यूपीआई को लेकर नए चार्ज ने कुछ कारोबारियों के लिए चिंता पैदा कर दी है. खासकर यह उन बिजनेस पर ज्यादा असर होगा, जिनका मार्जिन काफी कम है ओर वे अपने कारोबार को स्टेबल करने की तैयारी में जुटे हुए हैं. एक फार्मा कंपनी के डायरेक्टर ने बड़ा खुलासा किया है.
फार्मा कंपनी के डायरेक्टर राहुल मम्मन ने अपनी कंपनी पर संभावित प्रभाव का अनुमान लगाते हुए बताया है कि उनकी कंपनी को भारी नुकसान हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो वे यूपीआई को एक्सेप्ट करने को सीमित कर सकते हैं.
उनकी इस पोस्ट को एक CA कनन बहल ने शेयर करते हुए कहा है कि MDR उन कारोबारों के लिए एक बड़ा बोझ बन सकता है, जिनका मर्जिन केवल 2 से 3 फीसदी है. सीए ने कहा कि 0.4 फीसदी एमडीआर पर 2 से 3 फीसदी मार्जिन वाली कंपनी का कुल कारोबार 11 से 17 फीसदी तक हिट होगा.
सालाना 1.2 करोड़ रुपये का असर
एमपीसी फार्मा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मम्मन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि उनकी कंपनी ने हमेशा से ग्राहकों को NEFT, Cash और चेक जैसे पारंपरिक पेमेंट तरीकों के बजाय UPI के यूज के लिए प्रोत्साहित किया है. ऑपरेशन में हरदिन करीब 1 करोड़ रुपये के UPI पेमेंट का मैनेजमेंट करती है. प्रस्तावित 0.4% चार्ज (MDR) के आधार पर, उन्होंने अनुमान लगाया कि शुल्क लगभग 40,000 रुपये प्रतिदिन या लगभग 1.2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो सकता है.
कम मार्जिन वाले कारोबार के लिए यह हमारे मुनाफे पर बड़ा असर डालता है. मम्मन ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से इस नियम पर फिर से विचार करने के लिए रिक्वेस्ट की है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अतिरिक्त लागत के कारण भुगतान का यह तरीका प्रॉफिटेबल नहीं होता है, तो कंपनी बड़ी रकम के भुगतान के लिए UPI की स्वीकृति को सीमित करने पर विचार कर सकती है.
सभी मर्चेंट पर नहीं लागू होता है ये नियम
संशोधित बदलाव के तहत 2000 रुपये से ज्यादा के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% का MDR लगेगा, जिसकी कुल लिमिट 300 रुपये है. इस सीमा से कम के लेनदेन पर यह चार्ज नहीं लागू होगा. इसका मतलब है कि 96 फीसदी व्यापारी इसके दायरे में नहीं आएंगे.
UPI क्यूआर के माध्यम से प्रति माह 1 लाख रुपये तक का लेनदेन प्राप्त करने वाले व्यापारियों को लेनदेन की राशि चाहे कितनी भी हो, MDR का भुगतान नहीं करना होगा. कुछ सेक्टर्स पर छूट इससे ज्यादा छूट दी गई है. रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, फ्यूल जैसी चीजों पर एमडीआर 0.4 फीसदी के बजाय सिर्फ 5 रुपये का एक समान रेट लागू करने की बात कही गई है. म्यूचुअल फंड, ब्रोकर और इक्विटीज से जुड़े भुगतानों समेत कैपिटल मार्केट के लेन-देन पर ₹300 की सीमा के अधीन 0.02% की कम MDR लागू होगी.