टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा टाटा संस के आईपीओ के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं. लेकिन टाटा संस के दूसरे बड़े शेयरधारक शापूरजी पलोनजी ग्रुप (SP Group) ने IPO लाने के फैसले का स्वागत किया है.
दरअसल, गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड की बैठक में दो बड़े फैसले लिए गए. इसमें चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए फिर से कमान सौंपने का फैसला लिया गया है. वहीं RBI के सख्त नियमों की वजह से टाटा संस को शेयर बाजार में उतारने पर भी सहमति बन गई है.
RBI ने इसी महीने के 11 तारीख को टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन वापस करने की अर्जी को नामंजूर कर दिया था. इसके तहत RBI ने टाटा संस को अपनी स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत नियमानुसार पब्लिक लिस्टिंग कराने का निर्देश दिया है. टाटा संस के दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक शापूरजी पलोनजी ग्रुप के प्रमुख शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इसका पूरे दिल से स्वागत करते हैं.
उन्होंने कहा कि आईपीओ लाने का फैसला किसी एक पक्ष की जीत या दूसरे की हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार संस्थागत निर्माण के सिद्धांतों को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक पल है.
टाटा संस में किसकी कितनी हिस्सेदारी है?
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स (Sir Dorabji & Sir Ratan Tata Trusts) की हिस्सेदारी करीब 66% है. टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप का हिस्सा 18.37% है, जो लिस्टिंग का खुलकर समर्थन कर रहा है. ताकि वे अपनी हिस्सेदारी आंशिक रूप से बेचकर कर्ज कम कर सकें. इसके अलावा टाटा ग्रुप कंपनियां टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील की हिस्सेदारी करीब 13% है.
शापूरजी पलोनजी मिस्त्री के अनुसार, टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग केवल एक वित्तीय या विनियामक मामला नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक दायित्व है. यह भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण व्यावसायिक समूहों में से एक में सार्वजनिक जवाबदेही को मजबूत करेगा, साथ ही टाटा समूह की दान-पुण्य परंपरा को भी एक नए स्तर पर ले जाएगा.
टाटा ग्रुप के साथ 100 साल का रिश्ता
टाटा और SP ग्रुप के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूती शापूरजी पलोनजी ग्रुप और टाटा समूह का रिश्ता 100 साल से भी अधिक पुराना है. मिस्त्री ने उम्मीद जताई कि यह फैसले दोनों समूहों के बीच नए संवाद, गहरी समझ और मजबूत साझेदारी का आधार बनेगा. मिस्त्री ने कहा कि जब टाटा संस सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होगी, तो इससे टाटा संस के गर्वनेंस में और अधिक स्पष्टता आएगी. निवेशकों और शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी. टाटा ट्रस्ट्स की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी.
आखिर में शापूरजी मिस्त्री ने टाटा समूह के सभी हितधारकों ट्रस्टी, बोर्ड, शेयरधारकों और कर्मचारियों से अपील की कि वे इस फैसले को किसी विवाद के रूप में न देखकर एक ब्रिज के रूप में देखें. उन्होंने कहा कि देशहित उनके लिए सबसे ऊपर है और आने वाली पीढ़ियों को मतभेद की विरासत के बजाय सहयोग, पारस्परिक सम्मान और राष्ट्र निर्माण की विरासत मिलनी चाहिए.
बता दें, एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच विवाद जगजाहिर है. नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन और रतन टाटा के सौतेले भाई हैं. नोएल टाटा को छोड़कर बाकी सभी बोर्ड के सदस्यों ने एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाने के पक्ष में वोट किया है. हालांकि अभी एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने के फैसले को सालाना आम बैठक में मंजूरी मिलना बाकी है, जिसमें टाटा ट्रस्ट की 66% हिस्सेदारी है.