सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट बनाना ही बिजनेस की सफलता की गारंटी नहीं है. अगर किसी बिजनेस को लंबे समय तक चलाना है, तो उसे अपना प्रोडक्ट बेचने की कला भी आनी चाहिए. यह सलाह Zoho के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और डॉक्टरों समेत नए उद्यमियों को दी है. उनका कहना है कि बिजनेस शुरू करने वालों को खुद कई सेल्स कॉल्स में शामिल होना चाहिए, ग्राहकों से बात करनी चाहिए और रिजेक्शन का सामना करते हुए भी कोशिश जारी रखनी चाहिए.
वेंबू ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में यह सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या डॉक्टर बिजनेस की दुनिया में कदम रख रहा है, तो उसे शुरुआत में कई सेल्स कॉल्स पर जाना चाहिए. उनके मुताबिक, ग्राहक का इनकार सुनना भी एंटरप्रेन्योरशिप की ट्रेनिंग का अहम हिस्सा है. श्रीधर वेंबू के अनुसार, सिर्फ शानदार प्रोडक्ट या स्ट्रॉन्ग टेक्निकल नॉलेज किसी कंपनी को सफल बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है. फाउंडर को यह भी समझना जरूरी है कि ग्राहक उसके प्रोडक्ट या आइडिया के लिए पैसे क्यों खर्च करेगा.
सेल्स से बेहतर होती है कम्युनिकेशन स्किल
श्रीधर वेंबू ने कहा कि लगातार ग्राहकों से बातचीत करने का फायदा सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं रहता. इससे फाउंडर की कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होती है. कई बार किसी शानदार आइडिया को समझाना उतना आसान नहीं होता, जितना उसे बनाना. सेल्स कॉल्स के दौरान उद्यमी यह सीखते हैं कि ग्राहक किस तरह सोचता है, उसकी जरूरत क्या है और किसी प्रोडक्ट की वैल्यू किस तरह समझाई जाए. इससे फाउंडर्स को सेल्स टीम की चुनौतियों और उनकी भूमिका को भी बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है.
हर बिजनेस में कुछ न कुछ बेचना ही पड़ता है
वेंबू का मानना है कि सेल्स का अनुभव उद्यमियों में सेल्स प्रोफेशनल्स के प्रति सम्मान भी बढ़ाता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजनेस चाहे कोई भी हो, किसी न किसी रूप में उसे अपना प्रोडक्ट, सर्विस या आइडिया बेचना ही पड़ता है. उनकी इस सलाह पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपने अनुभव साझा किए. कुछ लोगों ने बताया कि लगातार मिलने वाले इनकार से धैर्य बढ़ता है और असफलता को देखने का नजरिया बदलता है.
एक यूजर ने बताया कि उसने स्पष्ट तरीके से बोलने और दबाव में शांत रहने की आदत विकसित करने के लिए कई हफ्तों तक भारत में रैंडम टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबरों पर कॉल की. वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि उसे रियल एस्टेट, एडवरटाइजिंग सेल्स और फायर एक्सटिंग्विशर बेचने से जो अनुभव मिला, बाद में माइक्रो-SaaS प्रोडक्ट तैयार करने में काम आया.
टेक्निकल नॉलेज के साथ बिजनेस स्किल जरूरी
श्रीधर वेंबू की सलाह खास तौर पर उन प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण है, जो टेक्निकल बैकग्राउंड से बिजनेस में आना चाहते हैं. इंजीनियर, वैज्ञानिक या डॉक्टर किसी समस्या का तकनीकी समाधान तैयार करने में माहिर हो सकते हैं, लेकिन उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए ग्राहक की जरूरत और सेल्स प्रोसेस समझना भी जरूरी है. यानी किसी प्रोडक्ट की तकनीकी खूबी के साथ यह समझना भी जरूरी है कि बाजार उसे क्यों खरीदेगा. श्रीधर वेंबू ने हाल के दिनों में बिजनेस के सामने एक और चुनौती पर भी बात की है. उन्होंने AI से जुड़ी बढ़ती लागत और मेमरी (Memory) की कीमतों में तेजी को लेकर चिंता जताई है.
उनका कहना है कि पिछले साल मेमरी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और AI टोकन की लागत के साथ मिलकर यह कंपनियों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल बना सकती है. वेंबू के मुताबिक, लंबे समय तक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज इस धारणा के साथ विकसित हुईं कि मेमरी की लागत बहुत कम या लगभग नगण्य है. अब यह धारणा बदल रही है. उनका मानना है कि सॉफ्टवेयर को अधिक मेमरी-एफिशिएंट बनाना होगा और यह बदलाव AI सिस्टम पर भी लागू होगा. उन्होंने संकेत दिया है कि मेमरी एफिशिएंसी और इससे जुड़े तकनीकी समाधान अब उनके रिसर्च का भी हिस्सा हैं.