राजस्थान की स्थानीय सियासत में अब दूसरी कमान का फैसला होना है. शहरों में सरकार बनाने का पहला दौर पूरा हो चुका है. मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियां तय हो गई हैं. अब डिप्टी मेयर, उपसभापति और उपाध्यक्ष के लिए जोड़-तोड़ तेज है. प्रदेश के 301 निकायों में मंगलवार को दोपहर 2 बजे से मतदान शुरू होगा, जो शाम 5 बजे तक चलेगा. इसके बाद वोटों की गिनती होगी. देर शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी कि किस निकाय में दूसरी अहम कुर्सी किसके पास जाती है.
यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि सोमवार के नतीजों में कई जगह पार्षदों की संख्या से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखी. अजमेर में कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे, जबकि बीजेपी के पास 32. फिर भी बीजेपी की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं. पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद थे, बीजेपी के 21, लेकिन मेयर की कुर्सी बीजेपी के खाते में गई. ऐसे नतीजों के बाद मंगलवार को होने वाली वोटिंग में क्रॉस वोटिंग पर सबकी नजर है.
सुबह 11 बजे तक नामांकन दाखिल किए गए. 11:30 बजे नामांकन पत्रों की जांच हुई. दोपहर 2 बजे तक नाम वापस लेने का समय था. इसके बाद मतदान शुरू होगा. जिन जगहों पर मुकाबला करीबी है, वहां एक-एक पार्षद का वोट नतीजे की दिशा बदल सकता है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने में पूरी ताकत लगा रही हैं.
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301 निकायों में आज दूसरी कमान का फैसला
मंगलवार को 247 नगर पालिकाओं में उपाध्यक्ष चुने जाएंगे. 47 नगर परिषदों में उपसभापति का चुनाव होगा. सात नगर निगमों में डिप्टी मेयर चुना जाएगा. इस तरह कुल 301 निकायों में स्थानीय सरकार की दूसरी कमान तय होगी.
जिन निकायों में किसी एक पार्टी के पास साफ बहुमत नहीं है, वहां मुकाबला ज्यादा दिलचस्प है. निर्दलीय पार्षद ऐसे मामलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं. पार्टियां भी अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं. कई जगह पार्टियों ने अपने पार्षदों को एक साथ रखा है, ताकि मतदान से पहले कोई पार्षद पाला न बदल सके.
कल के नतीजों ने क्या तस्वीर दिखाई?
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में से 301 के चेयरपर्सन के चुनाव का फैसला हो चुका है. बीजेपी ने 199 निकायों में बोर्ड बनाया, जबकि कांग्रेस को 94 निकाय मिले. आठ जगह दूसरे दलों या निर्दलीयों ने बोर्ड बनाया. नगर निगमों की बात करें तो सात में मेयर चुने जा चुके हैं. इनमें बीजेपी ने अजमेर, उदयपुर, अलवर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा में जीत दर्ज की. बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर बने. जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में मेयर का चुनाव 25 सितंबर को होना है. साकेत नगर पालिका का चुनाव भी इसी दिन होना है.
नगर पालिकाओं में बीजेपी ने 162 बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस के खाते में 80 आए. छह जगह दूसरे दलों या निर्दलीयों ने बोर्ड बनाए. चार नगर पालिकाओं का फैसला अभी बाकी है. 47 नगर परिषदों में से 46 के नतीजे आ चुके हैं. बीजेपी ने 31 परिषदों में जीत दर्ज की, कांग्रेस 13 पर रही. दो परिषदों में दूसरे दलों या निर्दलीयों ने बोर्ड बनाए.
अल्पमत में भी कैसे पलटी बाजी?
अजमेर का नतीजा बताता है कि सिर्फ पार्षदों की संख्या से मेयर का फैसला नहीं होता. यहां कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे. बीजेपी के पास 32. इसके बावजूद अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले और वह मेयर बन गईं. निर्दलीय पार्षदों का समर्थन यहां अहम रहा. वहीं, पाली में भी यही तस्वीर दिखी. कांग्रेस के 29 पार्षद थे, जबकि बीजेपी के 21. फिर भी मेयर की कुर्सी बीजेपी के खाते में गई. अलवर में किसी भी पार्टी के पास साफ बहुमत नहीं था. इसके बावजूद बीजेपी की सुमन लता अग्रवाल को 42 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं.
सीकर में कांग्रेस ने लक्ष्मणगढ़, लोसल और दांतारामगढ़ में जीत दर्ज की, जबकि धोद में बीजेपी का बोर्ड बना. झुंझुनू के डूंडलोद में सिर्फ दो पार्षदों वाली बीजेपी ने निर्दलीयों के समर्थन से अपना अध्यक्ष बनाया. सचिन सैनी इस चुनाव में जीते.
तिजारा में देर रात तक चला विवाद
खैरथल जिले के तिजारा नगर परिषद का चुनाव भी चर्चा में रहा. यहां रात करीब 9:45 बजे पार्षदों ने वोट डाले. पार्षदों को पंचकूला में पुलिस हिरासत में रखे जाने के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. विवाद के बीच कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने में कामयाब रही.
बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी की शीतल राठौड़ सभापति चुनी गईं. यह राजस्थान में पार्टी का पहला नगर परिषद बोर्ड है.
आज निर्दलीय पार्षद क्यों अहम?
मंगलवार की वोटिंग में सबसे ज्यादा नजर उन निकायों पर रहेगी जहां बहुमत का आंकड़ा साफ नहीं है. सोमवार के चुनाव में निर्दलीयों ने कई जगह समीकरण बदले थे. अब उपाध्यक्ष, उपसभापति और डिप्टी मेयर के चुनाव में भी उनकी भूमिका अहम हो सकती है. गुप्त मतदान होने की वजह से पार्टियों के सामने अपने पार्षदों को साथ रखने की चुनौती है. खासकर उन जगहों पर जहां दोनों खेमों के बीच वोटों का अंतर कम है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग का एक मामला भी पूरा गणित बदल सकता है.
शाम 5 बजे मतदान खत्म होगा. इसके बाद वोटों की गिनती शुरू होगी. नतीजे आने के साथ यह भी साफ हो जाएगा कि कल के मेयर-सभापति चुनाव के बाद आज किस दल ने अपनी पकड़ मजबूत की और कहां स्थानीय समीकरण ने फिर से करवट ली.