अंतर से कमाई की रणनीति; रिटर्न की गारंटी नहीं.
कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड: डेट के साथ शेयरों में भी निवेश, इसलिए बाजार का जोखिम मौजूद.
टैक्स के मामले में भी दोनों के नियम अलग हैं. FD से मिलने वाला ब्याज आम तौर पर आपकी लागू आयकर दर के अनुसार कर योग्य होता है. वहीं, म्यूचुअल फंड पर टैक्स उसकी श्रेणी, निवेश की तारीख और लागू कर नियमों पर निर्भर करता है. इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर डेट या हाइब्रिड फंड में FD से बेहतर टैक्स लाभ मिलेगा.
निवेश करने से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
1. निवेश की अवधि तय करें: अगर पैसा कुछ महीनों में चाहिए, तो ऐसे विकल्प में निवेश न करें जिसमें लंबी अवधि या ज्यादा उतार-चढ़ाव का जोखिम हो.
2. जोखिम को समझें: कम अवधि वाले डेट फंड में भी नुकसान की संभावना रहती है. केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश का फैसला न करें.
3. टैक्स और निकासी की शर्तें देखें: निवेश से पहले फंड का सूचना दस्तावेज, खर्च का अनुपात, निकासी की शर्तें और लागू टैक्स नियम जरूर समझें.
FD से अलग विकल्प तलाशना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ ज्यादा कमाई की उम्मीद में जोखिम को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं. सही फंड वही है, जो आपकी जरूरत, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल हो.