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Gen Z Credit Card: कर्ज़ सहारे Gen Z? खुलकर कर रहा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल, सामने आई रिपोर्ट

भारत में जेन जी के बीच क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ट्रांसयूनियन सिबिल की स्टडी के मुताबिक, कई युवा पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने से पहले ही दूसरे लोन ले चुके होते हैं. वहीं, कार्ड लेने के कुछ महीनों में ही कई युवाओं पर 25 हजार रुपये से ज्यादा का बकाया हो जाता है. ऐसे में सवाल है कि युवा क्रेडिट का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं और कर्ज लेते वक्त किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

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क्या क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं जेन जी?
क्या क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं जेन जी?

आज की डेट में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रह गए हैं. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कम उम्र वाले लोगों की मार्केट में एंट्री हो गई हैं. और अब जेन जी भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. ट्रांस यूनियन सिबिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले लोगों में से 50% की उम्र 30 साल या उससे कम थी. वहीं, इनमें से 46% लोग छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आते हैं.

एक दशक में कितना बढ़ा क्रेडिट कार्ड का मार्केट

भारत में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों की संख्या पिछले 10 साल में काफी बढ़ी है. मार्च 2016 में देश में करीब 1.4 करोड़ क्रेडिट कार्ड होल्डर्स थे. मार्च 2026 तक ये संख्या बढ़कर 5.2 करोड़ हो गई. इस दौरान क्रेडिट कार्ड पर बकाया रकम भी तेजी से बढ़ी है. मार्च 2016 में यह करीब 40 हजार करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गई. वहीं, एक्टिव क्रेडिट कार्ड की संख्या भी 2.1 करोड़ से बढ़कर 10.7 करोड़ हो गई.

स्टडी में यह भी सामने आया कि मार्च 2026 तक भारत में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले लोगों में से सिर्फ 25% लोगों के पास क्रेडिट कार्ड था. ये आंकड़ा ब्रिटेन के 70%, कोलंबिया के 62% और हांगकांग के 98% से काफी कम था. इससे पता चलता है कि भारत में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है.

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स्टडी में सामने आया कि भारत के कई युवा क्रेडिट कार्ड लेने से पहले ही दूसरे तरह के लोन ले चुके होते हैं.

2024 में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले 24 से 30 साल के जेन जी लोगों में से 31% के पास पहले से ही कम से कम दो क्रेडिट अकाउंट थे. वहीं, सिर्फ 30% युवाओं ने इससे पहले किसी तरह का क्रेडिट नहीं लिया था. इसकी तुलना में, 2018 में इसी उम्र के मिलेनियल्स में 56% ऐसे थे, जिन्होंने पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने से पहले कोई क्रेडिट नहीं लिया था.

स्टडी के मुताबिक, पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले इन जेन जी युवाओं में से 18% के पास पहले से ही कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन था. वहीं, 23% युवा पहले ही छोटी रकम का पर्सनल लोन ले चुके थे.

इससे पता चलता है कि अब क्रेडिट कार्ड कई युवाओं के लिए कर्ज लेने की शुरुआत नहीं, बल्कि पहले से लिए गए लोन के साथ जुड़ने वाला एक और ऑप्शन बनता जा रहा है.

जेन जी युवा तेजी से ले रहे हैं कर्ज

स्टडी के मुताबिक, पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने के बाद जेन जी युवा ज्यादा खर्च कर रहे हैं और तेजी से कर्ज भी ले रहे हैं.

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पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले जेन जी युवाओं में से करीब 28% के कार्ड पर पहले तीन महीनों में ही 25 हजार रुपये से ज्यादा का बकाया हो गया था. वहीं, 2018 में इसी उम्र में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले मिलेनियल्स में यह आंकड़ा करीब 20% था.

क्रेडिट कार्ड लेने के बाद भी जेन जी युवाओं ने दूसरे तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया. स्टडी में पाया गया कि करीब 69% जेन जी युवाओं ने पहला क्रेडिट कार्ड लेने के 12 महीनों के अंदर ही कोई दूसरा क्रेडिट प्रोडक्ट भी ले लिया था. वहीं, मिलेनियल्स में ये आंकड़ा 55% था.

दूसरा क्रेडिट प्रोडक्ट लेने वाले जेन जी युवाओं में से 39% ने उसी बैंक या लेंडर से इसे लिया, जिसने उन्हें पहला क्रेडिट कार्ड दिया था. वहीं, मिलेनियल्स में ये आंकड़ा 33% था.

अब कई तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं लोग

स्टडी के मुताबिक, अब लोगों के कुल कर्ज में क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम हो रही है. इसकी वजह है कि लोग अब कर्ज लेने के लिए सिर्फ क्रेडिट कार्ड पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि कई तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.

मार्च 2016 में खर्च के लिए लिए गए कुल क्रेडिट अकाउंट्स में एक्टिव क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी 56% थी. मार्च 2026 तक ये घटकर 38% रह गई. इसी तरह, खर्च के लिए लिए गए कुल कर्ज में क्रेडिट कार्ड पर बकाया रकम की हिस्सेदारी भी 36% से घटकर 26% हो गई.

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वहीं, ऐसे लोगों की संख्या भी कम हुई है, जो कर्ज लेने के लिए सिर्फ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. मार्च 2016 में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 50% थी, जो मार्च 2026 में घटकर 33% रह गई. दूसरी ओर, ऐसे लोगों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जिनके पास क्रेडिट कार्ड के अलावा खर्च के लिए दूसरे तरह के लोन भी हैं. इनकी संख्या 16% से बढ़कर 32% हो गई.

स्टडी में ये भी सामने आया कि अब तीन या उससे ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है. पिछले 10 साल में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 12% से बढ़कर 22% हो गई है.

ट्रांसयूनियन सिबिल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ भावेश जैन ने कहा कि अब क्रेडिट कार्ड के साथ लोग छोटी रकम के पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और कम टाइम के लिए मिलने वाले दूसरे तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे क्रेडिट मार्केट में बदलाव आ रहा है.

उन्होंने कहा कि लोगों को उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता, आर्थिक स्थिति और पहले से मौजूद खर्चों को ध्यान में रखकर ही क्रेडिट देना चाहिए.

जिम्मेदारी से कर्ज लेना क्यों जरूरी है?

कम उम्र के लोगों और छोटे शहरों के ग्राहकों के क्रेडिट मार्केट से जुड़ने से बैंकों और लेंडर्स के लिए नए कस्टमर्स बढ़ रहे हैं. लेकिन एक साथ कई तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने से लोगों के लिए अपने कुल कर्ज का हिसाब रखना भी जरूरी हो गया है.

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क्रेडिट कार्ड का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में हेल्प मिल सकती है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति क्रेडिट कार्ड का बड़ा बिल नहीं चुकाता या अपनी कमाई और खर्च का हिसाब लगाए बिना कई लोन ले लेता है, तो इससे घर का बजट बिगड़ सकता है.

लेंडर्स के लिए चुनौती ये है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक क्रेडिट की सुविधा पहुंचाई जाए और साथ ही कर्ज चुकाने की क्षमता का भी ध्यान रखा जाए. भावेश जैन ने कहा कि कस्टमर्स की जरूरतें टाइम के साथ बदलती हैं. ऐसे में जरूरी है कि लेंडर्स उनका भरोसा बनाए रखें और उन्हें कर्ज लेने से लेकर चुकाने तक, हर कदम पर जिम्मेदारी से पैसे इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करें.

जैसे-जैसे ज्यादा युवा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल शुरू कर रहे हैं, वैसे-वैसे इस मार्केट की आगे की ग्रोथ सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि कितने लोगों के पास क्रेडिट कार्ड है, बल्कि इस पर भी निर्भर करेगी कि लोग उसका इस्तेमाल कितनी समझदारी से करते हैं.

(रिपोर्ट: जैस्मीन आनंद)

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