साल 2026 भारतीय बाजार के लिए अबतक अच्छा नहीं रहा है. सेंसेक्स और निफ्टी एक साल के अंदर अपने रिकॉर्ड हाई से 16 फीसदी और 14 फीसदी गिर चुके हैं. टॉप 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स पिछले साल 1 दिसंबर को 86,159 के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, तबसे यह 13,630 अंक या 16 फीसदी गिर चुका है. इसी तरह, निफ्टी-50 भी 5 जनवरी, 202 को बने अपने रिकॉर्ड लेवल 26,373 से 3,714 अंक या 14% गिर चुका है.
शेयर बाजार में भारी गिरावट आ अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि INDIA VIX एक साल में 22 फीसदी बढ़ा है. यह इंडेक्स निफ्टी का भय इंडिकेटर है, जो शेयर बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता का संकेत देता है.
बाजार क्यों गिर रहा है?
पिछले एक साल में चल रहे वेस्ट एशिया जंग, बढ़ते बॉन्ड यील्ड, FII की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की भावना को बुरी तरह प्रभावित किया है. सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी छह महीने के निचले स्तर पर आ गए, जिससे लगातार सात हफ्तों से जारी गिरावट का सिलसिला जारी रहा, क्योंकि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता रुकावट में फंसने के बाद तेल की कीमतों में वृद्धि हुई.
इस रुकावट ने होर्मुज के रास्ते तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. यह अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ाती हैं, आयात बिल को बढ़ाती हैं और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डालती हैं.
महामारी के बाद सबसे लंबी गिरावट
पिछले सप्ताह, सेंसेक्स और निफ्टी50 में लगातार सातवें सप्ताह गिरावट दर्ज की गई, जो 2020 की महामारी के दौरान हुई गिरावट के बाद से सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला है. इस बीच, सेंसेक्स 49 अंक गिरकर 72,480 पर और निफ्टी 96 अंक गिरकर 22,620 पर बंद हुआ.
कहां तक जाएगा सेंसेक्स-निफ्टी?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि बाजार सतर्क बना हुआ है. निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड, महंगाई की उम्मीदों और ग्लोबल नीतिगत पॉलिसी के संभावित प्रभावों पर लगातार नजर रख रहे हैं. जिस कारण जब तक व्यापक आर्थिक नजरिए पर अधिक स्पष्टता नहीं आ जाती, बाजार के भागीदार मजबूत आधार वाली और स्थिर आय वाली कंपनियों में निवेश करने के प्रति सतर्क रहेंगे.
एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी और डेरिवेटिव रिसर्च एक्सपर्ट्स सुदीप शाह ने कहा कि आगे चलकर, 22550-22500 का स्तर तत्काल सपोर्ट पेश कर सकता है. इस स्तर से नीचे गिरावट आने पर 22350 की ओर नए सिरे से बिकवाली का दबाव बन सकता है. ऊपर की ओर, 22790-22810 का स्तर तत्काल बाधा का काम कर सकता है. इस स्तर से ऊपर निरंतर बढ़त आने पर 22950 तक बढ़ सकती है. हालांकि, व्यापक ढांचा अभी भी कमजोर है, और सार्थक रिकवरी के लिए निरंतर खरीदारी की आवश्यकता होगी.
पीएल कैपिटल के मुख्य व्यवसाय अधिकारी विक्रम कसाट ने कहा कि अक्टूबर के लिए, निवेशकों को शॉर्ट टर्म अस्थिरता पर कम और आय की स्पष्टता, घरेलू तरलता और मजबूत प्राइस क्षमता वाले क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, साथ ही कच्चे तेल, रुपये और वैश्विक दर अपेक्षाओं पर भी बारीकी से नजर रखनी चाहिए.
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा कि 22,600 का स्तर तात्कालिक रूप से महत्वपूर्ण समर्थन स्तर बना हुआ है, इसके बाद 22,400 का स्तर आता है, जबकि 22,750-22,800 का स्तर तात्कालिक बाधा और 23,000 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध का काम कर सकता है. इंडेक्स छह महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करने और व्यापक बाजार भागीदारी के कमजोर बने रहने के कारण, निकट भविष्य में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिसके लिए चुनिंदा नजरिए अपनाने और प्रमुख समर्थन स्तरों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)