AI इंसानों का खात्मा कर सकता है! यह बयान लोगों को डराने के लिए काफी है लेकिन ऐसा क्यों कहा जा रहा है? Anthropic के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने कंपनी से यही कहते हुए इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद से सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. वहीं, बिलाल चुगताई ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखा जिसमें कॉक्सन और दूसरे एक्सपर्ट की तरह एआई कंपनियों के Super intelligent AI सिस्टम डेवलप कर लेने की बात कही है. एआई की भाषा में इसे 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट' कहते हैं. इसका साफ मतलब ये होता है कि AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इंसानी इनपुट की जरूरत नहीं होती है.
एक्सपर्ट्स को भी होने लगी है चिंता
बात केवल यहीं पर खत्म नहीं होती है. अब एआई को लेकर एक्सपर्ट्स की चिंता भी बढ़ने लगी है. इसे लेकर उन्होंने आगे लिखा कि पिछले कुछ सालों में एआई की रफ्तार बहुत तेज है.
जब मैंने साल 2022 की शुरुआत में मैंने एआई पर काम शुरू किया था, तब एआई बेकार चीजें ही पता कर पाता था. लेकिन केवल चार सालों में ही इसने सदियों पुरानी मैथ की समस्या को सॉल्व करने में मदद कर रहा है.
दिन पर दिन और आएंगे अपडेट
बिलाल को ऐसा भी लगता है कि एआई का अब सुरक्षित इस्तेमाल किया जा सकता है. अपनी पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि अगले कुछ वर्षों में AI कंपनियां ऐसे सुपर-इंटेलिजेंट AI सिस्टम बनाने में कामयाब हो जाएंगी, जो हर फील्ड में इंसानों से आगे होंगी और उसने अच्छे से काम करेंगी. बिलाल को डर है कि ये AI सिस्टम वो नहीं करेंगे जो हम चाहते हैं. माने अपने मर्जी से चलेंगे.