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SBI ने बजाई खतरे की घंटी, RBI से कहा- दो बार बढ़ाएं रेपो रेट, जानिए आपके लिए क्यों टेंशन?

SBI रिसर्च के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बाहरी झटके और महंगाई से जुड़े जोखिम ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पैदा कर सकते हैं. SBI रिसर्च के एक मॉडल में अगले 15 दिनों में क्रूड के 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है.

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महंगाई बढ़ने से ब्याज दर बढ़ने का खतरा. (Photo: AI)
महंगाई बढ़ने से ब्याज दर बढ़ने का खतरा. (Photo: AI)

आपकी नजर रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़ों पर जरूर पड़ी होगी. इन्हें अगर आपने महज मासिक डेटा समझकर अनदेखा कर दिया हो, तो आपको ये जान लेना चाहिए कि इनका सीधा संबंध आपकी मासिक किस्त यानी EMI से है. कैसे है, ये जानने से पहले महंगाई के कहर को जान लीजिए.

अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो 8 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. जुलाई में ये 4.45 फीसदी थी. खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है. प्याज, लहसुन और अदरक जैसे रोजमर्रा के सामान की कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ा है. वहीं अगस्त में थोक महंगाई भी बढ़कर 9.92 फीसदी पहुंच गई है.

महंगाई के बाद अब EMI की टेंशन
बढ़ती महंगाई आने वाले महीनों में आपकी EMI पर भी असर डाल सकती है. इसकी वजह है SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट, जिसमें RBI को अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की दो बढ़ोतरी करने की सलाह दी गई है. हालांकि, RBI ने अभी रेपो रेट बढ़ाने का कोई फैसला नहीं किया है. फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर है और अगस्त की बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार इसमें कोई बदलाव नहीं किया था. लेकिन SBI रिसर्च के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बाहरी झटके और महंगाई से जुड़े जोखिम ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पैदा कर सकते हैं.

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क्रूड ऑयल बना सबसे बड़ा रिस्क
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं. SBI रिसर्च के एक मॉडल में अगले 15 दिनों में क्रूड के 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, रिपोर्ट ने इसे स्ट्रेस सिनेरियो बताया है, सामान्य अनुमान नहीं. दूसरे मॉडल में अगले 15 दिनों के दौरान क्रूड की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया है. क्रूड महंगा होने का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे ट्रांसपोर्ट और कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिसका असर आगे चलकर कई सामान और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है. अगस्त में थोक महंगाई में फ्यूल और पावर की महंगाई 22.93 फीसदी तक पहुंच गई थी.

महंगाई का दायरा भी बढ़ा
SBI रिसर्च के एनालिसिस में महंगाई का दबाव ज्यादा चीजों तक फैलने के संकेत भी मिले हैं. CPI में 90 फीसदी वेटेड कंट्रीब्यूशन को कवर करने वाली कमोडिटीज की संख्या जनवरी 2026 में 22 थी, जो जुलाई में बढ़कर 53 हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, बेवरेजेज, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में इनपुट कॉस्ट, आउटपुट प्राइसेज के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में कंपनियों पर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने का दबाव बढ़ सकता है.

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RBI ने 50 बेसिस पॉइंट बढ़ाए तो कितनी बढ़ेगी EMI?
अब सवाल उस चीज का, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा. अगर RBI अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता है, तो रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट यानी आधे फीसदी का इजाफा होगा. इसका असर खास तौर पर फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर पड़ सकता है. मसलन, 50 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन पर फिलहाल 8.25 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से करीब 42,603 रुपये की EMI बनती है. अगर बैंक पूरे 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी ग्राहक तक पहुंचाता है, तो ब्याज दर बढ़कर 8.75 फीसदी हो सकती है. ऐसे में EMI करीब 44,186 रुपये हो जाएगी. यानी हर महीने करीब 1,583 रुपये ज्यादा EMI देनी पड़ सकती है. साल भर में देखें तो ये बोझ करीब 19 हजार रुपये का होगा. हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक ब्याज दर में कितनी बढ़ोतरी करता है और आपके लोन की रीसेट पॉलिसी क्या है.

FD वालों के लिए राहत की उम्मीद
रेपो रेट बढ़ने का एक फायदा FD कराने वाले ग्राहकों को मिल सकता है. अगर बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो नई FD कराने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर पर पैसा लॉक करने का मौका मिल सकता है. यानी जहां कर्ज लेने वालों पर ब्याज बढ़ने का दबाव आ सकता है, वहीं नई FD कराने वालों को ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद बन सकती है.

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अक्टूबर में RBI का अगला फैसला अहम
अब सबकी नजर RBI की अगली MPC बैठक पर रहेगी. ये बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होगी. इसी बैठक में RBI महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ब्याज दरों पर अपना अगला फैसला लेगा. यानी आने वाले दिनों में महंगाई के आंकड़े सिर्फ बाजार और सरकार के लिए ही अहम नहीं होंगे. इनका असर आपकी जेब, होम लोन की EMI और FD के रिटर्न पर भी पड़ सकता है.

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