शहर में दो कमरे के मकान खरीदने के लिए 40 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक लग जाते हैं. गांव से लेकर शहर तक में दो कमरे का मकान बनवाना भी आसान नहीं है. महंगे ईंट, सरिया, सीमेंट, रेत से लेकर मजदूर-मिस्त्री में लाखों खर्च हो जाते हैं. फिर महज 1.20 लाख रुपये में सरकारी घर कैसे बनकर तैयार हो जाते हैं?
दरअसल, देश में हर गरीब को पक्का मकान देने के उद्देश्य से पीएम आवास योजना (PMAY) की शुरुआत हुई थी. सरकार का दावा है कि करोड़ों परिवार को इस योजना का लाभ मिला है. केंद्र सरकार ने इस योजना के अगले चरण यानी 'पीएम आवास योजना 2.0' को भी रफ्तार दे दी है.
पीएम आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 1,20,000 रुपये मिलते हैं. जबकि शहरी इलाके में 1.50 लाख रुपये मिलते हैं. सरकार की तरफ से मकान का एक न्यूनतम स्टैंडर्ड और नक्शा तय किया गया है.
योजना में केंद्र और राज्य का हिस्सा
यूपी और बिहार जैसे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में नया पक्का मकान बनाने के लिए लाभार्थियों को कुल 1.20 लाख रुपये की राशि दी जाती है. इस फंड में 60% हिस्सा केंद्र सरकार का यानी 72,000 रुपये और 40% हिस्सा 48 हजार रुपये राज्य सरकार का होता है. इसके अलावा मनरेगा के तहत घर बनाने के लिए करीब 15 हजार से 18 हजार रुपये की मजदूरी और स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय के लिए अलग से 12 हजार रुपये दिए जाते हैं. यानी कुल मिलाकर ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को करीब 1.50 लाख रुपये तक का फायदा मिल जाता है.
शहरी क्षेत्रों (PMAY-U) में खुद की जमीन पर मकान बनाने या मरम्मत करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ 1.50 लाख रुपये की राशि तय है. लेकिन यहां असली खेल राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त हिस्से का है. अलग-अलग राज्य अलग-अलग अमाउंट देता है. जिसकी वजह से यूपी के लोगों ज्यादा और बिहार के लोगों को कम मिलता है.
शहरी इलाकों में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने शहरी गरीबों को बड़ी राहत देते हुए राज्य का हिस्सा 1 लाख रुपये तय किया है, जिससे यहां कुल राशि 2.50 लाख रुपये हो जाती है. वहीं बिहार सरकार अपनी तरफ से 50,000 रुपये जोड़ती है, जिससे बिहार के शहरी गरीबों को 2.00 लाख रुपये मिलते हैं. जबकि दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में निजी जमीन पर घर बनाने के लिए अलग से राज्य का कोई बड़ा टॉप-अप शेयर न होने की वजह से केवल केंद्रीय सहायता ही मुख्य आधार बनती है.
मकान का साइज कितना होना जरूरी?
सरकार के नियमों के मुताबिक PMAY-G के तहत बनने वाले मकान का न्यूनतम एरिया 25 वर्ग मीटर (लगभग 269 वर्ग फुट) होना अनिवार्य है. लाभार्थी चाहें तो अपनी जेब से और पैसा लगाकर इससे बड़ा घर बना सकता है. लेकिन 1.20 लाख रुपये की सरकारी सहायता के लिए कम से कम इतना स्पेस होना जरूरी है. सरकारी नियम के मुताबिक पीएम आवास योजना के तहत बनने वाला पक्का मकान हर मौसम को झेल सकता है. पहाड़ी इलाकों में योजना तहत घर बनाने के लिए 1.30 लाख रुपये की राशि मिलती है.
कमरों की संख्या
सरकारी नक्शे और स्टैंडर्ड डिजाइन के अनुसार PM आवास योजना के तहत एक कमरा कम से कम 100 वर्ग फीट का होना चाहिए. नियमों के मुताबिक मकान में स्वच्छ खाना पकाने के लिए एक रसोई होना जरूरी है. यह कमरे से सटा होता है, जो बरामदा भी हो सकता है, जहां खाना पकाया जा सकता है. अधिकतर मॉडल में एक कमरा और एक बरामदा होता है. वहीं लाभार्थी बरामदा के बदले दो छोटे-छोटे कमरे भी बनवा सकते हैं.
पीएम आवास योजना के तहत 25 वर्ग मीटर के मकान के नक्शे में शौचालय शामिल नहीं होता है, स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिलने वाले 12,000 रुपये से शौचालय मुख्य मकान से थोड़ा अलग या बाहर की तरफ बनाया जाता है, ताकि स्वच्छता बनी रहे.