क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने करीब तीन साल पहले एक ऐसी कंपनी में पैसे लगाए थे, जो पुरानी कारों की खरीद-बिक्री के कारोबार में तेजी से अपनी जगह बना रही है. अब यही कंपनी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ₹2,500-3,000 करोड़ तक का IPO लाने की योजना पर काम कर रही है और इसके लिए सेबी के पास ड्राफ्ट फाइल कर दिया गया है. यह कंपनी पुरानी कारों की खरीद-बिक्री के लिए जानी जाने वाली स्पिनी (Spinny) है.
इसकी पैरेंट कंपनी वैल्यूड्राइव टेक (Valuedrive Technologies) ने IPO की दिशा में कदम बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया है. यह फाइलिंग पैरेंट कंपनी के स्ट्रक्चर में बदलाव के करीब एक महीने बाद हुई है. अगस्त 2026 में स्पिनी की पैरेंट कंपनी 'वैल्यूड्राइव टेक' को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला गया था.
कंपनी IPO से जुटाएगी ₹2500-3000 करोड़
कंपनी फिलहाल IPO के जरिए करीब ₹2,500 करोड़ से ₹3,000 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रही है. प्रपोज्ड इश्यू में नए शेयर जारी किए जा सकते हैं. इसके अलावा मौजूदा शेयरहोल्डर्स को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का मौका मिल सकता है. हालांकि, अभी यह शुरुआती ड्राफ्ट स्टेज है. इसलिए IPO का अंतिम आकार आगे बदल सकता है. सेबी की मंजूरी और कंपनी की आगे की प्रक्रिया के बाद ही इश्यू की अंतिम तस्वीर साफ होगी.
IPO के लिए इन कंपनियों को बनाया मैनेजर
कंपनी ने IPO की तैयारी के लिए कई बड़े वित्तीय संस्थानों को जोड़ा है. इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी और सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया शामिल हैं. इसके अलावा मॉर्गन स्टैनली इंडिया कंपनी और 360 वन डब्ल्यूएएम को भी बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है. ये संस्थान IPO की प्रक्रिया में कंपनी को इश्यू से जुड़ी तैयारियों और बाजार में शेयर लाने की प्रक्रिया में मदद करेंगे.
सूत्रों के मुताबिक, स्पिनी की पैरेंट कंपनी 2027 में शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है. हालांकि, अभी लिस्टिंग की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है. कंपनी की आगे की प्रक्रिया सेबी की मंजूरी पर निर्भर करेगी. इसलिए फिलहाल 2027 को संभावित टाइमलाइन के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
कंपनी की कमाई में कितनी बढ़ोतरी?
IPO की तैयारी ऐसे समय हो रही है जब कंपनी के कारोबार में ग्रोथ देखने को मिली है. रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, FY25 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब 25% बढ़कर ₹4,657 करोड़ हो गया. FY24 में यह ₹3,730 करोड़ था. सूत्रों के मुताबिक, FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹6,000 करोड़ तक पहुंच गया. FY27 में इसमें 25-30% की और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. यानी कंपनी एक तरफ शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपने कारोबार को बढ़ाने पर भी फोकस कर रही है.
Spinny कंपनी का कारोबार क्या है?
स्पिनी की शुरुआत 2015 में नीरज सिंह, मोहित गुप्ता और रमंशू कुमार ने की थी. नीरज सिंह कंपनी के सीईओ हैं. कंपनी का मुख्य कारोबार पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का है. इसके अलावा यह कार फाइनेंसिंग, इंश्योरेंस और आफ्टर-सेल्स सर्विस जैसी सुविधाएं भी देती है. यानी कंपनी सिर्फ कार बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरानी कार खरीदने-बेचने वाले ग्राहकों के लिए पूरा इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है.
कंपनी का 25 शहरों में है कारोबार
स्पिनी ने अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए कई अधिग्रहण भी किए हैं. ट्रूबिल (Trubil), गोमैकेनिक (GoMechanic) और ऑटोकार इंडिया (AutoCar India) के अधिग्रहण से इसका ऑटोमोटिव कारोबार और बड़ा हुआ है. फिलहाल कंपनी हर महीने करीब 15,000 कारों की बिक्री कर रही है और करीब 25 शहरों में मौजूद है. इसके प्लेटफॉर्म के जरिए 100 से ज्यादा शहरों के सेलर्स को भी लेन-देन की सुविधा मिलती है.
अब तक कितनी फंडिंग मिली
स्पिनी अब तक करीब 78 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है. इसके प्रमुख निवेशकों में टाइगर ग्लोबल और एस्सेल शामिल हैं. पिछली फंडिंग में एक्सेल लीडर्स फंड, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स और दूसरे निवेशकों से करीब 16.5 करोड़ डॉलर जुटाए गए थे. यह फंडिंग करीब 150-180 करोड़ डॉलर के वैल्यूएशन पर हुई थी.
स्पिनी 2021 में बनी यूनिकॉर्न
स्पिनी ने 2021 में करीब 28.3 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी. इस राउंड के बाद कंपनी का वैल्यूएशन करीब 180 करोड़ डॉलर पहुंच गया और वह यूनिकॉर्न बन गई. इस राउंड में अबू धाबी की ADQ, टाइगर ग्लोबल और एवेनिर ग्रोथ जैसे निवेशक शामिल थे. इसके अलावा एलिवेशन कैपिटल, जनरल कैटलिस्ट, फंडामेंटम पार्टनरशिप, थिंक इन्वेस्टमेंट्स और वेस्टब्रिज कैपिटल जैसे निवेशकों ने भी कंपनी में पैसा लगाया है.
कंपनियां IPO क्यों लाती हैं?
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO ) का मतलब है जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए शेयर बाजार में जारी करती है. आसान भाषा में समझें तो कंपनी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा जनता को बेचकर शेयर बाजार में प्रवेश करती है. आईपीओ लाने के पीछे सबसे बड़ा कारण पैसा जुटाना होता है. कंपनी IPO के जरिए जुटाए पैसे का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए कर सकती है, जैसे- कारोबार बढ़ाना, कर्ज चुकाना, नए प्रोजेक्ट शुरू करना या मौजूदा निवेशकों को हिस्सेदारी बेचने का मौका देना- इसे ऑफर फॉर सेल (OFS) कहते हैं.
ऑफर फॉर सेल में मिलने वाला पैसा कंपनी के पास नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों के पास जाता है. कंपनी की बाजार में पहचान बढ़ाना भी आईपीओ लाने के पीछे एक मकसद होता है. लिस्टेड कंपनी होने से कारोबार और शेयर की कीमत बाजार के सामने आती है. अगर IPO में कंपनी नए शेयर जारी करती है, तो उससे मिलने वाला पैसा कंपनी के पास जाता है. इसे फ्रेस इश्यू (Fresh Issue) कहते हैं. वहीं अगर पुराने निवेशक अपने शेयर बेचते हैं, तो वह OFS होता है और उस बिक्री से मिलने वाला पैसा संबंधित शेयरधारक को मिलता है.