मुंबई के वर्ली, बांद्रा, पवई और लोअर परेल जैसे पॉश इलाकों में ₹4 करोड़ से अधिक खर्च करके सी-फेसिंग अपार्टमेंट खरीदने के बाद भी आप अपनी बालकनी में कपड़े या तौलिया सुखाने के लिए स्वतंत्र नहीं हो सकते हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आजकल कई प्रीमियम हाउसिंग सोसायटियां इमारत की खूबसूरती बनाए रखने, उसकी प्रीमियम विजुअल अपील को संजोने और प्रॉपर्टी की रिसेल वैल्यू सुरक्षित रखने के तर्क के साथ बालकनी या खिड़की के बाहर कपड़े सुखाने पर सख्त पाबंदी लगा रही हैं.
हालांकि यह पाबंदी यह बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या कोई सोसायटी किसी व्यक्ति को उसकी निजी बालकनी के इस्तेमाल से रोक सकती है? इस विवाद के कानूनी पहलुओं की बात करें तो मुंबई में बीएमसी का ऐसा कोई सामान्य कानून नहीं है, जो बालकनी में कपड़े सुखाने पर रोक लगाता हो, लेकिन नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपकी इमारत किस श्रेणी में आती है.
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क्या है नियम
जबकि महाराष्ट्र अपार्टमेंट ओनरशिप रूल्स, 1972 के नियम 44 के तहत कंडोमिनियम के निवासियों को खिड़कियों, बालकनियों या इमारत के बाहरी हिस्से से कपड़े, कालीन या इसी तरह की चीजें लटकाने की मनाही है, लेकिन महाराष्ट्र की हर हाउसिंग सोसायटी पर ऐसा कोई सामान्य कानून लागू नहीं होता है.
कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियां 'महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट, 1960' और '1961 के नियमों' के तहत संचालित होती हैं, जहां सोसायटी के अपने रजिस्टर्ड बाय-लॉज और हाउस रूल्स तय करते हैं कि यह पाबंदी लागू होगी या नहीं. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी स्थिति व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकारों और पूरी कम्युनिटी के सामूहिक हितों के बीच संतुलन से जुड़ी है.
सोसायटियां इस तरह के प्रतिबंध मुख्यतः इमारत के बाहरी स्वरूप को एक समान और सुंदर बनाए रखने, नीचे के फ्लैटों पर पानी टपकने की समस्या को रोकने और हवा में कपड़े या स्टैंड गिरने के सुरक्षा जोखिमों को टालने के लिए लगाती हैं. ऐसे सोसायटियों में निवासियों को बालकनी के बजाय यूटिलिटी एरिया, सोसायटी द्वारा निर्धारित सुखाने के स्थानों, सीलिंग-माउंटेड हैंगर्स, इंडोर स्टैंड्स या इलेक्ट्रॉनिक क्लॉथ ड्रायर के इस्तेमाल का सुझाव दिया जाता है.
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