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बुकिंग के वक्त RAC-43 था टिकट... स्टेशन पहुंचा तो WL-44 में बदला, यात्री ने 14 साल लड़ा केस, अब रेलवे देगा मुआवजा

ट्रेन यात्रा से ठीक पहले रेलवे की वजह से टिकट का स्टेटस बदल जाए और यात्री को इसकी जानकारी समय पर न मिले, तो इसे सेवा में कमी माना जा सकता है. दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक पुराने मामले में रेलवे को यात्री को मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है. यात्री का RAC-43 टिकट यात्रा के दिन WL-44 हो गया था. रेलवे ने बताया कि कोच हटने के कारण ऐसा हुआ. सूचना न मिलने से यात्री को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी.

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यात्री को बिना बताए RAC टिकट को वेटिंग लिस्ट में बदलने पर कंज्यूमर कमीशन ने रेलवे पर जुर्माना लगाया. (File Photo)
यात्री को बिना बताए RAC टिकट को वेटिंग लिस्ट में बदलने पर कंज्यूमर कमीशन ने रेलवे पर जुर्माना लगाया. (File Photo)

ट्रेन में रिजर्वेशन की स्थिति यात्रा से ठीक पहले बदल जाए और रेलवे इसकी जानकारी यात्री को समय पर न दे, तो इसे सेवा में कमी माना जा सकता है. दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने ऐसे ही एक मामले में रेलवे को यात्री को ₹5,000 मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है. मामला एक ऐसे यात्री से जुड़ा है, जिसका टिकट यात्रा के दिन RAC-43 से बदलकर WL-44 हो गया था. रेलवे ने इसकी जानकारी पहले से नहीं दी, जिसके चलते यात्री को अपना पूरा सफर ट्रेन में खड़े होकर करना पड़ा.

रिपोर्ट के मुताबिक, श्री सिंह ने आनंद विहार रेलवे स्टेशन से कटिहार जंक्शन के लिए ₹399 का स्लीपर क्लास टिकट बुक किया था. बुकिंग के वक्त उनके टिकट का स्टेटस RAC-43 था और उन्हें उम्मीद थी कि यात्रा की तारीख 31 अक्टूबर 2012 तक यह कन्फर्म हो जाएगा. लेकिन यात्रा वाले दिन जब वह सुबह करीब 6:30 बजे आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के बाद उनके टिकट की स्थिति RAC-43 से बदलकर WL-44 हो चुकी है. यात्री का आरोप था कि रेलवे ने इस बदलाव की उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी. ऐसे में उनके पास यात्रा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने का समय भी नहीं बचा.

क्यों बदला टिकट का स्टेटस?

श्री सिंह ने रेलवे स्टाफ और ट्रेन के TTE से इस बारे में जानकारी मांगी. उन्हें बताया गया कि ट्रेन से एक कोच हटाया गया है, जिसकी वजह से उनका रिजर्वेशन स्टेटस प्रभावित हुआ. रेलवे की ओर से 15 फरवरी 2013 को दिए गए जवाब में भी कहा गया कि ऑपरेटिंग ब्रांच ने SE-1 कोच हटा दिया था. इसी वजह से श्री सिंह का RAC टिकट WL-44 में बदल गया था. कोई दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्री को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी. इसके बाद उन्होंने रेलवे के खिलाफ सेवा में कमी की शिकायत दर्ज कराई.

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रेलवे को ₹5,000 मुआवजा देने का आदेश

नई दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने 11 मार्च 2020 को इस मामले में रेलवे को यात्री को दर्द और मानसिक परेशानी के लिए ₹5,000 मुआवजा देने का आदेश दिया था. रेलवे ने इस फैसले को दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी. हालांकि, आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा. 27 फरवरी 2026 को जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और बिमला कुमारी की पीठ ने रेलवे की अपील खारिज करते हुए ₹5,000 के मुआवजे के आदेश को कायम रखा.

समय पर सूचना नहीं देना रेलवे की गलती

आयोग के सामने मुख्य सवाल यह नहीं था कि RAC टिकट पर यात्री को कन्फर्म बर्थ मिलना जरूरी है या नहीं. विवाद इस बात पर था कि रेलवे ने ऑपरेशनल वजह से टिकट की स्थिति बदलने के बाद यात्री को इसकी जानकारी समय पर क्यों नहीं दी. आयोग ने माना कि अगर रेलवे ने समय रहते यात्री को सूचना दी होती, तो वह वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था कर सकता था. आयोग ने रेलवे की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि यात्री टिकट का रिफंड ले सकता था या अपनी यात्रा टाल सकता था. आयोग के मुताबिक, जब रेलवे की अपनी ऑपरेशनल वजह से रिजर्वेशन की स्थिति बदली गई, तो यात्री को समय पर इसकी जानकारी देना जरूरी था.

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