कभी अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो लोग बैंक या फाइनेंस कंपनी के पास सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले लेते हैं. शुरुआत में यह आसान विकल्प लगता है, लेकिन अगर किसी महीने की EMI चूक जाए, तो चिंता होने लगती है कि कहीं बैंक गहने नीलाम न कर दे. अच्छी बात यह है कि एक EMI छूटते ही आपके गिरवी रखे गहने अपने आप नीलाम नहीं हो जाते. लेकिन बकाया बढ़ने पर मामला गंभीर हो सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भुगतान में देरी होने पर क्या होता है, नीलामी से पहले कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है और गहने वापस पाने के लिए आप क्या कर सकते हैं.
कितनी EMI चूकने पर गोल्ड होगा नीलाम?
इसका कोई एक जवाब नहीं है कि दो, तीन या छह EMI छूटते ही सोना नीलाम हो जाएगा. यह आपके लोन एग्रीमेंट, भुगतान की शर्तों, बकाया की स्थिति और कर्जदाता पर लागू नियमों पर निर्भर करता है. गोल्ड लोन में रिस्क समझने के लिए भुगतान की समयसीमा और बैंक पॉलिसी को देखना जरूरी है. केवल EMI डिफॉल्ट की संख्या से नीलामी का समय तय नहीं होता. इसलिए अगर आपके गोल्ड लोन की एक या दो EMI छूट गई हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें. जितनी जल्दी बकाया चुकाने या भुगतान की व्यवस्था करने के लिए कर्जदाता से संपर्क करेंगे, उतना बेहतर होगा.
EMI चूकने के बाद क्या-क्या हो सकता है?
शुरुआती 1 से 30 दिन तक ईएमआई भुगतान में देरी होने पर कर्जदाता की ओर से की जाने वाली कार्रवाई अलग-अलग हो सकती है. बैंक या फाइनेंस कंपनी फोन, एसएमएस या ऐप के जरिये भुगतान की याद दिला सकती है. लोन एग्रीमेंट के मुताबिक लेट चार्ज या दूसरे अन्य चार्ज लग सकते हैं. इस दौरान बकाया राशि और भुगतान की तारीख स्पष्ट कर लेना चाहिए.
करीब 30 से 90 दिन ईएमआई बकाया रहने पर रिमाइंडर या लिखित सूचना मिल सकती है. कर्जदाता भुगतान की मांग करने या लोन से जुड़ी आगे की कार्रवाई के लिए नोटिस भेज सकता है. अगर पूरी रकम एक साथ चुकाना मुश्किल है, तो कर्जदाता से लिखित में भुगतान के विकल्प पूछें.
90 दिन या उससे अधिक ईएमआई बकाया लागू नियमों के तहत आपका लोन अकाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित हो जाता है. कर्जदाता वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है. गिरवी रखे सोने की नीलामी का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन नीलामी की प्रक्रिया और समयसीमा संबंधित नियमों तथा लोन एग्रीमेंट के मुताबिक होगी. ध्यान रखें कि NPA बनना और सोने की नीलामी होना दो अलग बातें हैं. सिर्फ 90 दिन पूरे होने से गहने अपने आप नहीं बिक जाते.
बैंक बताए बिना नहीं कर सकता नीलामी
गोल्ड लोन में नीलामी कर्जदाता की मनमर्जी से नहीं होनी चाहिए. उसे लागू नियमों, अपने स्वीकृत नियमों और लोन एग्रीमेंट में तय प्रक्रिया का पालन करना होता है. नीलामी से पहले नोटिस और जरूरी सूचना देने की शर्तें लागू हो सकती हैं. नीलामी की प्रक्रिया में नोटिस और सार्वजनिक जानकारी महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, नोटिस की अवधि और अन्य शर्तों को लेकर किसी एक समयसीमा को सभी बैंकों और फाइनेंस कंपनियों पर लागू मानना सही नहीं होगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गोल्ड और सिल्वर कोलैटरल संबंधी निर्देशों की लागू स्थिति और कर्जदाता की आधिकारिक शर्तें जरूर जांचें. अगर आपको नीलामी का नोटिस मिला है, तो उसमें दी गई तारीख, बकाया रकम, भुगतान का तरीका और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया ध्यान से पढ़ें. किसी जानकारी में गड़बड़ी लगे, तो कर्जदाता से लिखित स्पष्टीकरण मांगें.
नीलामी से पहले गहने छुड़ाने का मौका
अगर गिरवी रखा सोना अभी नीलाम नहीं हुआ है, तो कर्जदाता से संपर्क करके बकाया चुकाने और गहने छुड़ाने की प्रक्रिया पूछें. भुगतान की पूरी रकम में मूलधन के अलावा ब्याज और लागू शुल्क भी शामिल हो सकते हैं. किसी महीने की EMI चूकने के बाद अगली EMI समय पर चुकाने से पुराना बकाया अपने आप खत्म नहीं होता. उदाहरण के लिए, अगर जून की EMI नहीं भरी और जुलाई-अगस्त की EMI समय पर दे दी, तो भी जून का बकाया बाकी रह सकता है.
इसलिए केवल अगली EMI भरकर यह न मानें कि आपका खाता नियमित हो गया है. कर्जदाता से कुल बकाया और उसे नियमित करने के लिए जरूरी भुगतान की लिखित जानकारी लें. नीलामी पूरी होने के बाद गहने वापस पाने की स्थिति बदल सकती है. इसलिए अगर नीलामी का नोटिस मिल चुका है, तो तुरंत कर्जदाता से संपर्क करना जरूरी है.
सोना बकाया रकम से ज्यादा में नीलाम तो?
मान लीजिए, आपके गिरवी रखे सोने का मूल्य 3 लाख रुपये आंका गया है और लोन का बकाया 2.2 लाख रुपये है. अगर लागू नियमों और मूल्यांकन के अनुसार नीलामी 2.7 लाख रुपये में होती है, तो बिक्री की रकम में से बकाया कर्ज और लागू शुल्क काटने के बाद करीब 50,000 रुपये बचेंगे. ऐसी स्थिति में अतिरिक्त रकम कर्जदाता को अपने पास रखने के बजाय लागू नियमों के मुताबिक आपको लौटानी होती है. वास्तविक हिसाब नीलामी की कीमत, उस समय के बकाया, ब्याज और वैध शुल्क पर निर्भर करेगा. ध्यान रहे, यह केवल समझाने के लिए उदाहरण है. आपके सोने का मूल्य, नीलामी की न्यूनतम कीमत और अंतिम भुगतान अलग हो सकता है.
गोल्ड लोन लेने वालों को क्या करना चाहिए?
अगर आपने सोना गिरवी रखकर लोन लिया है, तो सिर्फ मौजूदा EMI नहीं, पिछली छूटी हुई किस्तों का हिसाब भी देखें. भुगतान में दिक्कत है, तो समय रहते बैंक या फाइनेंस कंपनी को बताएं. कुल बकाया, ब्याज, शुल्क और भुगतान की अंतिम तारीख स्पष्ट कराएं. नोटिस मिलने पर उसमें दी गई समयसीमा और भुगतान के विकल्प तुरंत जांचें. रसीद, एसएमएस, ईमेल और कर्जदाता के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड रखें. बैंक या वित्तीय संस्था से समाधान न मिले, तो पहले उसकी शिकायत निवारण व्यवस्था अपनाएं. इसके बाद पात्रता और लागू प्रक्रिया के अनुसार RBI के शिकायत माध्यमों की मदद ली जा सकती है.