गणपति बप्पा की मूर्ति आपने खूब देखी होगी. फूलों से सजे, मोतियों की माला पहने, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाते हुए. लेकिन गुजरात के अमरेली में गणपति बप्पा का एक ऐसा रूप सामने आया, जिसे देखने के लिए लोग ठहर ही गए. वजह थी बप्पा की सजावट. यहां गणपति की प्रतिमा को फूलों या कृत्रिम गहनों से नहीं, बल्कि नोटों से सजाया गया. वो भी कोई थोड़े-बहुत नोट नहीं. करीब 25 लाख रुपये की भारतीय करेंसी के साथ अमेरिकी डॉलर भी सजावट का हिस्सा बने.
मामला अमरेली जिले के सावरकुंडला का है. यहां सद्भावना ग्रुप की ओर से गणपति उत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस बार गणपति बप्पा की सजावट को खास बनाने के लिए अलग-अलग मूल्य के भारतीय नोटों का इस्तेमाल किया गया है. मूर्ति को गौर से देखेंगे तो सिर पर बना मुकुट 500 रुपये के नोटों से तैयार किया गया है. गले में 200 रुपये के नोटों की माला सजाई गई है. इसके अलावा हाथ-पैर समेत मूर्ति के अलग-अलग हिस्सों पर भी नोट लगाए गए हैं. यानी बप्पा के दरबार में इस बार फूलों के साथ करेंसी भी नजर आ रही है.

25 लाख रुपये की करेंसी, डॉलर भी शामिल
आयोजकों के मुताबिक, इस पूरी सजावट में करीब 25 लाख रुपये के भारतीय नोट लगाए गए हैं. इसमें 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोट शामिल हैं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इस बार पहली बार सजावट में अमेरिकी डॉलर को भी शामिल किया गया है. यानी गणपति बप्पा के श्रृंगार में भारतीय रुपये के साथ विदेशी करेंसी भी नजर आ रही है.
इस खास सजावट को तैयार करने में करीब 2 से 3 दिन का वक्त लगा. हालांकि इसके पीछे की तैयारी काफी पहले से चल रही थी. आयोजकों ने बताया कि पूरी योजना और सजावट की तैयारी करीब एक महीने से की जा रही थी.
सद्भावना ग्रुप पिछले करीब 20 साल से गणपति उत्सव का आयोजन कर रहा है. लेकिन नोटों से गणपति की सजावट की कहानी करीब 15 साल पुरानी है. लगभग 15 साल पहले पहली बार गणपति की प्रतिमा को करीब 5 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया था. इसके बाद हर बार सजावट को कुछ अलग और खास बनाने की कोशिश की गई. इस बार रकम बढ़कर करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गई. साथ ही पहली बार अमेरिकी डॉलर भी सजावट में शामिल किए गए.
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गणपति की इस अनोखी सजावट की खबर आसपास के इलाकों में पहुंची तो लोग भी दर्शन के लिए आने लगे. कई श्रद्धालुओं के लिए यह सजावट अपने आप में आकर्षण का केंद्र बन गई. अब सवाल ये कि आखिर इतनी बड़ी रकम को नोटों के रूप में सजाने का मकसद क्या है? आयोजकों की मानें तो इसके पीछे सिर्फ भव्यता दिखाना मकसद नहीं है. उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आए और सभी लोग संपन्न हों. यानी नोट यहां सिर्फ सजावट का हिस्सा हैं, लेकिन इसके पीछे संदेश समृद्धि और खुशहाली का बताया जा रहा है.
गणपति उत्सव वैसे भी अलग-अलग इलाकों में अपनी अनोखी सजावट और थीम के लिए जाना जाता है. कहीं गणपति को फूलों से सजाया जाता है, कहीं सोने-चांदी के आभूषणों से, तो कहीं सामाजिक संदेशों के साथ पंडाल तैयार किए जाते हैं. लेकिन अमरेली के सावरकुंडला में इस बार कहानी थोड़ी अलग है. यहां बप्पा के श्रृंगार में 25 लाख रुपये की भारतीय करेंसी और अमेरिकी डॉलर नजर आ रहे हैं. और इसी वजह से गणपति की यह प्रतिमा अब इलाके में चर्चा का केंद्र बनी हुई है.