अमेरिका और ईरान में अब जंग थम गई है. डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए शांति समझौते पर सहमति का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते लंबे समय से बंद होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने के साथ ही इसे फिर से खोले जाने को मंजूरी दे दी गई है. US-Iran के बीच ये शांति समझौता भारत के लिए कई मायनों में राहत भरा है. आइए जानते हैं इससे भारत और भारतीयों को क्या फायदा है?
होर्मुज से लेकर तेल तक ने डराया
बीते 28 फरवरी को पहली बार अमेरिका और इजरायल की ओर से पहली बार ईरान पर हमलों की शुरुआत की गई थी. इसके बाद ईरानी पलटवार ने मिडिल ईस्ट में आग लगा दी और इसकी आंच में दुनिया के कई देश झुलसे. दरअसल, इस जंग के चलते ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जो दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी पूरा करने के लिए जरूरी है. इसके लेकर तनातनी का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला.
Crude Oil Price में आए तेज उछाल ने दुनिया के कई देशों में महंगाई का बम फोड़ दिया. खुद अमेरिका में महंगाई दर उछल गई. इसके अलावा पाकिस्तान, ब्रिटेन से लेकर बांग्लादेश और भारत तक में तेल-गैस का भारी संकट देखने को मिला. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया, तो एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया. ऐसे में ट्रंप के ऐलान के मुताबिक, अगर होर्मुज फिर से खुलता है और तेल-गैस की सप्लाई सुचारू होती है, तो ये एक बड़ी राहत होगी. अगर भारत को इस शांति समझौते के बाद होने वाले फायदों की बात करें, तो भारत और भारतीयों को कई तरह के आर्थिक और रणनीतिक लाभ हो सकते हैं.

पहला फायदा: तेल-गैस का संकट कम होगा
कच्चे तेल पर US-Iran Peace Deal का असर दिखने भी लगा है और सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव में अचानक बड़ी गिरावट आई है. Brent Crude Price 5 फीसदी की गिरावट के साथ कम होकर 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं WTI Crude Price 5.50 फीसदी गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. मर्बन क्रूड में तो और भी ज्यादा करीब 7 फीसदी की गिरावट आई है और ये कम होकर 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है. ईरान और होर्मुज भारत समेत आयात पर निर्भर अन्य देशों के लिए आपूर्ति का सबसे बड़ा क्रेंद्र है और भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है, ऐसे में ये डील देश में Oil-Gas Crisis को कम वाली साबित हो सकती है.
दूसरा फायदा: पेट्रोल-डीजल, LPG हो सकता है सस्ता
Hormuz Strait ओपन होने और तेल-गैस सप्लाई चेन में सुधार से देश में इनका आयात बढ़ जाएगा, जिससे किल्लत खत्म होगी. कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल-डीजल की लागत कम हो सकती है और इसकी कीमतों में आगे गिरावट देखने को मिल सकती है. ये आम भारतीय के लिए एक बड़ी राहत होगी. गैस की आपूर्ति में रुकावट खत्म होने से LPG Crisis कम होगा और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सिलेंडर के दाम घटा सकती हैं. ये न सिर्फ आम लोगों, बल्कि उद्योगों के लिए भी राहत भरा होगा. ईंधन सस्ता होने से महंगाई पर कंट्रोल होगा, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च घटेगा और खाने-पीने की चीजों समेत अन्य जरूरी सामनों की कीमतों में गिरावट आ सकती है.

तीसरा फायदा: शेयर बाजार के सेंटीमेंट में सुधार
ग्लोबल टेंशन, युद्ध, जियो-पॉलिटिकल तनाव ऐसे कारण हैं, जो सीधे शेयर बाजार पर असर डालते हैं. इसका असर भारतीय शेयर बाजार लंबे समय से देख रहा है. बात इजरायल-फिलिस्तीन जंग की हो, रूस-यूक्रेन युद्ध की हो या फिर अमेरिका-ईरान संघर्ष की. हर एक अपडेट का असर Indian Stock Market पर देखने को मिला है. इस बड़ा उदारहण ये है कि ट्रंप ने जैसे ही ईरान के साथ शांति समझौते का ऐलान किया, तो सोमवार को खुलने के साथ ही सेंसेक्स-निफ्टी रॉकेट की रफ्तार से भागने लगे. खासतौर पर ऐसे सेक्टर जो तेल की लागत से संबंधित हैं, उनके शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला.
भारतीय शेयर बाजार से लगातार दूरी बनाए चल रहे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई की धारणा में भी सुधार हो सकता है और एक बार फिर उनकी वापसी हो सकती है. ऐसा होता है, तो बाजार को सपोर्ट मिलेगा. बता दें कि इस साल 2026 में फरवरी महीने को छोड़कर बाकी हर महीने तेज बिकवाली देखने को मिली है. सिर्फ जून महीने के पहले पखवाड़े में FPIs की बिकवाली का आंकड़ा 62,000 करोड़ रुपये के पार निकल चुका है.
चौथा फायदा: रुपया को मजबूती
Crude Oil Price कम होने से भारतीय करेंसी रुपया को भी फायदा होगा, जो कि ग्लोबल टेंशन के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होती नजर आई है और 95 का आंकड़ा पार कर चुकी है. इसके पीछे की वजह भी कच्चा तेल है, क्यों कि क्रूड का भाव घटने के भारत का तेल आयात बिल कम होगा और इससे देश का व्यापार घाटा भी घटेगा. ये करेंसी पर दबाव कम होने से इसके मजबूती के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा.

पांचवां फायदा: लाखों भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत
मिडिल ईस्ट की जंग ने न सिर्फ आयात-निर्यात पर बुरा असर डाला, बल्कि खाड़ी देशों में रहकर रोजगार करने वाले लाखों भारतीयों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बनकर सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 90 लाख भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं. ये Peace Deal इन भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनके रोजगार को लेकर पैदा हुए जोखिम को कम करने में सहायक होगी.