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'ऑफिस के बाद कोई फोन नहीं करता', भारतीय ने बताया कैसा है पोलैंड का वर्क कल्चर

भारत में 10 साल तक आईटी सेक्टर में काम करने वाले एक भारतीय प्रोफेशनल ने पोलैंड में नौकरी के चार साल पूरे होने के बाद दोनों देशों के वर्क कल्चर की तुलना की है. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर जमकर बहस कर रहे हैं.

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पोलैंड का वर्क कल्चर चर्चा में है (Photo:Pexel)
पोलैंड का वर्क कल्चर चर्चा में है (Photo:Pexel)

भारतीय आईटी प्रोफेशनल प्रदीप पंकज सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि भारत में 10 साल नौकरी के दौरान उन्होंने ऐसा माहौल देखा, जहां समय पर ऑफिस छोड़ना भी लोगों की नजरों में आ जाता था.

उन्होंने कहा कि सुबह 8 या 9 बजे ऑफिस पहुंचने के बावजूद कर्मचारियों का शाम 6 से 8 बजे तक ऑफिस में रुकना आम बात थी. अगर कोई कर्मचारी अपनी शिफ्ट पूरी होने के बाद समय पर घर निकल जाता था, तो सहकर्मी और मैनेजर अक्सर उसे अलग नजर से देखते थे.

'कितनी देर ऑफिस में रुके, इस पर भी नजर रहती थी'

प्रदीप के मुताबिक, कई जगहों पर काम पूरा होने के बाद भी कर्मचारियों से देर तक ऑफिस में रुकने की एक अनकही उम्मीद रहती थी.उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति शाम 6 बजे ऑफिस से निकल जाए, तो लोग तुरंत नोटिस करने लगते थे. ऐसा लगता था कि देर तक ऑफिस में रुकना ही मेहनत की पहचान है.

पोलैंड में सिर्फ 8 घंटे का काम

भारत और पोलैंड के वर्क कल्चर की तुलना करते हुए प्रदीप ने कहा कि पोलैंड में स्थिति बिल्कुल अलग है.उनके अनुसार, यहां सामान्य तौर पर कर्मचारी सिर्फ 8 घंटे काम करते हैं. इसके बाद ऑफिस में रुकना पूरी तरह कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर करता है. मैनेजर भी किसी पर अतिरिक्त समय रुकने का दबाव नहीं बनाते.

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देखें वीडियो

ओवरटाइम का मिलता है अलग पैसा

उन्होंने बताया कि अगर कोई कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम करता है, तो उसका अलग से भुगतान किया जाता है.उनके मुताबिक, ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन की तुलना में काफी अधिक होता है. यानी अतिरिक्त काम करने पर सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि अतिरिक्त पैसा भी मिलता है.

ऑफिस के बाद फोन उठाना जरूरी नहीं

प्रदीप ने एक और बड़ा अंतर बताया.उन्होंने कहा कि भारत में ऑफिस समय खत्म होने के बाद भी मैनेजर या टीम के फोन आना आम बात थी, जबकि पोलैंड में ऐसा बहुत कम होता है.अगर कभी मैनेजर कॉल भी कर दें, तो उसे उठाना कर्मचारी की मर्जी होती है. फोन नहीं उठाने पर किसी तरह की नाराजगी या सजा नहीं मिलती.

सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं.कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत में भी अब कई कंपनियां वर्क-लाइफ बैलेंस पर ध्यान देने लगी हैं.वहीं कई लोगों का कहना था कि आज भी देश के कई निजी संस्थानों में देर तक ऑफिस में रुकने की संस्कृति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.यही वजह है कि भारत और यूरोप के वर्क कल्चर की तुलना वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

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