scorecardresearch
 

ग्राहकों की मौज, कार डीलरों का बिगड़ेगा खेल... कमीशन से कैशलेस क्लेम तक लगेगी चोट

हेल्थ इंश्योरेंस के बाद भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री व्यवस्था पर भी फोकस किया है. नए प्रस्ताव लागू हुए तो ग्राहकों को डीलर से बाहर भी इंश्योरेंस लेने के ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं. नई कार या बाइक खरीदते समय इंश्योरेंस के लिए अक्सर ग्राहक उसी डीलर पर निर्भर हो जाता है, जहां से गाड़ी खरीदी है. ऐसे में पॉलिसी की कीमत और दूसरे विकल्पों की तुलना करना हमेशा आसान नहीं होता.

Advertisement
X
आईआरडीएआई के मोटर इंश्योरेंस रिफॉर्म के नए प्रस्ताव से कार और बाइक मालिकों को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं. (File Photo)
आईआरडीएआई के मोटर इंश्योरेंस रिफॉर्म के नए प्रस्ताव से कार और बाइक मालिकों को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं. (File Photo)

हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर कदम उठाने के बाद भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने अब मोटर व्हीकल इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन व्यवस्था को लेकर भी कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं. जब आप नई गाड़ी खरीदते हैं तो इंश्योरेंस अक्सर उसी डीलर से करा लेते हैं जहां से कार या बाइक खरीदी है.

कई बार ग्राहक के पास अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी और उनकी कीमतों की तुलना करने का ज्यादा मौका नहीं होता. अब IRDAI इस पूरी व्यवस्था को बदलने की तैयारी में है. नियामक के नए प्रस्ताव लागू हुए तो वाहन मालिकों को इंश्योरेंस खरीदते समय ज्यादा विकल्प और कीमतों की ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है.

मोटर इंश्योरेंस पर इतना कमीशन क्यों?

IRDAI ने अपने पब्लिक कंसल्टेशन पेपर 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' में मोटर इंश्योरेंस की बिक्री से जुड़े कमीशन पर चिंता जताई है. IRDAI के मुताबिक मोटर इंश्योरेंस में कमीशन अलग-अलग मामलों में 13% से 50% तक जा सकता है और औसत करीब 24% है. नए और पुराने वाहनों की बिक्री से जुड़े OEM ब्रोकर्स और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स (MISPs) को लेकर भी नियामक ने आंकड़े सामने रखे हैं.

Advertisement

इनके मामले में औसत कमीशन करीब 24% बताया गया है, जो कुछ मामलों में 31% तक पहुंचता है. FY25 में इन चैनलों के जरिए करीब ₹29,000 करोड़ का प्रीमियम जुटाया गया और करीब ₹7,050 करोड़ कमीशन के तौर पर गया. IRDAI का सवाल यह है कि क्या हर तरह के मोटर इंश्योरेंस प्रोडक्ट में इतनी ऊंची कमीशन लागत सही है, खासकर उन पॉलिसियों में जिनका स्वरूप अपेक्षाकृत आसान है.

ग्राहक के लिए क्या बदलाव हो सकता है?

IRDAI के प्रस्ताव का एक बड़ा फोकस ग्राहक को एक ही जगह पर निर्भर रहने के बजाय ज्यादा विकल्प देने पर है. बीमा नियामक ने नए और पुराने वाहनों के इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स को मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन (MII) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है. इसमें Bima Sugam जैसे प्लेटफॉर्म की भूमिका हो सकती है.

ऐसे प्लेटफॉर्म का मकसद ग्राहक को अलग-अलग विकल्पों तक सीधे पहुंच देना है. यानी अगर ग्राहक डीलर के जरिए इंश्योरेंस नहीं लेना चाहता, तो उसके पास दूसरे रास्ते भी उपलब्ध हो सकते हैं. IRDAI ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि इन नॉट-फॉर-प्रॉफिट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागत वसूलने के लिए प्रीमियम का 5% से ज्यादा शुल्क नहीं लिया जाए.

डीलर को दिखाना होगा दूसरा विकल्प

अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो वाहन डीलरों की भूमिका में भी बदलाव आ सकता है. डीलरों को MII प्लेटफॉर्म का विकल्प और QR कोड साफ तौर पर दिखाना होगा. इसका मकसद यह है कि ग्राहक को यह पता रहे कि वह डीलर के अलावा किसी दूसरे माध्यम से भी इंश्योरेंस खरीद सकता है. यानी नई कार या बाइक खरीदते समय ग्राहक को सिर्फ वही इंश्योरेंस लेने तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा जो डीलर सामने रखता है. वह उपलब्ध दूसरे विकल्पों की जानकारी लेकर फैसला कर सकेगा.

Advertisement

लोन के साथ इंश्योरेंस लेने पर भी नजर

IRDAI ने व्हीकल लोन देने वाले बैंकों और NBFCs के साथ इंश्योरेंस की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं. नियामक के मुताबिक लोन और इंश्योरेंस की बंडलिंग से जुड़े मामलों में करीब 16% कमीशन देखा गया है. यहां ग्राहक के लिए अहम बात यह है कि लोन लेते समय उसे यह साफ जानकारी मिलनी चाहिए कि इंश्योरेंस कहां से और किस कीमत पर लिया जा रहा है. प्रस्तावित बदलावों का मकसद ऐसी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है.

पुरानी गाड़ी के इंश्योरेंस पर भी सवाल

IRDAI ने सिर्फ नई गाड़ियों की बिक्री पर ही ध्यान नहीं दिया है. पुरानी गाड़ियों के इंश्योरेंस में भी कमीशन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं. बीमा नियामक के मुताबिक कई डीलरों के पास अपनी सर्विस और रिपेयर सुविधाएं होती हैं. इसके बावजूद पुराने वाहनों के इंश्योरेंस पर MISPs को औसतन करीब 12% कमीशन मिलता है. ऐसे मामलों में भी कमीशन और वास्तविक सेवा के बीच संतुलन पर विचार करने की जरूरत बताई गई है.

कैशलेस रिपेयर नहीं रोक सकेगा डीलर

ग्राहकों के लिए प्रस्ताव का एक और अहम हिस्सा कैशलेस रिपेयर से जुड़ा है. IRDAI ने प्रस्ताव दिया है कि कोई डीलर सिर्फ इस वजह से कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं कर सकेगा कि ग्राहक ने मोटर इंश्योरेंस उसी डीलर से नहीं खरीदा है. यानी अगर ग्राहक ने किसी दूसरे इंश्योरर से पॉलिसी ली है और पॉलिसी के तहत कैशलेस रिपेयर की सुविधा उपलब्ध है, तो सिर्फ पॉलिसी बेचने वाले डीलर के अलग होने के आधार पर सुविधा से इनकार नहीं किया जा सकेगा.

Advertisement

डीलरों को इंसेंटिव पर रोक का प्रस्ताव

IRDAI ने ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEMs) और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटीटीज (IDEs) के बीच ऐसे समझौतों पर भी चिंता जताई है जो पॉलिसी बेचने के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव या फायदे देते हैं. प्रस्ताव में ऐसे सर्विस-लेवल एग्रीमेंट और इंसेंटिव प्लान पर रोक लगाने की बात है जो पॉलिसीधारक होल्डर के खिलाफ जा सकते हैं. बीमा नियामक का तर्क है कि ऐसे इंतजाम ग्राहक के लिए उपलब्ध विकल्पों और कीमतों की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकते हैं.

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पर कमीशन घटाने का प्रस्ताव

मोटर इंश्योरेंस में थर्ड-पार्टी कवर जरूरी होता है. IRDAI ने अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और आसान मोटर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के लिए बहुत कम कमीशन रखने का प्रस्ताव दिया है. यानी जिस पॉलिसी को बेचने में बहुत ज्यादा सलाह या सेवा की जरूरत नहीं होती, वहां भी ऊंची कमीशन लागत को लेकर नियामक पुनर्विचार करना चाहता है. प्रस्तावित कमीशन व्यवस्था प्रोडक्ट, वितरण माध्यम और उसे बेचने-सेवा देने में लगने वाली मेहनत जैसे कारकों को ध्यान में रखेगी.

ग्राहक के लिए क्या बदल सकता है?

अगर ये प्रस्ताव अंतिम नियमों का हिस्सा बनते हैं तो मोटर इंश्योरेंस खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कुछ अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं...

  • डीलर के अलावा इंश्योरेंस खरीदने के ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं.
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसी की जानकारी और तुलना आसान हो सकती है.
  • कमीशन व्यवस्था में ज्यादा पारदर्शिता आ सकती है.
  • लोन के साथ इंश्योरेंस की बंडलिंग में ग्राहक को ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सकती है.
  • दूसरी जगह से पॉलिसी लेने पर सिर्फ इसी वजह से कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं किया जा सकेगा.
  • डीलर को डिजिटल प्लेटफॉर्म और दूसरे विकल्पों की जानकारी ग्राहक को देनी पड़ सकती है.

अभी लागू नहीं हुए हैं ये नियम

Advertisement

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि IRDAI ने अभी अंतिम नियम जारी नहीं किए हैं. 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर है, जिस पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं. कंसल्टेशन प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2026 तक खुली है. इसके बाद सुझावों और आपत्तियों पर विचार करके आगे की प्रक्रिया तय होगी. इसलिए फिलहाल मोटर इंश्योरेंस की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता.

फिर भी इस प्रस्ताव का ग्राहक के लिए सीधा मतलब समझें तो IRDAI इंश्योरेंस खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और विकल्पों से भरपूर बनाने की दिशा में काम कर रहा है. हेल्थ इंश्योरेंस के बाद अब मोटर इंश्योरेंस के डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन फ्रेमवर्क पर फोकस से आने वाले समय में गाड़ी मालिकों के लिए इंश्योरेंस खरीदने का तरीका बदल सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement