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सभी अड़चनें दूर, NSE के IPO को मिला ग्रीन सिग्नल, जानिए क्या था विवाद?

एनएसई के आईपीओ की राह में अटका बड़ा रेगुलेटरी पेच सुलझता दिख रहा है, क्योंकि सेबी ने ₹714.74 करोड़ नकद आउटफ्लो वाली संशोधित सेटलमेंट शर्तों को सिद्धांततः मान लिया है.

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NSE आईपीओ को मिल गई बड़ी राहत (फाइल फोटो)
NSE आईपीओ को मिल गई बड़ी राहत (फाइल फोटो)

NSE IPO की राह में अटका सबसे बड़ा रेगुलेटरी पेच अब लगभग सुलझता दिख रहा है. SEBI ने 30 जुलाई 2026 को संशोधित सेटलमेंट शर्तों को सिद्धांत रूप से मानने पर सहमति दी है. इसके तहत NSE को कुल 1,491.211 करोड़ रुपये के सेटलमेंट में 714.74 करोड़ रुपये का नकद आउटफ्लो करना होगा.

यही को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले लंबे समय से NSE के IPO में देरी की बड़ी वजह थी. सेटलमेंट के बाद इन रेगुलेटरी मामलों का रास्ता साफ होता दिख रहा है. NSE 1994 में बना था और लिस्टिंग, ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, इंडिसेज और मार्केट डेटा वाला इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम चलाता है.

NSE IPO सेटलमेंट

NSE ने सर्कुलर में कहा, 'SEBI ने 30 जुलाई 2026 की ईमेल के जरिए सेटलमेंट की शर्तों को सिद्धांत रूप से स्वीकार करने पर सहमति दी है. साथ ही 714.74 करोड़ रुपये की मांग की है. NSE की तरफ से पहले जमा 776.47 करोड़ रुपये को 1,491.211 करोड़ रुपये के सेटलमेंट अमाउंट में एडजस्ट किया जाएगा.'

एक्सचेंज ने यह भी कहा, '1,491.211 करोड़ रुपये के सेटलमेंट अमाउंट का वित्तीय असर 31 मार्च 2026 को खत्म वित्त वर्ष में पहले ही दर्ज किया जा चुका है. हालांकि, सेटलमेंट के लिए नकद आउटफ्लो 714.74 करोड़ रुपये होगा. कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज पर इसका कोई और बड़ा नकारात्मक असर नहीं है.'

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NSE ने अपने IPO प्रॉस्पेक्टस में को-लोकेशन मामले के लिए 1,223.6 करोड़ रुपये और डार्क फाइबर मामले के लिए 267.7 करोड़ रुपये की संशोधित सेटलमेंट शर्तें रखी थीं.

जून 2026 तिमाही में NSE का नेट प्रॉफिट 7% बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले यह 2,924 करोड़ रुपये था. ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12% बढ़कर 4,560 करोड़ रुपये पहुंचा, जो पहले 4,032 करोड़ रुपये था. PAT मार्जिन 5.9% पर स्थिर रहा. Q1FY27 में EBITDA 15% बढ़कर 3,594 करोड़ रुपये हुआ, जो FY26 की पहली तिमाही में 3,130 करोड़ रुपये था. ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 79% रहा और सरकारी खजाने में योगदान 20,579 करोड़ रुपये रहा. FIA और WFE के मुताबिक, 2025 में ट्रेडिंग वॉल्यूम के हिसाब से यह दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज था. इक्विटी ट्रेड्स की संख्या में इसका तीसरा स्थान रहा.

NSE IPO की अगली टाइमलाइन?

SEBI के साथ मामलों के सेटलमेंट के बाद मार्केट पार्टिसिपेंट्स को लग रहा है कि NSE IPO के DRHP पर मंजूरी अब दूर नहीं है. कुछ बाजार जानकार मान रहे हैं कि मिड-अगस्त तक ऑब्जर्वेशंस मिल सकते हैं. यह भी माना जा रहा है कि एक्सचेंज सितंबर 2026 तक लिस्टिंग पर नजर रखे हुए है. इंटरनेशनल रोडशो जारी हैं और NSE घरेलू संस्थानों से भी बात कर रहा है. इसका पूरा इश्यू OFS होगा, जिसमें 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर तक शामिल रह सकते हैं. बताया जा रहा है कि इस ऑफर से करीब ₹28,000-30,000 करोड़ जुटाए जा सकते हैं. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO भी हो सकता है.

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अगर आप निवेशक हैं, तो आपके लिए सबसे अहम बात यह है कि NSE IPO अब एक कदम आगे बढ़ा है, लेकिन अंतिम रेगुलेटरी प्रक्रिया अभी बाकी है. अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयर करीब 1,950-2,000 रुपये के आसपास उपलब्ध हैं. मौजूदा वैल्यूएशन पर कंपनी का मार्केट कैप ₹4.85-4.95 लाख करोड़ बैठता है.

बताया जा रहा है कि State Bank of India, Bank of Baroda, GIC RE, LIC और कुछ अन्य निवेशक एक्सचेंज में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं. अब नजर इस पर होगी कि DRHP पर ऑब्जर्वेशंस कब मिलते हैं और सितंबर 2026 की संभावित लिस्टिंग टाइमलाइन कितनी जल्दी साफ होती है. आने वाले हफ्तों में NSE IPO की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.

(इनपुट: बिजनेस टुडे)

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