टाटा सन्स (Tata Sons) के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की 5 साल के लिए दोबारा नियुक्ति का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. अब एक नया सवाल सामने आ गया है. मामला टीवीएस मोटर (TVS Motor) से जुड़ा है. चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव एक कंपनी के डायरेक्टर हैं. इस कंपनी का टीवीएस मोटर के साथ कारोबारी रिश्ता सामने आया है.
दरअसल, टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन टाटा सन्स के बोर्ड सदस्य हैं. उन्होंने 17 सितंबर को टाटा सन्स की बोर्ड मीटिंग में एन चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के पक्ष में वोट किया था. अब सवाल उठ रहा है कि टीवीएस मोटर और एन चंद्रशेखरन की फैमिली के कारोबारी रिश्ते की जानकारी टाटा सन्स के बोर्ड को थी या नहीं, क्या बोर्ड को पहले से इस बारे में बताया जा चुका था और क्या यहां हितों के टकराव (Conflict of Interest) का सवाल बनता है?
पहले समझिए पूरा मामला
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एन. चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव हन्नो वन वेयरहाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड (Hanno One Warehousing Private Limited) के डायरेक्टर हैं. यह कंपनी मार्च 2025 में बनी थी. कॉरपोरेट रिकॉर्ड के मुताबिक Hanno Infra LLP के पास कंपनी की 99.99% हिस्सेदारी है. प्रणव के पास सीधे एक शेयर है. कंपनी बनने के कुछ महीने बाद ही इसका टीवीएस मोटर से कारोबारी रिश्ता सामने आया.
TVS Motor ने लीज पर दी जमीन
जून 2025 में टीवीएस मोटर ने तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के उदनापल्ली गांव में करीब 17 एकड़ जमीन Hanno One को लीज पर दी. इस जमीन पर वेयरहाउस बनाने की योजना है. रिपोर्ट के मुताबिक, वेयरहाउस करीब 3.3 लाख वर्ग फुट का होगा. इसकी अनुमानित लागत करीब ₹106.3 करोड़ बताई गई है. नवंबर 2025 में HDFC Bank ने Hanno One को करीब ₹60 करोड़ का कंस्ट्रक्शन लोन ऑफर किया था. यह लोन जमीन के लीज राइट्स और बनने वाली इमारत के आधार पर था.
अब वेणु श्रीनिवासन क्यों चर्चा में हैं?
वेणु श्रीनिवासन टीवीएस मोटर के चेयरमैन एमेरिटस हैं. वह टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन भी हैं. साथ ही टाटा सन्स के बोर्ड में डायरेक्टर हैं. वह टाटा सन्स की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी के सदस्य भी हैं. यह कमेटी चेयरमैन के परफॉर्मेंस से जुड़े मामलों की समीक्षा करती है. 17 सितंबर 2026 को टाटा सन्स बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें एन. चंद्रशेखरन को 5 साल का एक और कार्यकाल देने के पक्ष में वोटिंग हुई.
श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया. उनके अलावा तीन और निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इकलौते बोर्ड मेंबर थे, जिन्होंने चंद्रशेखरन को टाटा सन्य चेयरमैन के रूप में एक और 5 साल का कार्यकाल देने का विरोध किया था. इस विवाद के बीच अब चंद्रशेखरन के परिवार और टीवीएस मोटर के कारोबारी रिश्ते की जानकारी सामने आई है. यहीं से हितों के टकराव और डिस्क्लोजर का सवाल उठने लगा.
हितों के टकराव का मतलब क्या है?
अगर किसी व्यक्ति के फैसले से उसे या उसके परिवार को फायदा हो सकता है, तो यह हितों के टकराव का मामला हो सकता है. टाटा सन्स के कोड ऑफ कंडक्ट में ऐसे वास्तविक या संभावित हितों के टकराव की जानकारी बोर्ड को देने का प्रावधान है. इसलिए अब मुख्य सवाल यह है कि चंद्रशेखरन के परिवार की कंपनी और टीवीएस मोटर के बीच इस कारोबारी रिश्ते की जानकारी क्या टाटा सन्स के बोर्ड को पहले दी गई थी?
मामले में Tata Sons ने क्या कहा
टाटा सन्स ने कहा है कि Hanno One Warehousing के गठन की जानकारी अप्रैल 2025 में उन कंपनियों को दे दी गई थी, जहां चंद्रशेखरन चेयरमैन हैं. टाटा सन्स के मुताबिक, टीवीएस मोटर एक इंडिपेंडेंट लिस्टेड कंपनी है. उसका टाटा ग्रुप की कंपनियों के साथ कारोबार नहीं है. कंपनी का कहना है कि Hanno One और टीवीएस मोटर के बीच हुए कारोबारी लेनदेन के लिए अलग से खुलासा जरूरी नहीं था. यानी टाटा सन्स का पक्ष साफ है, चंद्रशेखरन के परिवार की कंपनी का टाटा मोटर्स के साथ कारोबारी संबंधों की जानकारी बारे में जानकारी उसे पहले ही दे दी गई थी.
मामले में टाटा ट्रस्ट का क्या है रुख
टाटा ट्रस्ट्स का रुख इससे अलग है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट्स का कहना है कि वेणु श्रीनिवासन की ओर से ट्रस्टियों को इस कारोबारी रिश्ते का कोई खुलासा नहीं किया गया था. यही बात विवाद को और बढ़ाती है. क्योंकि श्रीनिवासन खुद टाटा सन्स के बोर्ड में हैं. वह टाटा ट्रस्ट्स से भी जुड़े हैं और उन्होंने चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के पक्ष में वोट किया था. बोर्ड के दूसरे निदेशकों ने भी चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया. नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. बोर्ड ने 4:1 की बहुमत से चंद्रशेखरन को और 5 साल के लिए टाटा सन्स का चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव पास कर दिया.
लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने बाद में इस फैसले की वैधता पर ही सवाल उठा दिए. ट्रस्ट्स का कहना है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए उनके नामित निदेशकों के समर्थन से जुड़ी शर्तों का पालन होना जरूरी था. विवाद यहीं खत्म नहीं होता. 16 सितंबर को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने एक प्रस्ताव जारी किया था. इसमें श्रीनिवासन को टाटा सन्स बोर्ड के कुछ मामलों में हिस्सा लेने और वोट करने से रोकने की कोशिश की गई थी. ट्रस्ट की आपत्ति खास तौर पर टाटा सन्स की शेयर मार्केट में लिस्टिंग जैसे मुद्दों को लेकर थी. लेकिन श्रीनिवासन ने इस रोक को स्वीकार नहीं किया.
उन्होंने कहा कि बोर्ड के सामने सही तरीके से रखे गए मामलों पर वह अपने वोटिंग अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इसके अगले ही दिन उन्होंने चंद्रशेखरन के पक्ष में वोट किया. विवाद अब सिर्फ चेयरमैन की कुर्सी तक नहीं. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पहले से ही टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट्स के बीच विवाद का बड़ा मुद्दा है. अब टीवीएस मोटर का कनेक्शन सामने आने के बाद कॉरपोरेट गवर्नेंस और जानकारी के खुलासे का सवाल भी जुड़ गया है. टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट्स के दावों में अंतर है. इसलिए इस मामले में आगे होने वाले खुलासे और आधिकारिक कदम अहम होंगे.