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होम लोन की किस्त नहीं दी तो क्या बैंक छीन सकता है आपका घर? जानिए पूरा नियम

होम लोन की एक-दो EMI मिस होने से तुरंत घर नहीं चला जाता, लेकिन लगातार भुगतान न करने पर मामला गंभीर हो सकता है. 90 दिनों से ज्यादा बकाया रहने पर लोन NPA हो सकता है.

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लगातार EMI नहीं भरी तो बैंक क्या करेगा (Photo-ITG)
लगातार EMI नहीं भरी तो बैंक क्या करेगा (Photo-ITG)

अपना घर खरीदने का सपना पूरा करने के लिए लोग होम लोन लेते हैं और कई साल तक EMI चुकाते हैं, लेकिन अगर किसी वजह से आमदनी कम हो जाए या आर्थिक परेशानी बढ़ जाए और होम लोन की EMI चुकाना मुश्किल हो जाए, तो सवाल उठता है कि बैंक आगे क्या कार्रवाई कर सकता है? क्या एक-दो EMI मिस होते ही घर हाथ से निकल जाता है?

अगर किसी महीने की EMI तय तारीख तक नहीं चुकाई जाती है तो वह रकम बैंक के लिए 'ओवरड्यू' हो जाती है. RBI के नियमों के मुताबिक, टर्म लोन में ब्याज या मूलधन की किस्त 90 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया रहने पर खाते को NPA (Non-Performing Asset) माना जा सकता है.

इससे पहले बैंक ग्राहक से भुगतान करने के लिए संपर्क कर सकता है और बकाया रकम पर लागू नियमों के अनुसार शुल्क भी लग सकता है,  डिफॉल्ट पर लगाए जाने वाले पेनल चार्ज उचित होने चाहिए और उन पर आगे अतिरिक्त ब्याज नहीं लगाया जा सकता.

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CIBIL स्कोर पर भी पड़ सकता है असर

EMI का भुगतान समय पर नहीं करने से क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित होती है. ट्रांसयूनियन CIBIL के मुताबिक, देर से भुगतान या EMI में डिफॉल्ट का CIBIL स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसका असर भविष्य में नया लोन या क्रेडिट लेने की क्षमता पर पड़ सकता है. इसलिए आर्थिक परेशानी आने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय बैंक से जल्दी बात करना ज्यादा जरूरी है.

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अगर टर्म लोन की किस्त या ब्याज 90 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया रहता है, तो लोन अकाउंट NPA बन सकता है. इसके बाद बैंक बकाया वसूलने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है. होम लोन में घर आमतौर पर बैंक के पास गिरवी रहता है. इसलिए बैंक को कुछ परिस्थितियों में सिक्योर्ड एसेट पर कार्रवाई करने का अधिकार होता है.

क्या बैंक सीधे घर की नीलामी कर सकता है?

नहीं, NPA बनने का मतलब यह नहीं है कि बैंक अगले ही दिन घर बेच सकता है. SARFAESI Act के तहत प्रक्रिया के अलग-अलग चरण होते हैं. SARFAESI Act की धारा 13(2) के अनुसार, NPA खाते के मामले में सिक्योर्ड क्रेडिटर बकाया रकम चुकाने के लिए 60 दिन का लिखित नोटिस दे सकता है. अगर इस अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो कानून के तहत बैंक आगे की कार्रवाई कर सकता है.

यानी घर की नीलामी से पहले भी कर्जदार को बकाया चुकाने का अवसर दिया जाता है. अगर 60 दिन के नोटिस के बाद भी बकाया रकम का समाधान नहीं होता, तो कानून के तहत बैंक गिरवी रखी संपत्ति पर कब्जा लेने और उसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है. इसके बाद प्रॉपर्टी की बिक्री से प्राप्त रकम का इस्तेमाल बकाया कर्ज और संबंधित खर्चों की वसूली के लिए किया जाता है.

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ध्यान देने वाली बात यह है कि नीलामी का मतलब यह नहीं कि बैंक मनमाने तरीके से किसी भी कीमत पर घर बेच सकता है. संपत्ति की बिक्री भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है.

अगर घर नीलाम होने के बाद ज्यादा पैसा मिले तो?

अगर प्रॉपर्टी बेचने से बैंक के बकाये और बिक्री से जुड़े खर्चों को पूरा करने के बाद अतिरिक्त रकम बचती है, तो कानून के अनुसार उस अतिरिक्त रकम के भुगतान का प्रावधान है. दूसरी तरफ, अगर बिक्री से मिलने वाली रकम बैंक की पूरी देनदारी को पूरा नहीं करती, तो बाकी बकाया की वसूली का सवाल भी उठ सकता है, ऐसे मामले में लोन एग्रीमेंट और लागू कानून के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है.

क्या रिकवरी एजेंट घर आकर धमका सकते हैं?

बैंक या उसके रिकवरी एजेंट बकाया रकम की वसूली के लिए संपर्क कर सकते हैं, लेकिन RBI ने वसूली के दौरान धमकी या उत्पीड़न पर रोक लगाई है. नियमों के मुताबिक रिकवरी एजेंटों को ग्राहक के साथ उचित और संवेदनशील तरीके से व्यवहार करना चाहिए. बैंक या उसके एजेंट मौखिक या शारीरिक धमकी, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या परिवार की निजता में अनुचित दखल जैसे तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

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EMI भरना मुश्किल हो तो क्या करें?

सबसे जरूरी बात है कि बैंक से संपर्क करने में देरी न करें, अगर आपको लग रहा है कि आने वाले महीनों में EMI देना मुश्किल होगा, तो बैंक को अपनी स्थिति बताएं और उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें, कुछ मामलों में लोन की शर्तों में बदलाव, भुगतान की अवधि बढ़ाने या दूसरे समाधान पर बैंक से चर्चा की जा सकती है. हालांकि, इनमें से कोई विकल्प हर ग्राहक को अपने आप नहीं मिलता. यह बैंक की नीति, लोन की स्थिति और ग्राहक की परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

अगर आप भुगतान करने की स्थिति में हैं, तो बकाया EMI को जल्द से जल्द नियमित करना क्रेडिट रिकॉर्ड और आगे की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

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