JLL की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रॉपर्टी बाजार में अब कामकाज पहले से ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद हो रहा है. साथ ही, AI और डेटा सेंटर में भी काफी तेजी से निवेश बढ़ रहा है. इन सकारात्मक बदलावों की वजह से दुनिया भर के बड़े निवेशक भारत के प्रॉपर्टी बाज़ार में पैसा लगाने के लिए आकर्षित हो सकते हैं. हालांकि, इस शानदार मौके का पूरा फायदा उठाने के लिए भारत को अभी भी प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों को आसान बनाने, खरीद-बिक्री में नई तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल करने और संपत्तियों की सही व पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने जैसे अहम सुधार करने की जरूरत है.
JLL के 2026 ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स (GRETI) से संकेत मिलता है कि 88 देशों और क्षेत्रों के दो-तिहाई ट्रैक किए गए बाजारों की पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अग्रणी और कम पारदर्शी बाजारों के बीच पारदर्शिता की खाई चौड़ी हो रही है.
2026 के GRETI सर्वेक्षण में, एशिया-प्रशांत क्षेत्र ने रियल एस्टेट पारदर्शिता में वैश्विक सुधारों का नेतृत्व किया, जहां शीर्ष 10 सबसे अधिक सुधार वाले बाजारों में से आधे इसी क्षेत्र से हैं. इस सूची में भारत शीर्ष पर रहा, जिसके बाद वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड का स्थान है.
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रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक सुधार का नेतृत्व कर रहा है, जो GRETI सर्वेक्षणों में 10 वर्षों में चौथा और 20 वर्षों में तीसरा सबसे अधिक सुधार वाला बाजार बनकर निरंतर वृद्धि दिखा रहा है."
पारदर्शिता में इस वृद्धि के साथ-साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सीमा-पार (क्रॉस-बॉर्डर) निवेश में भी तेज उछाल आया है, जिसमें भारत और वियतनाम ने अब तक का अपना सबसे अधिक लेनदेन वॉल्यूम दर्ज किया है, इसके अलावा, भारत ने क्रॉस-बॉर्डर निवेश में 8.1 अरब अमेरिकी डॉलर आकर्षित किए, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक है.
JLL का कहना है कि भारत इस समय एक बहुत ही अहम मोड़ पर है, पिछले दो सालों में एशिया-प्रशांत में सबसे ज्यादा सुधार करने और दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल होने के बावजूद, भारत को अभी भी कई चीजों में सुधार करना है. रिपोर्ट के मुताबिक, AI और डेटा सेंटर का बढ़ता चलन भारत के प्रॉपर्टी बाज़ार के लिए सिर्फ एक अच्छा मौका नहीं है, बल्कि यह वह इंजन है जो दुनिया भर के बड़े निवेशकों को यहां ला सकता है. बस शर्त यह है कि भारत अपने नियमों और सिस्टम को भी इन नए मौकों के हिसाब से उतनी ही तेजी से मजबूत करे.
JLL के अनुसार, बिखरे हुए निजी भूमि पार्सल को एक साथ मिलाने के उद्देश्य से बनाए गए भारत के 'लैंड पूलिंग' तंत्र अभी भी शुरुआती चरण में हैं, जबकि शहर-स्तरीय मास्टर प्लान बड़े पैमाने पर लागू होने के बजाय अभी भी प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.
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रिपोर्ट में कहा गया है, योजनाओं को देश भर में समान रूप से लागू करने और मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए, पायलट शहरों से आगे बढ़कर GIS-आधारित डिजिटलीकरण और ड्रोन मैपिंग को बड़े पैमाने पर विस्तारित करने की आवश्यकता है. इसके अलावा, बिल्डिंग परफॉरमेंस मानकों के विनियमन और रिपोर्टिंग, संपत्ति-स्तर की ऊर्जा खपत को सार्वजनिक करने, जलवायु जोखिम रिपोर्टिंग और लचीलापन मजबूत करने की योजना में असंगतियां बनी हुई हैं.
तकनीक के संदर्भ में, संपत्ति अधिग्रहण और बिक्री प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी को अपनाना अधिक उन्नत बाजारों की तुलना में अभी भी पीछे है, जबकि प्रॉपटेक (proptech) के साथ सरकारी जुड़ाव भी असमान है. भारत के छोटे शहरों में डेटा की उपलब्धता और गहराई में भी काफी भिन्नता है, जिससे ऐसी कमियां पैदा होती हैं जिन्हें बेहतर संसाधनों वाले बाजारों ने अधिक व्यापक रूप से हल कर लिया है.
प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में डिजिटल रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल अभी भी सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित है और छोटे शहरों तक नहीं पहुंच पाया है. साथ ही, किराएदारों को मकान मालिकों के खातों की जांच करने का जो अधिकार मिलता है, उसमें सुधार जरूर हुआ है, लेकिन विकसित देशों के मुकाबले हम अभी भी काफी पीछे हैं.